Johar Live Desk : ईरान में बढ़ती महंगाई और आर्थिक संकट के खिलाफ शुरू हुए विरोध प्रदर्शन शुक्रवार को 13वें दिन में प्रवेश कर गए हैं। अब यह आंदोलन केवल महंगाई तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि प्रदर्शनकारियों ने मौजूदा सरकार को बदलने की भी मांग शुरू कर दी है। वर्तमान सरकार 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से शासन कर रही है।
विरोध प्रदर्शन देश के 31 प्रांतों में फैल चुके हैं। राजधानी तेहरान के डॉक्टरों के मुताबिक, केवल छह अस्पतालों में कम से कम 217 प्रदर्शनकारियों की मौत हुई है, जिनमें अधिकतर गोली लगने से मारे गए।
सरकार ने प्रदर्शन को रोकने के लिए देशव्यापी इंटरनेट शटडाउन लागू कर दिया है। नेटब्लॉक्स के अनुसार, कनेक्टिविटी सामान्य स्तर का केवल 1% रह गई है। इस ब्लैकआउट से प्रदर्शनकारियों की गतिविधियों पर नजर रखना और उनके अधिकारों पर असर पड़ा है।
नोबेल शांति पुरस्कार विजेता शिरीन एबादी और पत्रकार मसीह अलीनेजाद ने चेतावनी दी है कि इंटरनेट ब्लैकआउट के दौरान प्रदर्शनकारियों पर हिंसा हो सकती है। स्टारलिंक की मदद से ईरान के लोग वीडियो शेयर कर रहे हैं, जिससे दुनियाभर में प्रदर्शन की खबरें पहुंच रही हैं।
ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी ने भी प्रदर्शनकारियों का समर्थन करते हुए लोगों से अपील की है कि वे सरकार को बदलने के लिए मिलकर काम करें।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान की स्थिति पर करीब से नजर रख रहा है और प्रदर्शनकारियों को नुकसान पहुंचाए जाने पर दखल दे सकता है।
सरकारी मीडिया प्रेस टीवी का कहना है कि प्रदर्शन में विदेशी समर्थक तत्व शामिल हैं और सुरक्षा बल ने कई हथियारबंद लोगों को मार गिराया या गिरफ्तार किया। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने कहा कि देश के खिलाफ हथियारबंद कार्रवाई करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।
ईरान में बढ़ती हिंसा और इंटरनेट शटडाउन के बीच देश में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है, और प्रदर्शनकारियों और सरकार के बीच टकराव लगातार बढ़ रहा है।

