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    Home»झारखंड»गैस की किल्लत के बीच कोयले की याद, झारखंड से निकल सकती है राहत की राह
    झारखंड

    गैस की किल्लत के बीच कोयले की याद, झारखंड से निकल सकती है राहत की राह

    Team JoharBy Team JoharMarch 17, 2026No Comments3 Mins Read
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    गैस
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    Ranchi : दुनिया में चल रहे तनाव का असर अब सीधे आम लोगों की जिंदगी पर दिखने लगा है। पश्चिम एशिया में हालात बिगड़ने के बाद गैस सप्लाई पर दबाव बढ़ा है और इसका असर भारत के बाजारों में भी महसूस हो रहा है। कई जगहों पर कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई प्रभावित हुई है। होटल, ढाबे और छोटे कारोबारी अब दूसरे विकल्प तलाशने लगे हैं।

    ऊर्जा के संतुलन की अहमियत फिर आई सामने

    इस पूरे हालात ने एक बात साफ कर दी है कि किसी भी देश के लिए सिर्फ एक ही ऊर्जा स्रोत पर निर्भर रहना ठीक नहीं है। भारत में कोयला लंबे समय से भरोसेमंद ऊर्जा का आधार रहा है। देश के ज्यादातर थर्मल पावर प्लांट कोयले से ही चलते हैं और यही बिजली हमारी रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करती है।

    इंडक्शन का ट्रेंड बढ़ा, लेकिन बिजली जरूरी

    गैस की किल्लत के बीच लोग इंडक्शन चूल्हों की ओर बढ़ रहे हैं। लेकिन इसके लिए लगातार और भरोसेमंद बिजली चाहिए। भारत में इतनी बड़ी आबादी को लगातार बिजली देने के लिए आज भी कोयला ही सबसे मजबूत आधार बना हुआ है। ऐसे में कोयले की अहमियत और बढ़ जाती है।

    झारखंड की ताकत बन सकता है कोयला

    झारखंड देश के प्रमुख कोयला उत्पादक राज्यों में गिना जाता है। यहां के खनन क्षेत्र देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। अगर आधुनिक तकनीक और पारदर्शिता के साथ खनन को बढ़ाया जाए, तो इससे न सिर्फ ऊर्जा संकट कम होगा बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के बड़े मौके भी बनेंगे।

    अवैध खनन बना बड़ी चुनौती

    हालांकि, एक सच्चाई यह भी है कि राज्य में अवैध कोयला खनन की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। रामगढ़, हजारीबाग और धनबाद जैसे इलाकों में यह समस्या बार-बार सामने आती है। इससे सरकार को राजस्व का नुकसान होता है और सुरक्षा के साथ-साथ पर्यावरण पर भी खतरा बढ़ता है।

    व्यवस्थित खनन से मिलेगा दोहरा फायदा

    अगर अवैध खनन पर सख्ती से रोक लगाकर इसे व्यवस्थित तरीके से चलाया जाए, तो सरकार की आमदनी बढ़ेगी और स्थानीय लोगों को सुरक्षित रोजगार मिलेगा। साथ ही, ऊर्जा क्षेत्र भी मजबूत होगा।

    घरेलू संसाधनों पर जोर देने का समय

    मौजूदा वैश्विक हालात यही इशारा कर रहे हैं कि भारत को अपने घरेलू संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करना होगा। कोयले का संतुलित और जिम्मेदार उपयोग देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत कर सकता है। इसके साथ ही यह झारखंड जैसे राज्यों के विकास और रोजगार के नए रास्ते भी खोल सकता है।

    संतुलित सोच से ही मिलेगी स्थिरता

    आने वाले समय में जरूरत इस बात की है कि ऊर्जा के हर स्रोत का संतुलित उपयोग हो। कोयला, गैस और दूसरे विकल्प मिलकर ही देश को स्थिर और मजबूत बना सकते हैं। यही रास्ता अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देगा और आम लोगों को राहत भी।

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