Ranchi : पश्चिम बंगाल की राजनीति को लेकर झारखंड के नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर विपक्षी दलों पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने उन पार्टियों को जवाब दिया है जो भाजपा की चुनावी सफलता को चुनाव आयोग की “मेहरबानी” बताते हैं। मरांडी ने साफ कहा कि पश्चिम बंगाल में भाजपा की बढ़त किसी चुनाव आयोग या मशीनरी की वजह से नहीं, बल्कि वर्षों के संघर्ष और कार्यकर्ताओं की मेहनत का नतीजा है।
चुनाव आयोग नहीं, हमारे कार्यकर्ताओं के ‘लहू’ से सींचा गया है बंगाल का कमल!
कुछ लोग आज भी इस मुगालते में जी रहे हैं कि बंगाल में भाजपा की सत्ता दिल्ली की मेहरबानी या चुनाव आयोग का ‘गिफ्ट’ है। जिन्हें लगता है कि EVM की मशीनें, केंद्रीय बल या दिल्ली का दखल भाजपा को सत्ता की दहलीज…
— Babulal Marandi (@yourBabulal) May 8, 2026
उनके मुताबिक, जो लोग इसे “गिफ्ट” कहते हैं, वे बंगाल की राजनीतिक जमीनी हकीकत को नहीं समझते। अपने पोस्ट में उन्होंने वामपंथी शासन के 34 साल और तृणमूल कांग्रेस के 15 साल के शासन को “दमन, डर और हिंसा का दौर” बताया। उन्होंने दावा किया कि इस दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं को फर्जी मुकदमों, जेल और सामाजिक बहिष्कार जैसी मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
“कार्यकर्ताओं ने खून-पसीने से सींचा है संगठन”
मरांडी ने कहा कि बंगाल में भाजपा की राजनीतिक यात्रा बेहद कठिन रही है। उन्होंने कहा कि कई जगहों पर कार्यकर्ताओं पर हमले हुए, लेकिन इसके बावजूद उनका मनोबल नहीं टूटा और वे लगातार संगठन को मजबूत करते रहे। उन्होंने 2011 से लेकर 2026 तक भाजपा के चुनावी सफर का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, शुरुआत में बहुत कम सीटों से शुरू करके पार्टी धीरे-धीरे मजबूत होती गई और आखिरकार बड़े स्तर पर सफलता हासिल की।
“यह जीत शहीदों और संघर्ष की देन है”
मरांडी ने कहा कि यह जीत किसी राजनीतिक “मेहरबानी” का नतीजा नहीं है, बल्कि उन कार्यकर्ताओं के बलिदान और संघर्ष का परिणाम है जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी। उन्होंने इसे बंगाल के आत्मसम्मान और जमीनी लड़ाई की जीत बताया।अपने बयान में उन्होंने विपक्षी दलों पर तंज कसते हुए कहा कि जो लोग चुनाव आयोग या EVM पर सवाल उठाते हैं, उन्हें पहले बंगाल के राजनीतिक हालात को समझना चाहिए।
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