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    Home»झारखंड»झारखंड में अप्रैल से लागू होंगे नए लेबर कोड, आर्थिक सर्वेक्षण में हुई पुष्टि
    झारखंड

    झारखंड में अप्रैल से लागू होंगे नए लेबर कोड, आर्थिक सर्वेक्षण में हुई पुष्टि

    Muskan ChoudharyBy Muskan ChoudharyFebruary 22, 2026No Comments4 Mins Read
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    श्रम कानून
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    Ranchi : झारखंड में राज्य सरकार पुराने श्रम कानूनों को आसान बनाकर केंद्र सरकार के चार नए लेबर कोड लागू करने की तैयारी में है। कल विधानसभा में पेश झारखंड आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट 2025-26 में इसका जिक्र किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल तक इन कोड्स के लिए जरूरी नियमावलियां तैयार कर ली जाएंगी। सरकार का कहना है कि इन बदलावों से राज्य के लेबर मार्केट में बड़े सुधार की उम्मीद है, लेकिन रास्ता आसान नहीं होगा।

    कौन-कौन से हैं ये चार लेबर कोड?

    केंद्र सरकार पहले ही चार बड़े श्रम सुधार कानून लागू कर चुकी है— वेतन संहिता, 2019, सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020, औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य परिस्थिति संहिता, 2020। ये चारों लेबर कोड देशभर में श्रम कानूनों को सरल और एकीकृत करने के उद्देश्य से लाए गए हैं। अब झारखंड सरकार इन्हें राज्य में प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए अपनी स्तर पर आवश्यक नियमावलियां तैयार कर रही है।

    सैलरी स्ट्रक्चर में होगा बड़ा बदलाव

    रिपोर्ट के अनुसार, वेतन संहिता 2019 के तहत कुल सैलरी का कम से कम 50% हिस्सा बेसिक पे होना जरूरी होगा। अभी कई सेक्टर में बेसिक कम और अलाउंस ज्यादा होता है। इस बदलाव से उन उद्योगों में वेज कॉस्ट 8 से 15% तक बढ़ सकती है, जहां अलाउंस का हिस्सा ज्यादा है। खासकर माइनिंग, स्टील और कंस्ट्रक्शन सेक्टर पर इसका असर दिख सकता है।

    गिग और असंगठित कामगारों को मिलेगा फायदा

    नई सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था के तहत गिग, प्लेटफॉर्म और असंगठित कामगारों को भी कवरेज देने की बात कही गई है। साथ ही, छह साल से ज्यादा सेवा कर चुके कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी की पात्रता अवधि पांच साल से घटाकर एक साल करने का प्रस्ताव है। इससे कर्मचारियों को सीधा फायदा मिलेगा। ईएसआईसी कवरेज पूरे देश में बढ़ाने से झारखंड के बड़ी संख्या में इनफॉर्मल वर्कर्स को फॉर्मल सिस्टम में लाने की उम्मीद जताई गई है।

    कोयला सेक्टर पर खास नजर

    राज्य का कोयला क्षेत्र अकेले 85 हजार से ज्यादा फॉर्मल वर्कर्स को रोजगार देता है। इसके अलावा बड़ी संख्या में इनफॉर्मल डिपेंडेंट वर्कफोर्स भी इससे जुड़ी है। ऐसे में श्रम सुधारों का असर इस सेक्टर पर खास तौर पर देखने को मिलेगा।

    एमएसएमई के सामने होंगी चुनौतियां

    रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि जब तक हर कोड के तहत नियम अधिसूचित नहीं हो जाते, तब तक कंपनियों को डुअल कंप्लायंस सिस्टम में काम करना पड़ेगा। इससे भ्रम और अनिश्चितता की स्थिति बन सकती है। खासतौर पर हैंडीक्राफ्ट, टेक्सटाइल और फूड प्रोसेसिंग जैसे एमएसएमई सेक्टर, जो पहले से कम मार्जिन पर काम करते हैं, उनके लिए यह बदलाव आसान नहीं होगा।

    खतरनाक उद्योगों में बढ़ेगी सुरक्षा

    व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य परिस्थिति संहिता के तहत खतरनाक उद्योगों में 40 साल से अधिक उम्र के कामगारों के लिए सेफ्टी ऑडिट अनिवार्य होगा। सालाना हेल्थ चेकअप से बीमारियों का समय पर पता चल सकेगा और कार्यस्थल की स्थिति सुधारने में मदद मिलेगी।

    जागरूकता और डिजिटल सिस्टम पर जोर

    आर्थिक सर्वेक्षण में इस बात पर खास जोर दिया गया है कि नए लेबर कोड प्रभावी ढंग से लागू हों, इसके लिए सरकार को तेजी से नियम अधिसूचित करने होंगे। साथ ही एक यूनिफाइड डिजिटल कंप्लायंस पोर्टल तैयार करने की जरूरत बताई गई है, ताकि नियोक्ताओं और कर्मचारियों के लिए प्रक्रियाएं आसान और पारदर्शी बन सकें। रिपोर्ट में दूरदराज के आदिवासी इलाकों में जागरूकता अभियान चलाने की भी सिफारिश की गई है, जिससे श्रमिकों तक इन नए कानूनों की सही जानकारी पहुंच सके। उद्देश्य यही है कि ये लेबर सुधार झारखंड की अर्थव्यवस्था को अधिक समावेशी और मजबूत बनाने में मदद करें। हालांकि सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि कागज पर तैयार किए गए ये सुधार जमीनी स्तर पर भी उतनी ही प्रभावशीलता से लागू हो सकें।

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