डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 को लेकर देश के प्रमुख डिजिटल समाचार प्रकाशकों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (डीएनपीए) ने अपनी याचिका में कहा है कि कानून में पत्रकारिता के लिए विशेष छूट नहीं होने से जनहित से जुड़े मुद्दों की जांच और रिपोर्टिंग प्रभावित हो सकती है. याचिकाकर्ताओं में मुकेश अंबानी के रिलायंस समूह से जुड़ा नेटवर्क18 और अडानी समूह के स्वामित्व वाला एनडीटीवी समेत 21 प्रमुख डिजिटल समाचार प्रकाशक शामिल हैं.
मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र सरकार और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय से इस मामले में जवाब मांगा. हालांकि, सरकार का पक्ष सुने बिना कानून पर रोक लगाने से इनकार कर दिया गया. मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी.
मीडिया संस्थानों को होती है परेशानी
डीएनपीए ने डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम और इससे जुड़े वर्ष 2025 के नियमों पर सवाल उठाते हुए कहा है कि इनके तहत पत्रकारों और समाचार संस्थानों को किसी व्यक्ति की जानकारी जुटाने, प्रकाशित करने और उसका इस्तेमाल करने में कई बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है. संगठन का कहना है कि यदि खबर प्रकाशित करने से पहले संबंधित व्यक्ति की सहमति लेना जरूरी हुआ, तो सरकारी कामकाज, अपराध, कारोबार और सार्वजनिक हित से जुड़े मामलों की पड़ताल मुश्किल हो सकती है.
याचिका में यह भी चिंता जताई गई है कि कानून के प्रावधानों से पत्रकारों के गोपनीय स्रोतों की पहचान उजागर होने का खतरा बढ़ सकता है. इसका असर खोजी पत्रकारिता, संपादकीय स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आजादी पर पड़ने की आशंका है.
डीएनपीए की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता माधवी दीवान ने कहा कि पत्रकारिता के लिए छूट नहीं होने से समाचार संस्थानों के काम करने का तरीका प्रभावित होगा. उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी व्यक्ति के बारे में खबर प्रकाशित करने से पहले उसकी अनुमति लेनी पड़े, तो जनहित से जुड़ी खबरें कैसे सामने आएंगी. उन्होंने कहा कि गलत या तथ्यहीन रिपोर्टिंग के लिए मीडिया संस्थानों को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है, लेकिन पहले से अनुमति लेने की बाध्यता उचित नहीं है.
संगठन ने सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 8(1)(j) में हुए संशोधन पर भी चिंता जताई. उसके अनुसार, इससे सार्वजनिक प्राधिकरणों के पास मौजूद व्यक्तिगत जानकारी हासिल करने में भी पत्रकारों को परेशानी हो सकती है.
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि नागरिकों की निजता और प्रेस की स्वतंत्रता के बीच संतुलन जरूरी है. उन्होंने मीडिया संस्थानों से डेटा के दुरुपयोग को रोकने के उपाय सुझाने की बात कही.
डीएनपीए में द इंडियन एक्सप्रेस, द हिंदू, इंडिया टुडे, टाइम्स इंटरनेट, जी मीडिया, एबीपी और मलयाला मनोरमा समेत कई प्रमुख मीडिया संस्थान शामिल हैं.

