Close Menu
Johar LIVE
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Johar LIVEJohar LIVE
    • होम
    • जेपीएससी / जेएसएससी
    • क्राइम
    • राजनीति
    • बिजनेस
    • झारखंड
    • आदिवासी
    • बिहार
    • स्वास्थ्य
    • पर्यावरण
    • स्पेशल स्टोरी
    • खेल-सिनेमा
    • होम
    • जेपीएससी / जेएसएससी
    • क्राइम
    • राजनीति
    • बिजनेस
    • झारखंड
    • आदिवासी
    • बिहार
    • स्वास्थ्य
    • पर्यावरण
    • स्पेशल स्टोरी
    • खेल-सिनेमा
    Johar LIVE
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Home»धर्म/ज्योतिष»हज़ार दोषों के मुक्ति का मार्ग : ऋषि पंचमी
    धर्म/ज्योतिष

    हज़ार दोषों के मुक्ति का मार्ग : ऋषि पंचमी

    Team JoharBy Team JoharSeptember 3, 2019No Comments4 Mins Read0
    Share Facebook Twitter Telegram WhatsApp Email Copy Link
    Share
    Facebook Twitter Telegram WhatsApp Email Copy Link

    JoharLive Special

    ऋषि पञ्चमी का व्रत भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की पंचमी को सम्पादित होता है। यह पावन व्रत 3 सिटेम्बर यानी आज है। यह सभी वर्णों के पुरुषों और नारियों द्वारा किया जाता है। ब्रह्माण्ड पुराण में इसका विवरण किया है। व्यक्ति को नदी आदि में स्नान करने तथा आह्लिक कृत्य करने के उपरान्त अग्निहोत्रशाला में जाना चाहिए, सातों ऋषियों की प्रतिमाओं को पंचामृत में नहलाना चाहिए, उन पर चन्दन लेप, कपूर लगाना चाहिए, पुष्पों, सुगन्धित पदार्थों, धूप, दीप, श्वेत वस्त्रों, यज्ञोपवीतों, अधिक मात्रा में नैवेद्य से पूजा करनी चाहिए और मन्त्रों के साथ अर्ध्य चढ़ाना चाहिए।

    यह व्रत कैसे करें :

    • नदी या किसी पवित्र जल में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें।
    • तत्पश्चात घर में ही किसी पवित्र स्थान पर पृथ्वी को शुद्ध करके हल्दी से चौकोर मंडल (चौक पूरें) बनाएं। फिर उस पर सप्त ऋषियों की स्थापना करें।
    • इसके बाद गंध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य आदि से सप्तर्षियों का पूजन करें।

    तत्पश्चात निम्न मंत्र से अर्घ्य दें-

    ‘कश्यपोऽत्रिर्भरद्वाजो विश्वामित्रोऽथ गौतमः।
    जमदग्निर्वसिष्ठश्च सप्तैते ऋषयः स्मृताः॥
    दहन्तु पापं मे सर्वं गृह्नणन्त्वर्घ्यं नमो नमः॥

    • अब व्रत कथा सुनकर आरती कर प्रसाद वितरित करें।
    • तदुपरांत अकृष्ट (बिना बोई हुई) पृथ्वी में पैदा हुए शाकादि का आहार लें।
    • इस प्रकार सात वर्ष तक व्रत करके आठवें वर्ष में सप्त ऋषियों की सोने की सात मूर्तियां बनवाएं।
    • तत्पश्चात कलश स्थापन करके यथाविधि पूजन करें।
    • अंत में सात गोदान तथा सात युग्मक-ब्राह्मण को भोजन करा कर उनका विसर्जन करें।

    ऋषि पंचमी की व्रतकथा

    विदर्भ देश में उत्तंक नामक एक सदाचारी ब्राह्मण रहता था। उसकी पत्नी बड़ी पतिव्रता थी, जिसका नाम सुशीला था। उस ब्राह्मण के एक पुत्र तथा एक पुत्री दो संतान थी। विवाह योग्य होने पर उसने समान कुलशील वर के साथ कन्या का विवाह कर दिया। दैवयोग से कुछ दिनों बाद वह विधवा हो गई। दुखी ब्राह्मण दम्पति कन्या सहित गंगा तट पर कुटिया बनाकर रहने लगे।

    एक दिन ब्राह्मण कन्या सो रही थी कि उसका शरीर कीड़ों से भर गया। कन्या ने सारी बात मां से कही। मां ने पति से सब कहते हुए पूछा- प्राणनाथ! मेरी साध्वी कन्या की यह गति होने का क्या कारण है?

