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    Home»झारखंड»झारखंड : नशा सिर्फ कानून व्यवस्था की नहीं, परिवार और समाज के भविष्य जुड़ा का गंभीर मुद्दा है – उमाशंकर सिंह
    झारखंड

    झारखंड : नशा सिर्फ कानून व्यवस्था की नहीं, परिवार और समाज के भविष्य जुड़ा का गंभीर मुद्दा है – उमाशंकर सिंह

    joharlive NetworkBy joharlive NetworkOctober 13, 2026No Comments3 Mins Read3
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    रांची: झारखंड में नशे की रोकथाम और नशीले पदार्थों की मांग में कमी लाने के लिए राज्यस्तरीय कार्ययोजना तैयार की गई है. इसे सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार को भेजा जाएगा. मंगलवार को रांची के प्रोजेक्ट भवन स्थित एमडीआई बिल्डिंग में आयोजित राज्यस्तरीय परामर्श कार्यशाला में नशे की रोकथाम, व्यवहार परिवर्तन और सामुदायिक भागीदारी को मजबूत करने पर चर्चा हुई.

    कार्यशाला को संबोधित करते हुए स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग तथा महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग के सचिव उमाशंकर सिंह ने कहा कि नशे की चुनौती केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं है, बल्कि यह युवाओं, परिवारों और समाज के भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा है. उन्होंने कहा कि नशा रोकथाम को पंचायतों, शैक्षणिक संस्थानों, समुदायों और विभिन्न सरकारी विभागों की साझा जिम्मेदारी बनाना होगा.

    उन्होंने कहा कि अभियान की सफलता केवल आयोजित गतिविधियों की संख्या से नहीं, बल्कि इससे मापी जानी चाहिए कि कितने लोगों को नशे से बचाया जा सका और उनके जीवन में कितना सकारात्मक बदलाव आया. उन्होंने नशामुक्ति को केवल जागरूकता कार्यक्रमों तक सीमित रखने के बजाय रोकथाम, व्यवहार परिवर्तन और सामुदायिक नेतृत्व पर आधारित जनआंदोलन बनाने पर जोर दिया.

    परिवार और समुदाय की भूमिका अहम

    सामाजिक कल्याण निदेशक किरण कुमारी पासी ने कहा कि नशे की रोकथाम में परिवार और समुदाय की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है. समय पर सही जानकारी, उचित मार्गदर्शन और सहयोग उपलब्ध कराकर युवाओं को नशे की चपेट में आने से बचाया जा सकता है.

    उन्होंने स्वयं सहायता समूहों, सहिया, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, पंचायत प्रतिनिधियों और युवा संगठनों को नशे की रोकथाम, शुरुआती स्तर पर इसकी पहचान, परामर्श और सामुदायिक जागरूकता के लिए सशक्त बनाने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें समाज, परिवार और समुदाय की सक्रिय भागीदारी जरूरी है.

    परामर्श, उपचार और पुनर्वास को जोड़ने पर जोर

    सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के निर्देशानुसार झारखंड सरकार के महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग ने Reimagining Prevention and Drug Demand Reduction in India विषय पर इस कार्यशाला का आयोजन किया था. इसमें विभिन्न विभागों, विकास सहयोगी संस्थाओं और विशेषज्ञों ने साक्ष्य आधारित तथा समुदाय केंद्रित नशा रोकथाम मॉडल पर चर्चा की.

    कार्यशाला में जिला, प्रखंड और ग्राम स्तर पर समन्वित कार्ययोजना तैयार करने के साथ रोकथाम, परामर्श, उपचार, पुनर्वास और समाज में दोबारा समावेश की प्रक्रिया को एकीकृत रूप से लागू करने की जरूरत बताई गई.

    इसमें पंचायती राज, नगर विकास, गृह विभाग के नारकोटिक्स प्रकोष्ठ, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा, एकीकृत बाल संरक्षण सेवाओं और झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी समेत विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया.

    नशामुक्त हेल्पलाइन नंबर 14446 तथा उपलब्ध परामर्श, उपचार और पुनर्वास सेवाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार पर जोर दिया गया. कार्यशाला के अंत में झारखंड में नशीले पदार्थों की मांग कम करने के लिए तैयार कार्ययोजना को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय को भेजने का निर्णय लिया गया.

    Also Read : कर्नाटक : हाईकोर्ट ने 50 प्रतिशत सीमा SC-ST का बढ़ा आरक्षण रद्द, सिद्धारमैया ने भाजपा को घेरा

    Umashankar Singh उमाशंकर सिंह
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