Ranchi : झारखंड में आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास को लेकर पुलिस मुख्यालय सख्त नजर आ रहा है। इसी कड़ी में गुरुवार को पुलिस मुख्यालय स्थित सभागार से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए राज्य के रांची, जमशेदपुर और धनबाद के एसएसपी एवं बाकी जिलों के एसपी के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की गई। बैठक की अध्यक्षता डीजीपी तदाशा मिश्र ने की। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि आत्मसमर्पित नक्सलियों को सरकार की ओर से तय सभी लाभ और सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराई जाएं। इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
स्पीडी ट्रायल का निर्देश
बैठक में यह बात सामने आई कि कई मामलों में अदालतों में लंबित केसों के कारण पुनर्वास प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। इस पर डीजीपी ने सख्त रुख अपनाते हुए सभी जिलों को निर्देश दिया कि ऐसे मामलों में स्पीडी ट्रायल सुनिश्चित कराया जाए, ताकि संबंधित मामलों का जल्द निष्पादन हो सके।
डीजीपी तदाशा मिश्रा ने कहा कि हर जिले में आत्मसमर्पित नक्सलियों की समस्याओं के समाधान के लिए एक नोडल पदाधिकारी नियुक्त किया जाए। यह पदाधिकारी एसआई या उससे ऊपर के स्तर का होगा, जो पुनर्वास से जुड़े मामलों की निगरानी करेगा और समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करेगा।
पुनर्वास योजनाओं का हो व्यापक प्रचार-प्रसार
डीजीपी ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि पुनर्वास योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। इससे न केवल आत्मसमर्पित नक्सलियों को लाभ मिलेगा, बल्कि अन्य सक्रिय नक्सलियों को भी मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरणा मिलेगी। बैठक में एसआईबी के डीआईजी संजीव कुमार, एसपी नाथु सिंह मीणा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। वहीं, सीआईडी के एडीजी मनोज कौशिक और विभिन्न प्रक्षेत्रों के आईजी व डीआईजी भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े रहे।
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