Dhanbad : धनबाद रिंग रोड निर्माण के लिए जमीन अधिग्रहण के दौरान मुआवजा बांटने में हुए घोटाले को लेकर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने बड़ी कार्रवाई की है। इस मामले में एसीबी ने कुल 17 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है। आरोप पत्र 06 अप्रैल 2026 को माननीय निगरानी न्यायालय, धनबाद में समर्पित किया गया। यह पूरा मामला धनबाद जिले के मौजा धनबाद, मनईटांड़ और दुहाटांड़ से जुड़ा हुआ है, जहां रिंग रोड के लिए जमीन अधिग्रहित की गई थी। उसी जमीन के मुआवजा वितरण में गड़बड़ी का आरोप लगा है।
क्या है पूरा मामला
एसीबी के अनुसार, धनबाद जिला भू-अर्जन कार्यालय द्वारा जिन लोगों की जमीन अधिग्रहित की गई थी, उन्हें मुआवजा देने के नाम पर बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई। आरोप है कि उस वक्त के भू-अर्जन पदाधिकारी और कई सरकारी कर्मचारियों ने अपने पद का गलत इस्तेमाल किया। जांच में यह बात सामने आई कि कुछ बिचौलियों और फर्जी दावेदारों से मिलकर फर्जी कागजात तैयार कराए गए और बिना सही जांच-पड़ताल किए मुआवजा की राशि उन लोगों के नाम पर निकाल दी गई, जिनका जमीन से कोई लेना-देना नहीं था। एसीबी का कहना है कि इस गड़बड़ी से सरकार को आर्थिक नुकसान हुआ है।
किन धाराओं में दर्ज हुआ केस
यह मामला निगरानी थाना कांड संख्या 32/16 के तहत दर्ज किया गया था। इसमें IPC की कई गंभीर धाराएं लगाई गई हैं, जिनमें धोखाधड़ी, जालसाजी और सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग से जुड़ी धाराएं शामिल हैं। इसके अलावा इस केस में SC/ST एक्ट और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धाराएं भी लगाई गई हैं।
9 जनवरी को हुई थी गिरफ्तारी
एसीबी की जांच के दौरान 09 जनवरी 2026 को इस मामले में कई प्राथमिकी और अप्राथमिकी अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ और दस्तावेजी जांच के बाद अब एसीबी ने चार्जशीट तैयार कर कोर्ट में जमा कर दी है।
कौन-कौन हैं आरोपी
चार्जशीट में भू-अर्जन कार्यालय के तत्कालीन अधिकारी, कर्मचारी, अमीन, दैनिक वेतनभोगी कर्मी और निजी व्यक्ति शामिल हैं।
प्रमुख आरोपी
- उदयकांत पाठक (तत्कालीन जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, धनबाद)
- मिथिलेश कुमार (तत्कालीन कानूनगो, जिला भू-अर्जन कार्यालय)
- अनुपमा कुमारी (तत्कालीन निम्नवर्गीय लिपिक)
- शंकर प्रसाद दूबे (तत्कालीन अमीन)
- विशाल कुमार (तत्कालीन अंचलाधिकारी, धनबाद)
- रविन्द्र कुमार (तत्कालीन दैनिक वेतनभोगी अमीन)
- उमेश महतो (तत्कालीन दैनिक वेतनभोगी अमीन)
अन्य आरोपी
- सुमेश्वर शर्मा
- आलोक बरियार उर्फ जैकी लाला
- सुशील प्रसाद
- कुमारी रत्नाकर उर्फ रत्नाकर देवी
- दिलीप गोप
- बप्पी राय चौधरी उर्फ गोपी राय चौधरी
- रामकृपाल गोस्वामी
- अशोक कुमार महथा
- अनिल कुमार उर्फ अनिल कुमार सिंहा
- काली प्रसाद सिंह
जांच में क्या निकला सामने
एसीबी के मुताबिक, कई मामलों में मुआवजा देने से पहले जमीन से जुड़े दस्तावेजों की सही तरीके से जांच नहीं की गई। आरोप है कि कुछ लोगों ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए खुद को जमीन का दावेदार बताया और सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत से मुआवजा की रकम निकलवा ली। एसीबी का कहना है कि यह काम सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से किया गया।
कोर्ट में अब आगे क्या होगा
अब चूंकि चार्जशीट कोर्ट में दाखिल हो चुकी है, इसलिए इस मामले की सुनवाई निगरानी न्यायालय में होगी। कोर्ट में गवाहों और सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। अगर आरोप साबित होते हैं तो दोषियों को सजा भी हो सकती है।
एसीबी का साफ संदेश
एसीबी ने कहा है कि सरकारी पैसे की बंदरबांट और जमीन मुआवजा में फर्जीवाड़ा करने वालों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। विभाग का कहना है कि भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में किसी को बख्शा नहीं जाएगा।
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