Garhwa : गढ़वा में निजी स्कूलों की मनमानी को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं। अभिभावकों का कहना था कि स्कूल हर साल री-एडमिशन के नाम पर फीस वसूल रहे हैं और नए सत्र में किताब-कॉपी के नाम पर भी अतिरिक्त पैसे लिए जा रहे हैं। इन शिकायतों के बाद अब जिला प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है।
री-एडमिशन के नाम पर वसूली पर सख्ती
प्रशासन ने साफ कर दिया है कि किसी भी स्कूल को हर साल री-एडमिशन के नाम पर अलग से फीस लेने की अनुमति नहीं है।
अगर कोई स्कूल ऐसा करता पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
किताब-कॉपी के नाम पर भी खेल बंद
कई अभिभावकों ने यह भी शिकायत की थी कि स्कूल खुद तय दुकानों से किताबें खरीदने का दबाव बना रहे हैं और बाजार से महंगी किताबें लेने को मजबूर किया जा रहा है। इस पर प्रशासन ने कहा है कि अभिभावकों को अपनी पसंद की दुकान से किताब खरीदने की पूरी आजादी है। स्कूल किसी खास दुकान से खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकते।
जांच के लिए टीम गठित, होगी निगरानी
मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने जांच के लिए टीम गठित कर दी है। यह टीम अलग-अलग स्कूलों में जाकर फीस और किताबों की व्यवस्था की जांच करेगी और गड़बड़ी मिलने पर रिपोर्ट सौंपेगी।
नियम तोड़ने वालों पर होगी कार्रवाई
प्रशासन ने सभी निजी स्कूलों को चेतावनी दी है कि वे तय नियमों का पालन करें। अगर कहीं भी मनमानी या अभिभावकों से ज्यादा पैसे वसूलने की शिकायत सही पाई गई, तो स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
अभिभावकों को भी दिया गया संदेश
प्रशासन ने अभिभावकों से भी अपील की है कि अगर उनसे किसी तरह की अवैध वसूली की जा रही है, तो इसकी शिकायत तुरंत संबंधित अधिकारियों से करें। ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।
शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने की कोशिश
कुल मिलाकर प्रशासन का मकसद साफ है कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे और अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े। इस सख्ती के बाद उम्मीद है कि निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगेगी।


