New Delhi : केंद्र सरकार ने RBI के पूर्व गवर्नर डॉ. उर्जित पटेल को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) में कार्यकारी निदेशक के पद पर नियुक्त किया है। उनका कार्यकाल तीन वर्षों का होगा। यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब भारत वैश्विक आर्थिक मंचों पर अपनी भूमिका को और अधिक प्रभावशाली बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
डॉ. उर्जित पटेल 2016 में आरबीआई के 24वें गवर्नर बने थे। उन्होंने रघुराम राजन के बाद यह जिम्मेदारी संभाली थी। उनके कार्यकाल में सबसे चर्चित फैसला नोटबंदी का रहा, जो नवंबर 2016 में लागू की गई थी। हालांकि, दिसंबर 2018 में उन्होंने निजी कारणों का हवाला देते हुए पद से इस्तीफा दे दिया। उनका कार्यकाल लगभग दो वर्षों का रहा, जो आरबीआई इतिहास में सबसे कम कार्यकालों में से एक माना जाता है।
The Appointments Committee of the Cabinet has approved the appointment of Dr. Urjit Patel, Economist and Former RBI Governor, to the post of Executive Director (ED) at the International Monetary Fund, for a period of three years with effect from the date of assumption of charge… pic.twitter.com/SDHSsKE3a8
— ANI (@ANI) August 29, 2025
उर्जित पटेल की सिफारिशों पर ही रिजर्व बैंक ने महंगाई दर को 4% के लक्ष्य के आसपास बनाए रखने की नीति अपनाई थी। उन्होंने एक रिपोर्ट में सुझाव दिया था कि मुद्रास्फीति को नियंत्रित रखने के लिए 4 फीसदी की सीमा तय की जाए, जो बाद में आरबीआई की मौद्रिक नीति का हिस्सा बन गया।
गवर्नर बनने से पहले पटेल आरबीआई के डिप्टी गवर्नर रह चुके थे, जहां उन्हें मौद्रिक नीति, आर्थिक नीति अनुसंधान और वित्तीय स्थिरता जैसे अहम विभागों की जिम्मेदारी दी गई थी। केन्या में जन्मे उर्जित पटेल आईएमएफ में पहले भी पांच साल तक काम कर चुके हैं, जिससे उन्हें वैश्विक आर्थिक संरचना की अच्छी समझ है।
शिक्षा की बात करें तो उन्होंने लंदन विश्वविद्यालय से स्नातक, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से एम.फिल और येल यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में पीएचडी की डिग्री प्राप्त की है।
RBI से इस्तीफा देने के बाद उन्हें राष्ट्रीय लोक वित्त एवं नीति संस्थान (NIPFP) का चेयरमैन नियुक्त किया गया था, जहां उन्होंने वित्तीय नीतियों पर काम किया।
उर्जित पटेल की IMF में नियुक्ति को भारत के लिए एक रणनीतिक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि इससे वैश्विक आर्थिक मंचों पर भारत की भागीदारी और प्रभाव को बल मिलेगा।