Ranchi : जंगल सिर्फ हरियाली नहीं, हजारों परिवारों की रोजी-रोटी का जरिया भी बन सकते हैं। इसी सोच के साथ झारखंड के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (हॉफ) संजीव कुमार की अध्यक्षता में विभागीय समीक्षा बैठक हुई। बैठक में साफ कहा गया कि वन विभाग की योजनाओं का सीधा फायदा गांवों, खासकर वनवासियों और आदिवासी समाज तक पहुंचे।
लघु वन उपज से बढ़ेगी आमदनी
संजीव कुमार ने कहा कि महुआ, मधु, तेंदूपत्ता, साल बीज जैसे लघु वन उत्पादों का सही तरीके से संग्रहण, प्रसंस्करण और विपणन हो तो ग्रामीणों की आय बढ़ सकती है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि इन उत्पादों को बाजार से जोड़ा जाए ताकि बिचौलियों की भूमिका कम हो और असली लाभ गांव तक पहुंचे। वन आधारित उद्योगों को भी बढ़ावा देने की बात कही गई। इसमें लकड़ी और बांस से जुड़े काम, हस्तशिल्प, वृक्षारोपण, चारा उत्पादन, फल, मधुमक्खी पालन, नर्सरी प्रबंधन और मशरूम उत्पादन जैसे विकल्प शामिल हैं। साफ संदेश था कि जंगल को बचाते हुए रोजगार के नए रास्ते तैयार किए जाएं।
हाथी और मानव संघर्ष पर सख्ती
बैठक में हाथी से जुड़ी घटनाओं पर गंभीर चर्चा हुई। संजीव कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का स्पष्ट निर्देश है कि हाथी से किसी की जान न जाए और यदि कोई हादसा होता है तो मुआवजा 12 दिनों के भीतर दिया जाए। अधिकारियों को कहा गया कि ऐसे मामलों में ढिलाई बिल्कुल न हो। हाथी प्रभावित क्षेत्रों की पहचान, कॉरिडोर का विकास और रेस्क्यू सेंटर बनाने पर जोर दिया गया। ट्रेंकुलाइजर टीम और क्यूआरटी को सक्रिय रखने के निर्देश दिए गए। बताया गया कि राज्य के 18 वन जिलों में हाथियों की आवाजाही रहती है, इसलिए सभी वन प्रमंडल आपसी समन्वय से काम करें।
पार्क, इको टूरिज्म और मैपिंग पर फोकस
वन विभाग द्वारा बनाए गए सभी पार्कों की मैपिंग और बेहतर रखरखाव पर भी चर्चा हुई। वन अग्नि संवेदनशील क्षेत्रों और मानव-वन्य जीव संघर्ष वाले इलाकों का मानचित्र तैयार करने का निर्देश दिया गया। इको टूरिज्म साइट के विकास की रूपरेखा तैयार करने को कहा गया ताकि पर्यटन से भी स्थानीय लोगों को रोजगार मिल सके। पार्कों की देखरेख के लिए एक विशेष टीम बनाने का सुझाव रखा गया। यह टीम दूसरे राज्यों की व्यवस्था का अध्ययन करेगी और जो मॉडल बेहतर होगा उसे अपनाने की सिफारिश करेगी।
अवैध गतिविधियों पर रोक
बैठक में वन अपराध, वन भूमि अतिक्रमण, अवैध खनन और अवैध आरा मिल पर सख्ती से रोक लगाने की बात कही गई। संयुक्त वन प्रबंधन समिति को मजबूत करने और उसकी सदस्य संख्या बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। सदस्यों के प्रशिक्षण के बेहतर तरीकों पर मंथन किया गया। वन भूमि अभिलेख के रखरखाव, सेवांत लाभ, केंद्र और राज्य प्रायोजित योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति की भी समीक्षा हुई।
लैंड बैंक और चारागाह विकास का सुझाव
प्रधान मुख्य वन संरक्षक सह निदेशक बंजर भूमि विकास बोर्ड एटी मिश्रा ने लैंड बैंक बनाने और उसकी सूची तैयार करने का सुझाव दिया। वहीं वन्य प्राणी से जुड़े अधिकारियों ने चारागाह विकास और कॉरिडोर को समृद्ध करने पर जोर दिया ताकि हाथियों और अन्य वन्य जीवों को पर्याप्त स्थान मिल सके और मानव संघर्ष कम हो।
कई वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद
राज्य स्तरीय इस समीक्षा बैठक में वन विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सभी ने अपने-अपने क्षेत्र की स्थिति रखी और सुधार के सुझाव दिए।
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