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    Home»क्राइम»झारखंड : तीन साल से कोई नया केस नहीं, फिर भी रांची से किया गया था जिला बदर, हाईकोर्ट ने आदेश किया रद्द
    क्राइम

    झारखंड : तीन साल से कोई नया केस नहीं, फिर भी रांची से किया गया था जिला बदर, हाईकोर्ट ने आदेश किया रद्द

    स्टेशन डायरी की प्रविष्टियों के आधार पर किसी को आदतन अपराधी नहीं माना जा सकता, झारखंड हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी
    joharlive NetworkBy joharlive NetworkOctober 13, 2026Updated:October 13, 2026No Comments4 Mins Read1
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    जोहार लाइव ब्यूरो

    रांची : झारखंड हाईकोर्ट ने रांची के डब्लू कुजूर उर्फ डब्लू कुजूर को जिला बदर करने के आदेश को रद्द कर दिया है. न्यायमूर्ति रोंगोन मुखोपाध्याय की अदालत ने मंगलवार, 13 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान कहा कि याचिकाकर्ता के खिलाफ वर्ष 2023 के बाद कोई नियमित आपराधिक मामला दर्ज नहीं हुआ. इसके बावजूद वर्ष 2026 की कुछ स्टेशन डायरी प्रविष्टियों के आधार पर उसे आदतन अपराधी मानते हुए रांची जिले से बाहर रहने का आदेश दिया गया था. अदालत ने इस आदेश को उचित कारणों पर आधारित नहीं पाया और इसे निरस्त कर दिया.

    मामले में रांची के उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी ने 8 जुलाई 2026 को सीसीए केस संख्या 145/2024 में आदेश जारी किया था. इसके तहत डब्लू कुजूर को 10 जुलाई से 13 दिसंबर 2026 तक रांची जिले से बाहर रहने का निर्देश दिया गया था. यह कार्रवाई झारखंड अपराध नियंत्रण अधिनियम, 2002 की धारा 3 के तहत की गई थी. याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इस आदेश को चुनौती दी थी.

    तीन साल से कोई नया नियमित केस नहीं

    याचिकाकर्ता के अधिवक्ता डीके चक्रवर्ती ने अदालत में दलील दी कि डब्लू कुजूर को झारखंड अपराध नियंत्रण अधिनियम की धारा 2(डी) के तहत असामाजिक तत्व नहीं माना जा सकता. उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता के खिलाफ अंतिम नियमित आपराधिक मामला वर्ष 2023 में दर्ज हुआ था. इसके बाद करीब तीन साल तक कोई नया नियमित मामला दर्ज नहीं हुआ. इसके बावजूद कुछ स्टेशन डायरी प्रविष्टियों को आधार बनाकर उसे जिला बदर कर दिया गया.

    वहीं, राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता के सहायक अधिवक्ता ने आदेश का बचाव करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता के खिलाफ कई मामले दर्ज हैं और वह आदतन अपराधी है. इसलिए उसके खिलाफ की गई कार्रवाई में कोई त्रुटि नहीं है.

    पांच पुराने मामलों का दिया गया था हवाला

    अदालत के समक्ष रखे गए तथ्यों के अनुसार, जिला बदर करने के आदेश में याचिकाकर्ता के खिलाफ पांच आपराधिक मामलों का उल्लेख किया गया था. इनमें कोतवाली (पंडरा ओपी) थाना कांड संख्या 130/2011, पंडरा ओपी थाना कांड संख्या 375/2021, सुखदेवनगर थाना कांड संख्या 238/2022, 269/2023 और 283/2023 शामिल हैं. याचिकाकर्ता के अधिवक्ता के अनुसार, इन सभी मामलों में वह जमानत पर है.

    इसके अलावा, वर्ष 2026 की कुछ स्टेशन डायरी प्रविष्टियों को भी जिला बदर करने के आदेश का आधार बनाया गया था. रांची के वरीय पुलिस अधीक्षक ने 16 फरवरी 2026 को पत्र जारी कर याचिकाकर्ता के खिलाफ अपराध नियंत्रण अधिनियम के तहत कार्रवाई की अनुशंसा की थी. इसके बाद जिला दंडाधिकारी ने जिला बदर का आदेश पारित किया.

    आदतन अपराधी मानने के लिए लगातार अपराध जरूरी

    हाईकोर्ट ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के फैसले विजय नारायण सिंह बनाम बिहार राज्य का उल्लेख किया. इस फैसले के अनुसार, किसी व्यक्ति को आदतन अपराधी मानने के लिए केवल अलग-अलग समय पर दर्ज मामलों का होना पर्याप्त नहीं है. अपराधों की प्रकृति और उनके बीच समय के अंतर को भी देखना जरूरी है.

    अदालत ने स्पष्ट किया कि आदतन अपराध का अर्थ बार-बार या लगातार एक जैसी प्रकृति के अपराध करना है. यदि घटनाओं के बीच लंबा अंतराल हो, तो केवल पुराने मामलों के आधार पर किसी व्यक्ति को आदतन अपराधी मानना उचित नहीं होगा.

    हाईकोर्ट ने अपने एक अन्य फैसले, संदीप प्रधान उर्फ संदीप थापा बनाम झारखंड राज्य, का भी संदर्भ दिया. उस मामले में भी पुराने आपराधिक मामलों और बाद की स्टेशन डायरी प्रविष्टियों के आधार पर जिला बदर करने के आदेश पर सवाल उठाए गए थे.

    हाईकोर्ट ने रद्द किया जिला बदर का आदेश

    अदालत ने माना कि डब्लू कुजूर के खिलाफ वर्ष 2023 के बाद कोई नियमित आपराधिक मामला दर्ज नहीं हुआ है. ऐसे में वर्ष 2026 की स्टेशन डायरी प्रविष्टियों के आधार पर उसे आदतन अपराधी मानने और जिला बदर करने के लिए पर्याप्त कारण आदेश में नहीं दिखाए गए.

    अदालत ने यह भी ध्यान दिया कि झारखंड अपराध नियंत्रण अधिनियम की धारा 6 के तहत आयुक्त के समक्ष अपील का वैकल्पिक उपाय उपलब्ध था. हालांकि, जिला बदर की अवधि का बड़ा हिस्सा पूरा हो जाने और आदेश में पर्याप्त कारण नहीं होने को देखते हुए अदालत ने याचिकाकर्ता को अपीलीय मंच पर जाने के लिए बाध्य नहीं किया.

    इसके बाद हाईकोर्ट ने 8 जुलाई 2026 के जिला बदर आदेश को रद्द कर दिया और याचिका स्वीकार कर ली. अदालत के इस फैसले में यह स्पष्ट किया गया कि अपराध नियंत्रण कानून के तहत कार्रवाई करते समय किसी व्यक्ति को आदतन अपराधी मानने के लिए कानूनी मानदंडों और पर्याप्त आधारों का होना जरूरी है.

    Also Read : कर्नाटक : हाईकोर्ट ने 50 प्रतिशत सीमा SC-ST का बढ़ा आरक्षण रद्द, सिद्धारमैया ने भाजपा को घेरा

    जिला बदर झारखंड हाईकोर्ट सुप्रीम कोर्ट
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