मानसून की वजह से तीन महीने तक बंद रहने के बाद झारखंड का मशहूर बेतला नेशनल पार्क गुरुवार, 1 अक्टूबर से पर्यटकों के लिए फिर खोल दिया गया है. पार्क खुलने के साथ ही नए पर्यटन सत्र की शुरुआत हो गई और पर्यटकों के लिए ओपन जीप सफारी भी शुरू कर दी गई है. लातेहार जिले का बेतला नेशनल पार्क रांची से करीब 170 किलोमीटर है. सड़क मार्ग से लातेहार होते हुए यहां पहुंचा जा सकता है. नजदीकी रेलवे स्टेशन बरवाडीह और डालटनगंज हैं.
हर साल पार्क को 1 जुलाई से 30 सितंबर तक वन्यजीवों के प्रजनन और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बंद रखा जाता है. अब बारिश का दौर खत्म होने के बाद जंगल पर्यटकों के स्वागत के लिए तैयार है. इस दौरान बेतला का जंगल बारिश के बाद हरियाली से भरा हुआ है, जिससे सफारी का रोमांच और बढ़ गया है.
ओपन जीप में घूम सकेंगे जंगल
इस पर्यटन सीजन में पर्यटकों को ओपन जीप सफारी के जरिए जंगल घूमने का मौका मिलेगा. सफारी के दौरान हाथी, गौर, चीतल, सांभर, नीलगाय और दूसरे वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक माहौल में देखा जा सकता है. बेतला पलामू टाइगर रिजर्व का हिस्सा है, इसलिए यहां बाघ और तेंदुआ भी पाए जाते हैं. हालांकि, जंगल सफारी के दौरान किसी खास वन्यजीव के दिखने की गारंटी नहीं होती.
एक सफारी जीप में अधिकतम 6 वयस्क और 2 बच्चे जा सकते हैं. पर्यटकों को अपने निजी वाहन से जंगल के अंदर जाने की अनुमति नहीं है. निर्धारित सफारी वाहन से ही जंगल भ्रमण करना होगा.
ओपन जीप सफारी के लिए आम तौर पर सुबह और दोपहर के दो स्लॉट रखे जाते हैं. सुबह की सफारी करीब 6 बजे और दोपहर की सफारी करीब 2 बजे से शुरू होती है. एक सफारी लगभग 90 मिनट की होती है. हालांकि, पर्यटकों को बुकिंग से पहले उस दिन की उपलब्धता और समय की जानकारी आधिकारिक पोर्टल पर जांचने की सलाह दी जाती है.
सिर्फ सफारी नहीं, किला और झरने भी आकर्षण
बेतला आने वाले पर्यटक सिर्फ जंगल सफारी तक सीमित नहीं रहेंगे. यहां पलामू के ऐतिहासिक किले, घाघरी फॉल्स और आसपास के प्राकृतिक स्थल भी पर्यटकों को आकर्षित करते हैं. बारिश के बाद झरनों और जंगल की खूबसूरती खास तौर पर देखने लायक होती है.

बेतला नेशनल पार्क का पर्यटन सीजन 1 अक्टूबर से 30 जून तक रहता है. हालांकि, नवंबर से मार्च के बीच मौसम अपेक्षाकृत ठंडा और सुहावना रहता है, इसलिए इस अवधि में बड़ी संख्या में पर्यटकों के पहुंचने की उम्मीद रहती है.
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