Ranchi : झारखंड में JTET (शिक्षक पात्रता परीक्षा) को लेकर भाषा विवाद अब तूल पकड़ता जा रहा है। राज्य सरकार के फैसले के बाद सियासत तेज हो गई है और बीजेपी ने इसे लेकर सरकार पर सीधा हमला बोला है। दरअसल, JTET के लिए बनाई गई नई नियमावली में भोजपुरी, मगही, मैथिली और अंगिका जैसी भाषाओं को क्षेत्रीय भाषा सूची से बाहर कर दिया गया है। इसके बाद से ही अभ्यर्थियों और राजनीतिक दलों में नाराजगी बढ़ गई है।
बीजेपी ने सरकार पर साधा निशाना
बीजेपी नेताओं का कहना है कि यह फैसला लाखों युवाओं के साथ अन्याय है। उनका आरोप है कि जिन इलाकों में बड़ी संख्या में लोग भोजपुरी और मगही बोलते हैं, वहां इन भाषाओं को बाहर कर देना गलत है। पार्टी नेताओं ने इसे “भेदभावपूर्ण” निर्णय बताते हुए कहा कि इससे छात्रों का भविष्य प्रभावित होगा और उन्हें परीक्षा में नुकसान झेलना पड़ेगा।
अभ्यर्थियों में नाराजगी
पलामू, गढ़वा, लातेहार और संथाल परगना जैसे इलाकों के कई अभ्यर्थियों ने भी इस फैसले का विरोध किया है। उनका कहना है कि अपनी मातृभाषा में परीक्षा देने का मौका छिन जाने से उनकी तैयारी और प्रदर्शन दोनों पर असर पड़ेगा। बीजेपी ने यह भी सवाल उठाया है कि जब सीमावर्ती इलाकों में ओड़िया और बंगाली जैसी भाषाओं को शामिल किया गया है, तो फिर भोजपुरी और मगही को क्यों बाहर रखा गया। इस मुद्दे पर न सिर्फ विपक्ष बल्कि कुछ अन्य नेताओं ने भी चिंता जताई है। माना जा रहा है कि अगर सरकार ने इस फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया, तो यह विवाद और बढ़ सकता है।
Also Read : CBI के शिकंजे में सैकड़ों करोड़ के फ्रॉड का मास्टरमाइंड कमलेश पारेख, UAE से लाया गया भारत


