Palamu : पलामू जिले के सतबरवा प्रखंड में खनन विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। हैरानी की बात यह है कि जिन जगहों पर बालू का नामोनिशान नहीं है, वहां 7 स्थलों को केटेगरी-1 बालू घाट घोषित कर दिया गया है। जिला खनन कार्यालय द्वारा जारी इस आदेश के बाद स्थानीय स्तर पर इसे बड़ी प्रशासनिक चूक माना जा रहा है।
तीन पंचायतों में 7 घाट घोषित
न नदी, न बालू… फिर कैसे बना घाट?
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिन जगहों को घाट घोषित किया गया है, वहां न तो कोई नदी है और न ही बालू का स्थायी स्रोत। जानकार बताते हैं कि इलाके में बालू का मुख्य स्रोत औरंगा नदी है, जो इन चिन्हित स्थलों से अलग पंचायतों से होकर गुजरती है। ऐसे में बिना भौगोलिक आधार के घाट घोषित करना समझ से परे है।
जनप्रतिनिधियों ने भी उठाए सवाल
इस फैसले को लेकर पंचायत स्तर पर भी नाराजगी साफ नजर आ रही है। बकोरिया पंचायत की मुखिया संतोष उरांव का कहना है कि जिन जगहों को घाट बताया गया है, वहां से एक ट्रैक्टर बालू निकालना भी संभव नहीं है। वहीं घुटुआ पंचायत की मुखिया मनीता देवी ने बताया कि सोहड़ी नाला में पहले बालू मिलता था, लेकिन अब वहां नाममात्र ही बचा है। इसी तरह रेवारातू पंचायत की मुखिया अनिता देवी ने साफ कहा कि चपराना नाला में अब बालू बचा ही नहीं है और बिना जमीन की जांच किए लिया गया यह फैसला पूरी तरह गलत है।
पुरानी रिपोर्ट पर लिया गया फैसला?
बताया जा रहा है कि यह पूरा निर्णय करीब तीन साल पुरानी रिपोर्ट के आधार पर लिया गया है। बिना मौके की ताजा जांच किए ही कागजों पर घाट घोषित कर दिया गया। जिला खनन पदाधिकारी सुनील कुमार का कहना है कि अगर मौके पर बालू उपलब्ध होगा तो ही उठाव किया जाएगा, नहीं तो संभव नहीं होगा।
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