Hazaribagh : हजारीबाग के जय प्रकाश नारायण केन्द्रीय कारा से फरार हुए तीनों सजायाफ्ता कैदियों को हजारीबाग पुलिस ने महाराष्ट्र के सोलापुर जिले से गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी करमाला थाना क्षेत्र के कोरटी स्थित एक ईंट भट्ठा से की गई, जहां तीनों मजदूरी कर रहे थे। सभी अभियुक्तों को ट्रांजिट रिमांड पर हजारीबाग लाया गया है। इस बात का खुलासा हजारीबाग एसपी अंजनी अंजन ने मीडिया के सामने किया।
31 दिसंबर की रात जेल से फरारी
एसपी अंजनी अंजन ने बताया कि बीते 31 दिसंबर 2025 की रात करीब 1.30 बजे तीनों कैदी जेल से फरार हो गए थे। सुबह 7 बजे इसकी सूचना मिलते ही पुलिस और जिला प्रशासन के आला अधिकारी मौके पर पहुंचे और पूरे घटनास्थल का निरीक्षण किया। जांच में सामने आया कि कैदियों ने जेल वार्ड की खिड़की के लोहे के रॉड को काटा और बेडशीट को फाड़कर रस्सी बनाई। इसी के सहारे वे नीचे उतरे और चारदीवारी फांदकर फरार हो गए। फरार कैदियों में देवा भुईयां उर्फ देव कुमार भुईयां, राहुल रजवार और जितेन्द्र रवानी शामिल हैं। तीनों धनबाद जिले के रहने वाले हैं और अलग अलग मामलों में 20 वर्ष, 27 वर्ष और आजीवन कारावास की सजा काट रहे थे।
SIT का गठन, कई राज्यों में छापेमारी
घटना की गंभीरता को देखते हुए एसपी अंजनी अंजन ने सदर एसडीपीओ अमित आनंद (IPS) के नेतृत्व में तीन विशेष जांच टीमों का गठन किया। एक टीम तकनीकी साक्ष्यों पर काम कर रही थी, दूसरी टीम कैदियों के मूवमेंट का ट्रेल कर रही थी और तीसरी टीम विभिन्न स्थानों पर लगातार छापेमारी कर रही थी। जांच में पता चला कि जेल से भागने के बाद तीनों सबसे पहले सिंदूर चौक पहुंचे। वहां से वे टोटो और पिकअप वाहन के जरिये ईचाक, बरकठा, बरही, कोडरमा होते हुए गया पहुंचे। गया से ट्रेन पकड़कर क्यूल और फिर जसीडीह पहुंचे, जहां उन्होंने पुणे जाने वाली ट्रेन का दो दिन इंतजार किया।
महाराष्ट्र पहुंचकर ईंट भट्ठा में छिपे
4 जनवरी 2026 को तीनों जसीडीह पुणे एक्सप्रेस से महाराष्ट्र के दौंड जंक्शन पहुंचे। वहां से बस और पैदल सफर करते हुए सोलापुर जिले के करमाला थाना क्षेत्र के कोरटी गांव पहुंचे। यहां वे एक परिचित ईंट भट्ठा मालिक के यहां मजदूरी करने लगे। इसी दौरान पुलिस ने सटीक सूचना के आधार पर छापेमारी कर तीनों को गिरफ्तार कर लिया।
पहले भी जेल से भाग चुका है एक कैदी
पुलिस के अनुसार देवा भुईयाँ पूर्व में भी धनबाद जेल से फरार हो चुका है। वर्ष 2021 में वह अपने एक साथी के साथ जेल की खिड़की काटकर भाग गया था। तीनों कैदियों का आपराधिक इतिहास लंबा है और अधिकतर मामलों में पोक्सो, लूट, हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।
जेल सुरक्षा में हुई चूक की भी हो रही जांच
एसपी ने बताया कि राज्य की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली जेल से फरारी की घटना को चुनौती के रूप में लेते हुए त्वरित और प्रभावी कार्रवाई की गई। पुलिस का कहना है कि जिले में अपराध नियंत्रण और अपराधियों की शीघ्र गिरफ्तारी के लिए लगातार सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। इसी का नतीजा है कि इस मामले में भी कुछ ही दिनों के भीतर फरार कैदियों को दूसरे राज्य से पकड़ लिया गया। पुलिस आगे की कानूनी प्रक्रिया में जुटी हुई है और जेल सुरक्षा में हुई चूक की भी जांच की जा रही है।
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