Ranchi : प्रस्तावित लोकसभा और विधानसभा परिसीमन को लेकर झारखंड में आदिवासी समाज ने अपनी चिंता खुलकर सामने रखी है. रविवार को पूर्व मंत्री बंधु तिर्की के नेतृत्व में सामाजिक संगठनों, विधि विशेषज्ञों और जनप्रतिनिधियों के प्रतिनिधिमंडल ने मोराबादी स्थित राज्य अतिथि गृह में एआईसीसी झारखंड प्रभारी के. राजू से मुलाकात कर अनुसूचित जनजाति (एसटी) के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को सुरक्षित रखने की मांग उठाई.
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि परिसीमन के दौरान झारखंड की किसी भी एसटी आरक्षित लोकसभा या विधानसभा सीट में कटौती नहीं होनी चाहिए. यदि भविष्य में लोकसभा और विधानसभा की कुल सीटें बढ़ाई जाती हैं तो एसटी और एससी के लिए आरक्षित सीटों की संख्या भी उसी अनुपात में बढ़ाई जाए.
बैठक में बंधु तिर्की ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल जल्द ही लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मिलकर इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा करना चाहता है. उन्होंने के. राजू से इस मुलाकात की व्यवस्था कराने का अनुरोध किया. साथ ही 30 अगस्त को रांची के मोरहाबादी मैदान में प्रस्तावित “आदिवासी एकता महाजुटान रैली” में राहुल गांधी को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करने की भी अपील की.
अखिल भारतीय आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय समन्वयक शशि पन्ना ने कहा कि आदिवासी आरक्षित सीटों की सुरक्षा के लिए संविधान के अनुच्छेद 330(2) और 332(3) में आवश्यक संशोधन किया जाना चाहिए. वहीं वरिष्ठ अधिवक्ता सुभाषिश रशीक सोरेन और डॉ. रामचन्द्र उरांव ने परिसीमन से जुड़े संवैधानिक और कानूनी पहलुओं पर अपनी बात रखते हुए बताया कि इस संबंध में एक विधिक प्रारूप तैयार किया जा रहा है.
के. राजू ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि वे राहुल गांधी से उनकी मुलाकात कराने का प्रयास करेंगे और आरक्षित सीटों की सुरक्षा संबंधी सुझावों को पार्टी नेतृत्व तक पहुंचाएंगे. बैठक में केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष अजय तिर्की ने सरना धर्म कोड का मुद्दा भी उठाते हुए इसे राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुखता से उठाने की मांग की.
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