किसलय शानू
इंसानी जीवन के सबसे अनमोल प्रक्रियाओं में जनन प्रक्रिया को सबसे ऊंचा दर्जा प्राप्त है. वह बच्चा ही होता है, जिसके लिए उसके मां बाप कई बार खुद को भी कुर्बान कर देते हैं. यही बच्चा जब जन्मते ही चोरी हो जाए, उस मां-बाप के दुख का अंदाजा शायद ही लगाया जा सके. बस आप सोचिये, कोई गर्भवती महिला अस्पताल में बेड पर पड़ी है. कुछ देर पहले ही उसने एक नया जीवन दिया है. लेकिन होश आने पर जब उसे पता चलता है कि उसका बच्चा चोरी हो गया है. उसका सीना छलनी हो जाता है.
झारखंड सहित देशभर में आए दिन अस्पतालों से बच्चा चोरी की घटनाएं सामने आती रहती है. कभी ममतावश कोई दूसरी मां उस बच्चे को ले जाने का कुत्शित प्रयास करती है, तो कभी इसके लिए पूरा संगठित गिरोह ही काम करता है. जाहिर है, ये गिरोह तभी सफल हो पाता है जब उसे अस्पताल के अन्य कर्मियों का साथ मिलता है. लेकिन झारखंड सहित देशभर में शायद अब ऐसा ना हो. क्योंकि, राज्य के किसी अस्पताल से नवजात शिशु की तस्करी होने पर अब संबंधित अस्पताल का लाइसेंस रद्द हो सकता है.
यह आदेश कोई और नहीं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट ने बीते 2 दिसंबर 2025 को अपने एक फैसले में दिया था. कोर्ट का कहना था कि जब कोई महिला किसी भी अस्पताल में अपने बच्चे को जन्म देती है, तब यह अस्पताल प्रशासन की जिम्मेवारी है कि वह सभी मामले में नवजात शिशु की रक्षा करें. सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश पिंकी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य में पारित अपने फैसले में वर्ष 2025 में दिया था. यह मामला बाल तस्करी से संबंधित था. मिली जानकारी के मुताबिक यह आदेश सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश के लिए है.
सुप्रीम कोर्ट से मामले की जानकारी मिलने के बाद गृह केंद्रीय गृह मंत्रालय के द्वारा झारखंड के मुख्य सचिव और डीजीपी को पत्र लिखा गया है. जिसमें राज्य सरकार को निर्देश दिया गया है कि आप पूरे रिपोर्ट का अध्ययन करें और उचित तौर- तरीको पर काम करके सुप्रीम कोर्ट की ओर से निर्देशित सभी सिफारिशों को लागू करें. क्योंकि पूरे मामले की निगरानी सुप्रीम कोर्ट के स्तर से की जा रही है.
नए डेवलपमेंट के मुताबिक मामले की जानकारी मिलने के बाद डीजीपी तदाशा मिश्रा के निर्देश पर पुलिस मुख्यालय आईजी प्रोविजन द्वारा सीआईडी एडीजी को पत्राचार किया गया है और उन्हें मामले में सुप्रीम कोर्ट की प्रति और गृह मंत्रालय से संबंधित निर्देश को उपलब्ध करा दिया गया है.
जिसके बाद सीआईडी ने राज्य के सभी 24 जिलों के एसपी को पत्राचार किया और मामले की जानकारी मांगी है. यह जानकारी इसलिए मांगी गई है कि ताकि मामले में गृह मंत्रालय को रिपोर्ट भेजकर पूरे मामले से अवगत कराया जा सकें.
ध्यान रहे, मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कहा कि झारखंड, पटना, तेलंगाना, बॉम्बे, छत्तीसगढ़, जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख तथा मध्य प्रदेश उच्च न्यायालयों ने अब तक आवश्यक रिपोर्ट या आंकड़े उपलब्ध नहीं कराए हैं. जिन उच्च न्यायालयों ने रिपोर्ट भेजी है, उन्हें भी केवल सर्कुलर जारी करने के बजाय विस्तृत जानकारी देनी होगी.
राज्यभर में कब-कब हुई है अस्पताल से बच्चा की चोरी
14 जून 2025 : गुमला के सदर अस्पताल में एसएनसीयू अस्पताल में भर्ती 14 दिन की एक बच्ची की चोरी कर ली गई थी. इस घटना की जानकारी के बाद सदर अस्पताल प्रबंधक के होश उड़ गए थे. तत्काल घटना की सूचना पुलिस के साथ-साथ वरीय पदाधिकारी को दी गई थी.
28 दिसंबर 2025 : धनबाद के शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (SNMMCH) से नवजात बच्चे की चोरी का मामला सामने आया था. टुंडी निवासी आदिवासी दंपती का बच्चा वार्ड से गायब हो गया था. सीसीटीवी में एक महिला नर्स के भेष में नवजात को ले जाते हुए दिखी थी.
29 अक्टूबर 2024 : रामगढ़ के एक दंपती का 6 दिन का नवजात रिम्स से चोरी हो गया था. एक महिला ने मां का विश्वास जीतकर और पर्चा कटाने में मदद के बहाने बच्चे को चुरा लिया था. जिसके बाद पीड़ित माँ ने बरियातू थाना में मामला दर्ज कराया था.
14 फरवरी 2025 : पिठोरिया की रहने वाली महिला ने 14 फरवरी 2025 को सदर अस्पताल के लेबर रूम में एक बच्ची को जन्म दिया था. लेबर रूम के बाहर से अज्ञात लोगों के द्वारा 5 दिन के बाद चुरा लिया गया था. मात्र 5 दिन के नवजात के चोरी होने के बाद बच्चों के माता-पिता दहशत का माहौल था.
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