Pakur (Mitthu Yadav) : नगर परिषद चुनाव को लेकर इस बार पाकुड़ का माहौल पूरी तरह चुनावी रंग में रंग गया है। गलियों से लेकर चौक-चौराहों तक बस एक ही चर्चा है… कौन बनेगा इस बार शहर का नया चेहरा? मुकाबला इसलिए भी दिलचस्प हो गया है क्योंकि भारतीय जनता पार्टी, झारखंड मुक्ति मोर्चा और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी आमने-सामने हैं। हर कोई जीत के लिए पूरी ताकत झोंक रहा है।
चुनावी दंगल में आमने-सामने बड़े प्रत्याशी
इस बार चुनाव सीधा और साफ नहीं दिख रहा। हर वार्ड में कांटे की टक्कर है। भाजपा समर्थित उम्मीदवार विकास के पुराने काम गिना रहे हैं, तो झामुमो और कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी बदलाव और नई सोच का नारा दे रहे हैं। चाय की दुकानों से लेकर पार्कों तक, हर जगह बस एक ही बहस… “कौन जीतेगा?”
घर-घर दस्तक, हाथ जोड़कर मांग रहे समर्थन
प्रत्याशी सुबह से ही टोली बनाकर निकल पड़ते हैं। कोई बाइक रैली कर रहा है, तो कोई पैदल जनसंपर्क। घर-घर जाकर हाथ जोड़कर कह रहे हैं… “एक मौका दीजिए, इस बार बदलाव दिखेगा।” कई जगहों पर महिलाएं खुलकर सवाल पूछ रही हैं… “पानी कब आएगा? सड़क कब बनेगी?” युवा रोजगार और खेल मैदान की बात कर रहे हैं।
नुक्कड़ सभा और रोड शो से शक्ति प्रदर्शन
शाम होते ही शहर के अलग-अलग इलाकों में नुक्कड़ सभाएं शुरू हो जाती हैं। माइक से विकास के वादे गूंजते हैं। कहीं ढोल-नगाड़ों के साथ रोड शो निकल रहा है तो कहीं समर्थकों की भीड़ ताकत दिखा रही है।
सोशल मीडिया पर भी प्रचार जोरों पर है… वीडियो, पोस्टर और लाइव संबोधन से माहौल गरमाया हुआ है।
ये हैं इस बार के बड़े मुद्दे
मतदाताओं का मूड साफ है। उन्हें सिर्फ भाषण नहीं, काम चाहिए।
इस बार चुनाव में ये मुद्दे छाए हुए हैं :
- टूटी सड़कें और जलजमाव
- नियमित पानी की सप्लाई
- बिजली कटौती
- सफाई व्यवस्था
- युवाओं के लिए रोजगार
लोग साफ कह रहे हैं, “जो काम करेगा, उसी को वोट मिलेगा।”
जनता का मूड क्या कहता है
बाजार में खरीदारी कर रही एक महिला ने कहा, “पिछली बार बहुत वादे हुए थे, अब काम चाहिए।” एक युवक बोला, “नेता लोग चुनाव के समय ही नजर आते हैं, इस बार सोच-समझकर वोट देंगे।” कुल मिलाकर जनता इस बार ज्यादा सजग और सतर्क दिख रही है। लोग उम्मीदवार की छवि, व्यवहार और पिछले काम का हिसाब लगा रहे हैं।
अब इंतजार वोटिंग डे का
चुनावी शोर अपने चरम पर है। हर दल को अपनी जीत का भरोसा है, लेकिन असली फैसला तो जनता के हाथ में है। अब देखना दिलचस्प होगा कि नगर परिषद की कुर्सी पर किसका कब्जा होता है और जनता किस पर अपना भरोसा जताती है।
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