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    Home»जोहार ब्रेकिंग»राजस्थान कांग्रेस में पायलट गुट पर सस्पेंस, सरप्राइज, विरोधोभासी रणनीति
    जोहार ब्रेकिंग

    राजस्थान कांग्रेस में पायलट गुट पर सस्पेंस, सरप्राइज, विरोधोभासी रणनीति

    Team JoharBy Team JoharJuly 29, 2020Updated:July 29, 2020No Comments3 Mins Read0
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    Joharlive Desk

    जयपुर । मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के नेतृत्व में दो खेमों में बंटने के बाद राजस्थान कांग्रेस की कहानी सस्पेंस, सरप्राइज और विरोधाभासी रणनीति के तत्वों के साथ और ज्यादा जटिल होती जा रही है। एआईसीसी के नेता जहां पायलट पर चुप्पी साधते नजर आते हैं, वहीं राजस्थान के मुख्यमंत्री पायलट पर निशाना साधने के दौरान मुखर रहे हैं।

    राजस्थान कांग्रेस प्रभारी अविनाश पांडे ने एक संवाददाता सम्मलेन में खुले तौर पर घोषणा की कि पायलट सहित 19 बागी कांग्रेस विधायक पार्टी हाईकमान से माफी मांगने के बाद अपने ‘परिवार’ में लौट सकते हैं।

    हालांकि, कुछ दिन पहले गहलोत ने पायलट को ‘निकम्मा’ और ‘नकारा’ कहा था।

    अब, पार्टी कार्यकर्ता उलझन में हैं कि कौन सही दिशा में आगे बढ़ रहा है : एआईसीसी या गहलोत की अगुवाई में राजस्थान कांग्रेस नेतृत्व।

    वास्तव में, गहलोत भी अपनी रणनीति बदलते मालूम पड़ रहे हैं और पायलट पर चुप रहना पसंद करते हुए राज्यपाल के खिलाफ खुलकर बोल रहे हैं।

    कांग्रेस के गलियारों में ऐसी खुसफुसाहट है कि मुख्यमंत्री भी अपनी एआईसीसी टीम के सदस्यों का अनुकरण करते हुए अपनी रणनीति बदल चुके हैं और इसलिए विरोध के किसी भी तस्वीर में पायलट को नहीं ला रहे हैं, जबकि कुछ दिनों पहले राज्य में पायलट लगातार उनके रडार पर थे।

    इस रणनीति ने पार्टी के नेताओं को भ्रमित, चकित और उनके रुख पर अधिक विभाजित कर दिया है।

    उनका आम सवाल यही है कि गहलोत, सचिन पायलट के खिलाफ जहर उगल रहे थे, लेकिन एआईसीसी से कोई और ऐसा नहीं कर रहा था और अब वह चुप क्यों हो गए हैं।

    पीसीसी के एक पूर्व कार्यकर्ता ने कहा, “हम पार्टी के रुख पर अनभिज्ञ हैं, एक तरफ जहां वे उन्हें अयोग्यता नोटिस देते हैं, वहीं दूसरी ओर, एआईसीसी के सदस्य 19 सदस्यों से घर लौटने का आह्वान करते हैं। यह एक बहुत ही भ्रामक स्थिति प्रतीत होती है।”

    पार्टी के एक अन्य नेता ने एआईसीसी पार्टी के नेताओं की चुप्पी पर सवाल उठाया और कहा, “वे इस मुद्दे पर चुप क्यों हैं। यह समझ से परे है कि केवल हमारे माननीय मुख्यमंत्री हमारे पूर्व उपमुख्यमंत्री के खिलाफ नफरत भरे बयान क्यों दे रहे थे।”

    वहीं, पायलट ने भी पार्टी से अपने जुड़ाव को लेकर सस्पेंस जारी रखने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

    सोमवार को, उन्होंने सोशल मीडिया पर तीन पोस्ट जारी किए, जिसमें कांग्रेस के ‘हाथ’ का प्रतीक चिन्ह था।

    इसके अलावा, जब पार्टी के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने सोमवार को कहा कि पायलट खेमे के कुछ विधायक गहलोत खेमे के संपर्क में हैं और जल्द ही इसमें शामिल होंगे, तो पायलट खेमे के एक अन्य विधायक हेमाराम चौधरी ने एक वीडियो जारी किया और कहा कि गहलोत खेमे के कई विधायक रिसॉर्ट में ‘कैम्पिंग’ से मुक्त होने के बाद पायलट खेमे में आ जाएंगे।

    इसलिए इस सभी सस्पेंस, सरप्राइज और चौंकाने वाले तत्वों के बीच, सवाल उठाए जा रहे हैं कि आने वाले महीनों में कौन मजबूत होगा।

    पीसीसी की पूर्व उपाध्यक्ष अर्चना शर्मा ने आईएएनएस से कहा, “हम इस समय हमारे नेता अशोक गहलोत के साथ खड़े हैं, जो राष्ट्र में लोकतंत्र को बचाने निकले हैं।”

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