Ramgarh : जिले के कांकेबार गांव में बीती देर रात करीब 18 हाथियों के झुंड ने गांव के खेतों में घुसकर आलू, प्याज, लहसुन और सरसों की फसल को पूरी तरह नष्ट कर दिया। सुबह जब किसान खेतों की ओर पहुंचे, तो उन्होंने महीनों की मेहनत कुछ ही घंटों में मिट्टी में मिलती देखी, जिससे अफरा-तफरी मच गई।
ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों के अचानक आने से लोग घर में दुबकने को मजबूर हो गए। फसल बर्बादी का सबसे ज्यादा असर महिला किसानों पर पड़ा है, जिनके परिवार की आय का मुख्य साधन खेती ही है। प्रभावित महिला किसानों ने बताया कि भोजन, बच्चों की पढ़ाई और दैनिक जरूरतों को पूरा करना अब मुश्किल हो गया है।
रातभर जागकर खेत बचाने की कोशिश
ग्रामीणों ने बताया कि हाथियों के डर से उन्हें रातभर जागना पड़ता है। कई बार मशाल, ढोल और पटाखों से हाथियों को भगाने की कोशिश की गई, लेकिन झुंड बड़ा होने के कारण प्रयास नाकाम रहे। किसानों का आरोप है कि वन विभाग मौके पर समय पर नहीं पहुंचता और नुकसान के आकलन के लिए गठित समिति भी अब तक गांव नहीं आई। किसान सुरेंद्र महतो ने कहा कि उनकी आलू की पूरी फसल नष्ट हो गई है और अब सरकार से मुआवजे की उम्मीद ही सहारा है।
वन विभाग का जवाब
वन विभाग के रेंजर बटेश्वर पासवान ने कहा कि विभाग की टीम इलाके में लगातार कैंप कर रही है और हाथियों को जंगल की ओर खदेड़ने का प्रयास जारी है। रेंजर के अनुसार रामगढ़ जिले के टांकेवा क्षेत्र में 18 हाथियों का झुंड मौजूद है। उन्होंने बताया कि जिन किसानों की फसल बर्बाद हुई है, उन्हें फॉर्म भरकर मुआवजा दिया जाएगा।
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