Pakur : जिले में अब गांवों को बिजली के मामले में आत्मनिर्भर बनाने की बड़ी पहल शुरू हो गई है। उपायुक्त मनीष कुमार की अध्यक्षता में जिला योजना कार्यकारिणी समिति की बैठक में मॉडल सोलर विलेज योजना को लेकर अहम फैसले लिए गए। इस योजना के तहत 10 गांवों को चुना गया है, जहां सोलर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए 6 महीने की प्रतियोगिता कराई जाएगी।
10 गांवों के बीच 6 महीने की खास प्रतियोगिता
बैठक में बताया गया कि चयनित 10 गांवों के बीच एक प्रतियोगिता होगी, जिसकी अवधि 6 महीने तय की गई है। इस दौरान जिस गांव में सबसे ज्यादा सोलर इंस्टॉलेशन होगा, उसे “मॉडल सोलर विलेज” घोषित किया जाएगा। जीतने वाले गांव को ₹1 करोड़ की राशि दी जाएगी, जिससे वहां सोलर आधारित विकास को और मजबूत किया जा सके।
हर घर तक पहुंचेगी सोलर ऊर्जा
उपायुक्त ने कहा कि इस योजना का मकसद सिर्फ बिजली देना नहीं, बल्कि गांवों को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है। इसके तहत सोलर पंप, सोलर स्ट्रीट लाइट, सोलर हाई मास्ट लाइट और रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने पर जोर दिया जाएगा। लक्ष्य यह है कि चयनित गांवों में 24 घंटे बिजली की सुविधा सुनिश्चित हो और लोग नवीकरणीय ऊर्जा की ओर तेजी से बढ़ें।
पर्यावरण और विकास दोनों पर फोकस
डीसी मनीष कुमार ने साफ कहा कि यह योजना सिर्फ बिजली तक सीमित नहीं है। इससे पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
सोलर ऊर्जा के इस्तेमाल से प्रदूषण कम होगा और गांवों में साफ-सुथरा वातावरण बनेगा।
अधिकारियों को दिए गए सख्त निर्देश
बैठक में उपायुक्त ने सभी विभागों को आपसी तालमेल के साथ काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि योजना को सफल बनाने के लिए हर स्तर पर गंभीरता दिखानी होगी और तय समयसीमा के भीतर काम पूरा करना होगा।
गांवों के लिए बड़ा मौका
इस योजना को गांवों के लिए एक बड़े अवसर के तौर पर देखा जा रहा है। जहां एक ओर गांवों को बिजली की बेहतर सुविधा मिलेगी, वहीं दूसरी ओर ₹1 करोड़ की प्रोत्साहन राशि से उनका समग्र विकास भी संभव होगा।
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