जोहार लाइव ब्यूरो
धनबाद के IIT-ISM से पेट्रोलियम इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले सुनील कुमार अब देश की प्रमुख तेल एवं गैस कंपनी ONGC की कमान संभालेंगे. केंद्र सरकार की मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने उन्हें कंपनी का नया चेयरमैन नियुक्त करने की मंजूरी दे दी है. फिलहाल ONGC की मेहसाणा परिसंपत्ति में कार्यकारी निदेशक (Executive Director) और परिसंपत्ति प्रबंधक (asset manager) की जिम्मेदारी संभाल रहे सुनील कुमार ने 1991 में इसी कंपनी से अपने करियर की शुरुआत की थी. तीन दशक से अधिक के सफर में हासिल की गई यह उपलब्धि धनबाद के तकनीकी संस्थान IIT-ISM के लिए भी गौरव का विषय है.
सुनील कुमार मौजूदा चेयरमैन अरुण कुमार सिंह की जगह लेंगे. सिंह का विस्तारित कार्यकाल 6 दिसंबर 2026 को समाप्त हो रहा है. नियुक्ति संबंधी आदेश के अनुसार, 58 वर्षीय सुनील कुमार 7 दिसंबर 2026 या उसके बाद पदभार संभालेंगे. वह 31 दिसंबर 2028 को निर्धारित सेवानिवृत्ति की आयु पूरी होने तक इस पद पर रहेंगे. इसके बाद उन्हें संविदा के आधार पर भी नियुक्त किया जाएगा. उनका कुल कार्यकाल तीन वर्ष या अगले आदेश तक, जो भी पहले हो, निर्धारित किया गया है.
IIT-ISM धनबाद से पेट्रोलियम इंजीनियरिंग की पढ़ाई
सुनील कुमार ने धनबाद स्थित तत्कालीन इंडियन स्कूल ऑफ माइंस से पेट्रोलियम इंजीनियरिंग में स्नातक की पढ़ाई की. इसके अलावा उन्होंने CMC लिमिटेड से कंप्यूटर एप्लीकेशन में डिप्लोमा किया. उनके पास मैनेजमेंट डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट (MDI), गुरुग्राम से मार्केटिंग और फाइनेंस में विशेषज्ञता के साथ बिजनेस मैनेजमेंट में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी है.
धनबाद के तकनीकी संस्थान से पढ़ाई कर ONGC में तीन दशक से अधिक का सफर तय करने वाले सुनील कुमार की नियुक्ति IIT-ISM के लिए भी अहम है. उनकी पेशेवर यात्रा तकनीकी शिक्षा, फील्ड में काम के अनुभव और बड़े ऊर्जा प्रोजेक्ट्स के प्रबंधन से होते हुए देश की प्रमुख तेल एवं गैस कंपनी के शीर्ष पद तक पहुंची है.
1991 में असिस्टेंट इंजीनियर के रूप में शुरू किया सफर
सुनील कुमार ने 1991 में ONGC में असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (प्रोडक्शन) के रूप में काम शुरू किया था. असम के शिवसागर-नजीरा क्षेत्र में उन्होंने वर्कओवर ऑपरेशंस के जरिए तेल कुओं के रखरखाव और उत्पादन से जुड़े कामों का अनुभव हासिल किया. इसके बाद मुंबई में वेल सर्विसेज वेस्टर्न ऑफशोर के साथ काम करते हुए उन्होंने मुंबई हाई के समुद्री तेल क्षेत्रों में वेल इंजीनियरिंग और स्लिक लाइन ऑपरेशंस की जिम्मेदारी संभाली.
उनका करियर केवल तकनीकी कामकाज तक सीमित नहीं रहा. मुंबई में वह ONGC के ऑर्गेनाइजेशनल ट्रांसफॉर्मेशन प्रोजेक्ट (OTP) के पायलट प्रोजेक्ट से भी जुड़े. इस परियोजना का उद्देश्य कंपनी के कामकाज को फंक्शन-आधारित व्यवस्था से बदलकर एसेट-आधारित प्रबंधन प्रणाली में ढालना था. वह प्रोजेक्ट ICE की कोर टीम का भी हिस्सा रहे.
डीप-वॉटर परियोजनाओं में निभाई अहम भूमिका
सुनील कुमार के करियर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा समुद्र में तेल एवं गैस उत्पादन से जुड़ी परियोजनाएं रही हैं. उन्होंने भारत के पूर्वी तट पर वशिष्ठ और S1 डीप-वॉटर परियोजना की योजना बनाने और उसे लागू करने में योगदान दिया. मुंबई में अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान उन्होंने एक बड़े शैलो-वॉटर सबसी प्रोजेक्ट की योजना, समन्वय और क्रियान्वयन का नेतृत्व किया. इस परियोजना में 11 सबसी कुओं की ड्रिलिंग, कंप्लीशन और उत्पादन शुरू कराने से जुड़े काम शामिल थे.
इसके बाद काकीनाड़ा में KG-DWN-98/2 क्लस्टर-II डीप-वॉटर परियोजना में उन्होंने प्रोजेक्ट मैनेजर की जिम्मेदारी संभाली. उपलब्ध विवरण के अनुसार, इस परियोजना से प्रतिदिन करीब 35,000 बैरल तेल और 1.4 MMSCMD गैस का उत्पादन हासिल हुआ. यह अनुभव ONGC के उत्पादन और गहरे समुद्र में ऊर्जा संसाधनों के विकास से जुड़े कामकाज में उनकी भूमिका को रेखांकित करता है.
जनवरी 2025 में मेहसाणा एसेट की संभाली जिम्मेदारी
सुनील कुमार ने 8 जनवरी 2025 को ONGC की मेहसाणा एसेट के कार्यकारी निदेशक (ED) और एसेट मैनेजर का पदभार संभाला. इसके बाद 24 जनवरी 2025 से उन्हें ONGC TERI बायोटेक लिमिटेड के निदेशक मंडल में कंपनी के नॉमिनी डायरेक्टर के रूप में नियुक्त किया गया.
मेहसाणा एसेट की जिम्मेदारी संभालने से पहले उनका करियर उत्पादन, वेल सर्विसेज, ऑफशोर ऑपरेशंस और डीप-वॉटर परियोजनाओं जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में फैला रहा. यही तकनीकी और परिचालन अनुभव अब उन्हें कंपनी के शीर्ष नेतृत्व की जिम्मेदारी तक ले आया है.
Also Read : बिहार MLC चुनाव: वोटिंग के बीच नीरज कुमार का विक्ट्री साइन, अनंत सिंह बोले- ये रसगुल्ला वाला इलेक्शन नहीं
