Latehar : झारखंड के लातेहार जिले के चंदवा में एक बेहद दर्दनाक हादसा हो गया। बरकाकाना–बरवाडीह रेलखंड पर महुआमिलान और निद्रा रेलवे स्टेशन के बीच डाउन लाइन पर ट्रेन की चपेट में आकर हाथी के एक बच्चे की मौत हो गई। यह घटना चंदवा थाना क्षेत्र के पुतरी टोला गांव के पास हुई, जहां हाथियों का झुंड रेलवे ट्रैक पार कर रहा था।
झुंड के साथ पटरी पार कर रहा था हाथी का बच्चा
जानकारी के मुताबिक, जंगल से निकलकर हाथियों का एक झुंड रेलवे लाइन पार कर रहा था। इसी दौरान तेज रफ्तार ट्रेन आ गई और एक छोटा हाथी उसकी चपेट में आ गया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि वह गंभीर रूप से घायल हो गया। ट्रेन तो आगे निकल गई, लेकिन घायल हाथी ट्रैक के किनारे तड़पता रहा। घटना की खबर मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और बचाव की कोशिश शुरू की।
आक्रोशित झुंड ने किसी को पास नहीं जाने दिया
हादसे के बाद हाथियों का झुंड वहीं डेरा डाले रहा। बताया जा रहा है कि झुंड काफी गुस्से में था और किसी को भी घायल बच्चे के पास नहीं जाने दे रहा था। हाथी की मां लगातार अपने बच्चे के पास खड़ी रही। मां का अपने घायल बच्चे के पास डटे रहना वहां मौजूद लोगों के लिए बेहद भावुक कर देने वाला दृश्य था। वनकर्मी, ग्रामीण और पशु चिकित्सक मौके पर थे, लेकिन हाथियों के आक्रामक व्यवहार के कारण कोई भी करीब नहीं जा सका। अधिकारियों को हालात संभालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।
कई घंटों तक ठप रहा रेल परिचालन
घटना के बाद अप और डाउन दोनों रेल लाइनों पर ट्रेनों का परिचालन रोक दिया गया। यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। रेलवे और वन विभाग के अधिकारी पूरी रात मौके पर मौजूद रहे। रेंजर नंदकुमार महतो और डीएफओ प्रवेश अग्रवाल देर रात चंदवा पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। रेलवे की ओर से एक लाइट इंजन की व्यवस्था की गई, जिससे अधिकारी घटनास्थल तक पहुंच सके।
मां के सामने ही बच्चे ने तोड़ा दम
घायल हाथी की हालत लगातार बिगड़ती गई। उसकी मां पूरे समय उसके आसपास घूमती रही और किसी को पास नहीं आने दे रही थी। आखिरकार आधी रात के बाद गंभीर रूप से घायल हाथी के बच्चे ने दम तोड़ दिया। यह दृश्य वहां मौजूद लोगों के लिए बेहद मार्मिक था।
सुबह हुआ पोस्टमार्टम, रिपोर्ट तैयार होगी
मंगलवार सुबह वन विभाग की टीम फिर से मौके पर पहुंची। हाथी के शव का पोस्टमार्टम कराने की तैयारी की गई। अधिकारियों ने कहा कि पूरी घटना की रिपोर्ट तैयार की जाएगी और भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
फिर उठा बड़ा सवाल
इस हादसे के चलते अप लाइन पर करीब सात घंटे और डाउन लाइन पर लगभग 12 घंटे तक रेल परिचालन बाधित रहा। मंगलवार को स्थिति सामान्य होने के बाद ट्रेनों का संचालन फिर से शुरू हुआ। यह घटना एक बार फिर रेलवे ट्रैक और वन्यजीवों के बीच टकराव की गंभीर समस्या को सामने लाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि हाथियों के पारंपरिक रास्तों की पहचान कर वहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाने चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाओं को रोका जा सके।


