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    Home»जोहार ब्रेकिंग»अब कोई बच्चा नहीं रहेगा उपेक्षित, “सतर्क सिमडेगा” से मिलेगा संरक्षण और सहारा
    जोहार ब्रेकिंग

    अब कोई बच्चा नहीं रहेगा उपेक्षित, “सतर्क सिमडेगा” से मिलेगा संरक्षण और सहारा

    Rudra ThakurBy Rudra ThakurJune 15, 2026No Comments4 Mins Read
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    Simdega : सिमडेगा जिले के बेसहारा, अनाथ, सिंगल पेरेंट्स परिवारों के बच्चों और विशेष परिस्थितियों में जीवन गुजार रहे बच्चों के बेहतर भविष्य को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने एक नई पहल शुरू की है। “सतर्क सिमडेगा” नामक इस अभियान के माध्यम से ऐसे बच्चों की पहचान कर उन्हें सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और विभिन्न सरकारी योजनाओं से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। प्रशासन का मानना है कि यह पहल जिले के जरूरतमंद बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। इस कार्यक्रम का शुभारंभ समाहरणालय सभागार में आयोजित समारोह के दौरान डीसी कंचन सिंह, उप विकास आयुक्त दीपांकर चौधरी, जिला परिषद अध्यक्ष रोस प्रतिमा सोरेंग, जिला परिषद उपाध्यक्ष सोनी पैंकरा, नगर परिषद उपाध्यक्ष दीपक कुमार अग्रवाल और जिला नियोजन पदाधिकारी आशा मैक्सिमा लकड़ा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

    पायलट प्रोजेक्ट के रूप में हुई शुरुआत

    जिला प्रशासन ने बताया कि “सतर्क सिमडेगा” को फिलहाल पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य उन बच्चों तक पहुंचना है जो किसी कारणवश असुरक्षित हैं, सामाजिक रूप से उपेक्षित हैं या जिन्हें विशेष सहायता और संरक्षण की जरूरत है। प्रशासन द्वारा किए गए प्रारंभिक सर्वे में जिले के तीन प्रखंडों और नगर क्षेत्र में ऐसे 54 बच्चों की पहचान की गई है जिन्हें तत्काल सहायता की आवश्यकता है। इनमें बोलबा प्रखंड के 29 बच्चे, सिमडेगा प्रखंड के दो बच्चे, नगर परिषद क्षेत्र के तीन बच्चे तथा पाकरटांड़ क्षेत्र का एक बच्चा शामिल है। प्रशासन अब इन बच्चों की जरूरतों का आकलन कर उन्हें विभिन्न योजनाओं से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू करेगा।

    हर बच्चे के लिए बनेगा सुरक्षा कवच

    डीसी कंचन सिंह ने कहा कि यह सिर्फ बच्चों की पहचान करने का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि उनके लिए एक मजबूत सुरक्षा तंत्र विकसित करने की पहल है। उन्होंने कहा कि प्रशासन की कोशिश है कि जिले का कोई भी बच्चा उपेक्षा, असुरक्षा या संसाधनों की कमी के कारण पीछे न रह जाए।उन्होंने कहा कि जरूरतमंद बच्चों के चारों ओर एक मजबूत “सेफ्टी नेट” तैयार किया जाएगा, जिससे समय रहते उन्हें आवश्यक सहायता और संरक्षण उपलब्ध कराया जा सके। डीसी ने जनप्रतिनिधियों से भी इस अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील की। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों का सीधा संपर्क गांवों और आम लोगों से होता है, इसलिए उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।

    फ्रंटलाइन वर्कर्स निभाएंगे अहम भूमिका

    अभियान को सफल बनाने के लिए आंगनबाड़ी सेविकाओं, आशा कार्यकर्ताओं, एएनएम, जल सहियाओं, शिक्षकों और अन्य फ्रंटलाइन कर्मियों को भी जोड़ा गया है। ये सभी अपने-अपने क्षेत्रों की सामाजिक परिस्थितियों से भली-भांति परिचित होते हैं और जरूरतमंद बच्चों की पहचान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।इनके माध्यम से बच्चों की स्थिति से संबंधित सूचनाएं प्रशासन तक पहुंचाई जाएंगी, ताकि समय पर उचित कदम उठाया जा सके।

    डिजिटल सर्वे से जुटाई जाएगी जानकारी

    जिला प्रशासन ने अभियान के लिए प्रश्नावली आधारित डिजिटल सर्वे तंत्र तैयार किया है। फ्रंटलाइन कार्यकर्ता मोबाइल फोन के माध्यम से गूगल फॉर्म भरकर बच्चों की जानकारी सीधे प्रशासन तक पहुंचाएंगे। इससे वास्तविक समय में आंकड़े उपलब्ध होंगे और जरूरतमंद बच्चों तक सहायता पहुंचाने की प्रक्रिया तेज होगी।

    क्यूआर कोड से भी दे सकेंगे जानकारी

    अभियान को जनभागीदारी से जोड़ने के लिए जिला प्रशासन ने “सतर्क सिमडेगा” नाम से एक विशेष क्यूआर कोड भी जारी किया है। इस क्यूआर कोड को स्कैन कर कोई भी नागरिक जरूरतमंद बच्चों से संबंधित जानकारी प्रशासन तक पहुंचा सकता है। इसके लिए एक सरल ऑनलाइन फॉर्म तैयार किया गया है, जिसके माध्यम से आम नागरिक, जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठन और अन्य इच्छुक लोग बच्चों की जानकारी साझा कर सकेंगे।

    समाज से सहयोग की अपील

    जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि यदि उनके आसपास कोई अनाथ, बेसहारा, सिंगल पेरेंट्स परिवार का बच्चा या विशेष सहायता का पात्र बच्चा है, तो उसकी जानकारी प्रशासन तक जरूर पहुंचाएं। साथ ही समाज के सक्षम लोगों, व्यवसायियों और नौकरीपेशा व्यक्तियों से भी इस सामाजिक अभियान में सहयोग करने का आग्रह किया गया है। उप विकास आयुक्त दीपांकर चौधरी ने कहा कि बच्चों की स्थिति का आकलन कर उन्हें कुपोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ना इस अभियान का प्रमुख उद्देश्य है। इसके लिए समाज के सभी वर्गों के सहयोग की जरूरत होगी।

    कार्यक्रम में दी गई विस्तृत जानकारी

    कार्यक्रम के दौरान जिला समाज कल्याण पदाधिकारी सुरज मुन्नी कुमारी ने “सतर्क सिमडेगा” की कार्यप्रणाली, उद्देश्य और भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तृत प्रस्तुति दी। जिला परिषद अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और नगर परिषद उपाध्यक्ष ने भी इस पहल की सराहना करते हुए प्रशासन को हर संभव सहयोग देने का भरोसा दिलाया। कार्यक्रम में सिविल सर्जन, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी, महिला पर्यवेक्षिकाएं, मुखिया, जनप्रतिनिधि और विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

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    "सतर्क सिमडेगा" से मिलेगा संरक्षण और सहारा No child will remain neglected anymore; "Satark Simdega" will provide protection and support. अब कोई बच्चा नहीं रहेगा उपेक्षित
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