    उत्तंक ने समाधि द्वारा इस घटना का पता लगाकर बताया- पूर्व जन्म में भी यह कन्या ब्राह्मणी थी। इसने रजस्वला होते ही बर्तन छू दिए थे। इस जन्म में भी इसने लोगों की देखा-देखी ऋषि पंचमी का व्रत नहीं किया। इसलिए इसके शरीर में कीड़े पड़े हैं।

    धर्म-शास्त्रों की मान्यता है कि रजस्वला स्त्री पहले दिन चाण्डालिनी, दूसरे दिन ब्रह्मघातिनी तथा तीसरे दिन धोबिन के समान अपवित्र होती है। वह चौथे दिन स्नान करके शुद्ध होती है। यदि यह शुद्ध मन से अब भी ऋषि पंचमी का व्रत करें तो इसके सारे दुख दूर हो जाएंगे और अगले जन्म में अटल सौभाग्य प्राप्त करेगी।

    पिता की आज्ञा से पुत्री ने विधिपूर्वक ऋषि पंचमी का व्रत एवं पूजन किया। व्रत के प्रभाव से वह सारे दुखों से मुक्त हो गई। अगले जन्म में उसे अटल सौभाग्य सहित अक्षय सुखों का भोग मिला।

    शास्त्रों के अनुसार ऋषि पंचमी पर हल से जोते अनाज आदि का सेवन निषिद्घ है। ऋषि पंचमी के अवसर पर महिलाएं व कुंआरी युवतियां सप्तऋषि को प्रसन्न करने के लिए इस पूर्ण फलदायी व्रत को रखेंगी।

    कहा जाता है कि पटिए पर सात ऋषि बनाकर दूध, दही, घी, शहद व जल से उनका अभिषेक किया जाता है, साथ ही रोली, चावल, धूप, दीप आदि से उनका पूजन करके, तत्पश्चात कथा सुनने के बाद घी से होम किया जाएगा।

    जो महिलाएं ऋषि पंचमी का व्रत रखेंगी, वे सुबह-शाम दो समय फलाहार कर ही व्रत को पूर्ण करेंगी। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस व्रत में हल से जुता हुआ कुछ भी नहीं खाते हैं। इस बात को ध्यान में रखकर ही व्रत किया जाएगा। वे केवल फल, मेवा व समां की खीर, मोरधान से बने व्यंजनों को खाकर व्रत करें।

    #Online news Latest news Rishi Panchami
    Follow on Facebook Follow on X (Twitter) Follow on Instagram Follow on YouTube Follow on WhatsApp Follow on Telegram
    Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Telegram WhatsApp Email Copy Link
    Previous Articleआज 03 सितंबर का राशिफल : क्या कहते हैं आपके सितारे, जानिए
    Next Article ओएनजीसी प्लांट में लगी आग, पांच मजदूरों की मौत

    Related Posts

    जोहार ब्रेकिंग

    ‘प्रधानमंत्री होने से जानकारी जनहित की नहीं हो जाती’, PM मोदी की डिग्री पर गुजरात हाईकोर्ट की दो टूक

    September 30, 2026
    जोहार ब्रेकिंग

    जमशेदपुर गोलीकांड: बाबूलाल मरांडी का हेमंत सोरेन सरकार पर हमला, कानून-व्यवस्था और पुलिस नियुक्तियों पर उठाए गंभीर सवाल

    September 27, 2026
    खेल-सिनेमा

    एशियन गेम्स मैराथनः कौन है वो सेना का जवान, जिसने 44 साल बाद दिलाया भारत को पदक

    September 26, 2026
    झारखंड

    श्राद्ध पक्ष 2026: जानिए क्यों जरूरी है गौसेवा और पितृ यज्ञ, दुनिया भर में कैसे होती है पूर्वजों की पूजा?

    September 26, 2026
    झारखंड

    झारखंड : बड़कागांव में 80 टीबी मरीजों को पोषण किट, इलाज के साथ खान-पान पर भी जोर

    September 25, 2026
    जोहार ब्रेकिंग

    मॉर्निंग वॉक के समय दिल्ली पुलिस ने उठाया था, अब वो पूर्व ब्यूरोक्रैट मांग रहे हैं चीफ जस्टिस सूर्यकांत का इस्तीफा

    September 24, 2026
    Latest Posts

    पटना MLC चुनाव : अनुज सिंह के समर्थन में उतरे अनंत सिंह, बोले- ‘500 परसेंट जीत तय’

    October 1, 2026

    एनआईए को बड़ी सफलता: UAE से डिपोर्ट किया गया वीएचपी नेता विकास प्रभाकर हत्याकांड का आरोपी हरविंदर कुमार गिरफ्तार

    October 1, 2026

    ईडी के अधिकारियों पर एससी-एसटी केस में झारखंड हाईकोर्ट ने लगाया 10 हजार का जुर्माना, जवाब दाखिल करने में देरी पर नाराजगी

    October 1, 2026

    रामगढ़ जमीन मुआवजा मामला : 8 साल पुराने केस में तत्कालीन अमीन और प्रधान सहायक गिरफ्तार

    October 1, 2026

    मोदी से लेकर ट्रंप ने जिसे बताया हीरो, कौन है वो कैप्टन स्मित मच्छार

    October 1, 2026
    Facebook X (Twitter) Instagram
    © 2026 Johar LIVE. | About Us | AdSense Policy | Privacy Policy | Terms and Conditions | Contact Us.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.