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    जोहार ब्रेकिंग

    ‘घर लौटना है तो 1.2 लाख दो’: ओमान में फंसी सिमडेगा की युवती की दर्दभरी कहानी

    Muskan ChoudharyBy Muskan ChoudharyJune 26, 2026No Comments3 Mins Read
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    मुस्कान चौधरी

    झारखंड के सिमडेगा जिले की 22 वर्षीय आदिवासी युवती प्रीति कुजूर के लिए विदेश में नौकरी करने का सपना अब मुश्किलों में बदल गया है। प्रीति का आरोप है कि उन्हें दुबई में घरेलू कामगार की नौकरी का भरोसा देकर ओमान भेज दिया गया, जहां वह अब घर लौटने के लिए संघर्ष कर रही हैं। प्रीति ने बताया कि इस साल की शुरुआत में एजेंटों ने उन्हें और सिमडेगा की दो अन्य महिलाओं को दुबई में नौकरी दिलाने का वादा किया था। हालांकि दिल्ली से रवाना होने से ठीक पहले उन्हें बताया गया कि उन्हें दुबई नहीं बल्कि ओमान जाना होगा। जब महिलाओं ने इसका विरोध किया तो एजेंटों ने भरोसा दिलाया कि कुछ महीनों बाद उन्हें दुबई भेज दिया जाएगा।

    सिमडेगा की ही रेखा केरकेट्टा ने भी बताया कि तीनों महिलाएं सिर्फ दुबई जाने के लिए तैयार हुई थीं। उन्होंने कहा कि एजेंटों ने पहले से खर्च होने का हवाला देकर उन पर ओमान जाने का दबाव बनाया। रेखा के मुताबिक, यह पूरा मामला एक जाल की तरह था, जिसमें वे फंस गईं।

    ओमान पहुंचते ही फोन और पासपोर्ट छीने, लौटने पर मांगे पैसे

    प्रीति का आरोप है कि ओमान पहुंचने के बाद स्थानीय एजेंटों ने एयरपोर्ट पर ही उनके फोन अपने कब्जे में ले लिए और उन्हें कई दिनों तक एक कमरे में रखा गया। उन्होंने बताया कि उन्हें बाहर जाने की अनुमति नहीं थी और रोजाना उन्हें एक कार्यालय में ले जाया जाता था, जहां नियोक्ता आकर कामगारों का चयन करते थे। प्रीति ने कहा कि उन्हें घरेलू कामगार के तौर पर नौकरी देने की बात कही गई थी, लेकिन उनसे अपेक्षा से अधिक काम कराया जा रहा है। जब उन्होंने भारत लौटने की इच्छा जताई तो उनसे करीब 1.2 लाख रुपये जमा करने के लिए कहा गया।

    वहीं, रेखा केरकेट्टा ने बताया कि उन्होंने कुछ दिनों बाद वापस लौटने का फैसला किया था, लेकिन उन्हें भी लगभग एक लाख रुपये देने को कहा गया। परिवार की मदद से पैसे जुटाने और वापसी का टिकट खरीदने के बाद वह करीब 1.4 लाख रुपये खर्च कर भारत लौट सकीं। फिलहाल वह मुंबई में काम कर रही हैं।

    मदद की गुहार, दूतावास और सरकार ने शुरू की पहल

    यह मामला तब सामने आया जब आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता ऑगस्टिना सोरेन ने इसे अधिकारियों के सामने उठाया और प्रीति की सुरक्षित वापसी की मांग की। इसके बाद झारखंड श्रम विभाग और राज्य प्रवासी श्रमिक सेल सक्रिय हुए। राज्य प्रवासी श्रमिक सेल से जुड़ी शिखा लकड़ा ने बताया कि विभाग ने प्रीति से संपर्क स्थापित कर लिया है और भारतीय दूतावास से सहायता मांगी गई है। दूतावास भी महिला के संपर्क में है और मामले पर लगातार नजर रखी जा रही है।

    प्रीति ने बताया कि वह अकेली नहीं फंसी हैं। उनके साथ केरल की एक महिला भी है, जिसकी तबीयत लगातार खराब हो रही है। उन्होंने कहा कि उन्हें पर्याप्त भोजन नहीं मिल रहा है और दोनों सिर्फ अपने घर लौटना चाहती हैं। इस घटना ने विदेश में नौकरी दिलाने वाले एजेंटों की भूमिका और प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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