Ranchi : रिम्स की जमीन की फर्जी दस्तावेजों के आधार पर खरीद-बिक्री के मामले में एसीबी की जांच अब तेज हो गई है। एसीबी ने इस मामले में जमीन दलाल और बिल्डर सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। एसीबी का कहना है कि आने वाले दिनों में कई और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। एसीबी की जांच में यह भी सामने आया है कि इस पूरे मामले में सरकारी विभागों के कई अधिकारी-कर्मियों की भूमिका संदिग्ध है। अब एसीबी करीब 16 सरकारी अधिकारी और कर्मचारियों पर कार्रवाई की तैयारी कर रही है। इसके लिए एसीबी ने मंत्रिमंडल सचिवालय एवं निगरानी विभाग से दिशा-निर्देश लेना शुरू कर दिया है।
गलत वंशावली के आधार पर हुआ सौदा
एसीबी की प्रारंभिक जांच में पता चला है कि कथित जमीन मालिक ने गलत वंशावली (फर्जी पारिवारिक दस्तावेज) के आधार पर जमीन को अपना बताकर कन्वर्जन कराया और फिर बिल्डर को 31 लाख रुपये में रिम्स की जमीन बेच दी। जमीन पर अपार्टमेंट भी बनाया गया। अपार्टमेंट के कुछ फ्लैट जमीन मालिक के हिस्से में भी दिए गए थे। अब एसीबी इस पूरे सौदे की परत-दर-परत जांच कर रही है।
अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका
एसीबी का मानना है कि बिना सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत के इतना बड़ा फर्जीवाड़ा संभव नहीं हो सकता। जांच एजेंसी की नजर अब उन अधिकारियों पर है, जिनकी भूमिका जमीन के निबंधन (रजिस्ट्री), म्यूटेशन (नामांतरण) और कन्वर्जन (भूमि परिवर्तन) जैसी प्रक्रियाओं में रही है। एसीबी की रडार पर वे अधिकारी भी हैं, जिन्होंने दस्तावेजों की जांच किए बिना फाइलें आगे बढ़ाईं या प्रक्रिया को मंजूरी दी।
हाई कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुई थी एफआईआर
इस मामले में झारखंड हाई कोर्ट के आदेश पर 5 जनवरी को एसीबी रांची थाना में प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की गई थी। एफआईआर में रिम्स प्रबंधन के साथ-साथ कई अज्ञात पदाधिकारी और कर्मचारियों को भी आरोपी बनाया गया था। एसीबी का कहना है कि इस केस में दोषियों को चिन्हित कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
कई विभागों की भूमिका की जांच जारी
एसीबी की टीम फिलहाल कई सरकारी कार्यालयों से दस्तावेज और रिकॉर्ड खंगाल रही है। जिन विभागों के अधिकारी-कर्मियों की भूमिका जांच के दायरे में है, उनमें शामिल हैं:
- राजस्व कार्यालय, रांची
- रांची नगर निगम
- निबंधन कार्यालय, रांची
- रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा)
- रांची क्षेत्रीय विकास प्राधिकार (आरआरडीए)
एसीबी यह पता लगाने में जुटी है कि जमीन से जुड़े कागजात किस तरह पास किए गए और किसने किन आधारों पर मंजूरी दी।
एसीबी नेक्सस का पता लगाने में जुटी
एसीबी अधिकारियों के अनुसार यह मामला सिर्फ जमीन की खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें जमीन दलाल, बिल्डर, फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले लोग और सरकारी सिस्टम के अंदर बैठे कुछ लोग शामिल हो सकते हैं। एसीबी अब पूरे नेटवर्क का पता लगा रही है ताकि सभी जिम्मेदार लोगों को कानून के दायरे में लाया जा सके।
आगे और गिरफ्तारियां संभव
एसीबी का कहना है कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और जल्द ही कई अन्य आरोपियों पर भी शिकंजा कस सकता है। रिकॉर्ड की जांच के आधार पर और भी लोगों से पूछताछ की जा सकती है।
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