विजय उराँव
बेहतर रोजगार की आस में झारखंड के युवाओं का विदेश रुख करना पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है, लेकिन हाल ही में वियतनाम में हुई एक दर्दनाक घटना ने इस रास्ते की सुरक्षा पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
जमशेदपुर के विनय यादव और रांची के राजा कुमार वियतनाम के दलात शहर में योग प्रशिक्षक के तौर पर काम कर रहे थे. बीते 25 सितंबर को काम से लौटते समय एक सड़क हादसे में राजा की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि विनय ने दो दिन बाद अस्पताल में दम तोड़ दिया. इस घटना ने झारखंड से विदेशों में रोजी-रोटी कमाने जा रहे युवाओं और उनके परिवारों की चिंताओं को फिर से केंद्र में ला दिया है.
झारखंड से विदेश रोजगार की बढ़ती तस्वीर: आंकड़े क्या कहते हैं?
संसद में पेश किए गए आंकड़े गवाही देते हैं कि झारखंड के युवाओं का विदेश मोह लगातार बढ़ रहा है. विदेश मंत्रालय के अनुसार, ई-माइग्रेट पोर्टल के जरिए 2016 से 2025 के बीच झारखंड से कुल 37,409 इमिग्रेशन क्लीयरेंस जारी किए गए हैं.
कोरोना काल (2020-21) में विदेश जाने वालों की संख्या में भारी गिरावट आई थी, लेकिन इसके बाद रफ्तार फिर तेज हुई और साल 2025 में अकेले 5,819 लोगों को इमिग्रेशन क्लीयरेंस मिला, जो 2016 के मुकाबले करीब 18 फीसदी अधिक है.

झारखंड से बड़ी संख्या में कामगार गल्फ (खाड़ी) देशों का भी रुख करते हैं. आंकड़े बताते हैं कि सिर्फ तीन साल (2019 -2022) की अवधि में गल्फ देशों में झारखंड से जुड़े 69 भारतीय नागरिकों की मौत का रिकॉर्ड भी सामने आया था, जिनमें सऊदी अरब में 34, ओमान में 12, कुवैत में 10, यूएई में 9 और कतर में 4 मौतें शामिल थीं.

इसके अलावा, कोरोना महामारी और वंदे भारत मिशन के दौरान भी झारखंड के हजारों प्रवासी मजदूर (लगभग 5,246 लोग विदेशों से और कुल मिलाकर 5.30 लाख लोग विभिन्न हिस्सों से) अपने गृह राज्य लौटे थे.
वियतनाम हादसा: सिर्फ एक दुर्घटना या बड़े खतरे की चेतावनी?
वियतनाम में हुई विनय और राजा की मौत ने यह साबित कर दिया है कि विदेश में मिलने वाली नौकरी और चमक-धमक के पीछे अनिश्चितता और जोखिम भी कम नहीं हैं. आज झारखंड के युवा बेहतर भविष्य और अच्छी कमाई के लिए वियतनाम, गल्फ देशों और अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों का रुख कर रहे हैं, लेकिन भाषा की बाधा, विदेशी कानूनों की जानकारी की कमी और सुरक्षा मानकों के अभाव में कई बार ऐसे सफर त्रासदियों में बदल जाते हैं.
फिलहाल दोनों पीड़ित परिवारों को अपने बेटों के शवों के भारत लौटने का इंतजार है, जो विदेश में अपनों को खोने के दर्द को और बढ़ा रहा है.
सरकार की नई पहल: विदेश जाने से पहले ट्रेनिंग पर जोर
बढ़ते मामलों और विदेशों में पेश आने वाली चुनौतियों को देखते हुए अब झारखंड सरकार ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोजगार पाने वाले युवाओं के लिए सुरक्षात्मक और शैक्षणिक कदम उठाने शुरू किए हैं. झारखंड स्किल डेवलपमेंट मिशन सोसाइटी ने युवाओं को विदेशी भाषा और वहां के कामकाजी माहौल में ढालने के लिए केंद्र स्थापित करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं.
इसके तहत विदेश रवाना होने से पहले युवाओं को जरूरी जानकारी, कानूनी प्रावधानों और सुरक्षा उपायों से लैस करने के लिए प्री-डिपार्चर ओरिएंटेशन ट्रेनिंग की योजना है. साथ ही, प्लेसमेंट के लिए बाहर जाने वाले उम्मीदवारों को राज्य सरकार के श्रमाधान पोर्टल पर रजिस्टर करने का प्रावधान किया गया है ताकि संकट के समय सरकार के पास उनका पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध रहे.
सुरक्षा के मोर्चे पर क्या उपाय मौजूद हैं?
विदेश मंत्रालय के अनुसार, विदेशों में भारतीय मिशनों के पास प्रवासी कामगारों की सहायता के लिए लेबर विंग, 24 घंटे की हेल्पलाइन, शिकायत पोर्टल और प्रवासी सहायता केंद्र काम कर रहे हैं. आपात स्थिति या दुर्घटना के वक्त ‘भारतीय समुदाय कल्याण कोष’ के जरिए शवों को भारत लाने, कानूनी सहायता और मेडिकल मदद मुहैया कराई जाती है.
लेकिन वियतनाम की यह घटना झारखंड के नीति-निर्माताओं और युवाओं दोनों के लिए एक चेतावनी है कि विदेशों में रोजगार के आंकड़े बढ़ाना ही काफी नहीं है, बल्कि वहां जाने वाले हर एक युवा की सुरक्षा, बीमा और संकट के समय त्वरित मदद की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित करना समय की सबसे बड़ी मांग है.
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