Johar Live Desk : PM मोदी इन दिनों जापान की यात्रा पर हैं। इस दौरान भारत और जापान ने मिलकर चंद्रमा के मिशन को आगे बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता किया है। दोनों देशों ने ‘चंद्रयान-5’ मिशन के तहत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर अंतरिक्ष यान भेजने के लिए हाथ मिलाया है। इस समझौते पर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (जाक्सा) ने हस्ताक्षर किए। इस मौके पर जाक्सा के उपाध्यक्ष मातसुरा मायुमी और जापान में भारत के राजदूत सिबी जॉर्ज मौजूद थे।
चंद्रयान-5 का लक्ष्य
चंद्रयान-5 मिशन का उद्देश्य चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के उन क्षेत्रों का अध्ययन करना है, जहां हमेशा छाया रहती है। इस मिशन में चंद्रमा पर पानी और अन्य अस्थिर पदार्थों की खोज की जाएगी। इसरो द्वारा बनाया गया चंद्र लैंडर और जापान द्वारा बनाया गया चंद्र रोवर इस मिशन का हिस्सा होंगे। यह यान जाक्सा के एच3-24एल रॉकेट से लॉन्च किया जाएगा। इसरो इस मिशन के लिए वैज्ञानिक उपकरण भी तैयार करेगा, जो चंद्रमा के ध्रुवीय क्षेत्र में मौजूद पदार्थों का विश्लेषण करेंगे।
PM मोदी ने जताई खुशी
जापान के अखबार ‘द योमिउरी शिंबुन’ को दिए साक्षात्कार में पीएम मोदी ने कहा, “मुझे खुशी है कि भारत और जापान चंद्रयान-5 या लूपेक्स मिशन के लिए साथ आए हैं। यह मिशन चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के बारे में हमारी जानकारी को और बढ़ाएगा।” उन्होंने कहा कि भारत और जापान की वैज्ञानिक टीमें मिलकर अंतरिक्ष विज्ञान को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगी। पीएम ने कहा, “हमारी अंतरिक्ष साझेदारी न केवल हमारे ज्ञान का विस्तार करेगी, बल्कि जीवन को बेहतर बनाने में भी मदद करेगी।”
भारत की अंतरिक्ष उपलब्धियां
PM ने भारत की अंतरिक्ष यात्रा को वैज्ञानिकों की मेहनत और नवाचार की मिसाल बताया। उन्होंने कहा, “चंद्रयान-3 की चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर ऐतिहासिक लैंडिंग से लेकर अन्य अंतरग्रहीय मिशनों तक, भारत ने दिखाया है कि अंतरिक्ष आखिरी सीमा नहीं, बल्कि अगली सीमा है।” उन्होंने यह भी कहा कि अंतरिक्ष विज्ञान का असर हमारे रोजमर्रा के जीवन में दिखता है, जैसे कृषि, आपदा प्रबंधन और संचार के क्षेत्र में।
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