Ranchi : झारखंड विधानसभा में बजट सत्र का नौंवां दिन कई महत्वपूर्ण सवाल और चर्चाओं के साथ पूरा हुआ। इस दौरान मुख्य रूप से बाह्य कोटा से काम करने वाले अधिकारियों और आउटसोर्सिंग व्यवस्था पर जोर दिया गया। संसदीय कार्यमंत्री राधाकृष्ण किशोर ने विधायक अमित यादव के सवाल के जवाब में स्पष्ट किया कि अब मुख्यमंत्री, सचेतक, बोर्ड और निगम के अध्यक्षों के आप्त सचिव और निजी सहायक, जो बाह्य कोटा से काम कर रहे हैं, सरकारी और संविदाकर्मियों जैसी सुविधाएं प्राप्त करेंगे। इसमें बीमा और अन्य लाभ शामिल हैं। मंत्री ने कहा कि यह सुविधा तब तक जारी रहेगी जब तक वे अपने पद पर कार्यरत रहेंगे। लाभ पाने के लिए उनका बैंक अकाउंट बैंक ऑफ इंडिया में होना अनिवार्य है, क्योंकि सरकार ने बैंक ऑफ इंडिया के साथ एमओयू किया है।
आउटसोर्सिंग व्यवस्था धीरे-धीरे समाप्त
वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी के सवाल के जवाब में बताया कि आउटसोर्सिंग व्यवस्था को धीरे-धीरे समाप्त किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था भाजपा शासनकाल में शुरू हुई थी। संसदीय चर्चा में यह भी सामने आया कि वर्तमान में कई विभाग अभी भी आउटसोर्सिंग से संचालित हो रहे हैं। तिवारी ने चिंता जताई कि लगभग 1.54 लाख पद अभी भी रिक्त हैं और नए पद स्वीकृत नहीं हुए हैं। करीब 50 प्रतिशत पद खाली होने की वजह से विभागों का काम प्रभावित हो रहा है।
नियुक्तियों और संसाधनों में वृद्धि
वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार अपने संसाधनों को बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने बताया कि अब तक 20 हजार से अधिक नियुक्तियां की जा चुकी हैं।
इटखोरी अनुमंडल बनाने का प्रस्ताव
सांसद कुमार उज्जवल ने इटखोरी को अनुमंडल बनाने का सवाल उठाया। इस पर मंत्री दीपक बिरूआ ने कहा कि इसके लिए उपायुक्त और प्रमंडलीय आयुक्त के माध्यम से प्रस्ताव भेजा जाए। इस तरह बजट सत्र में कर्मचारियों की सुविधाओं, आउटसोर्सिंग नीति और नए प्रशासनिक सुधारों पर स्पष्ट संदेश दिया गया।
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