Hazaribagh : एसीबी हजारीबाग की टीम ने प्रत्यानुपातिक संपत्ति के एक पुराने मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए आरोपी सरकारी कर्मचारी को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार व्यक्ति की पहचान अरुण कुमार (56 वर्ष) के रूप में हुई है। वह उस समय ग्रामीण विकास विभाग के ग्रामीण कार्य मामले में कार्य प्रमंडल, रामगढ़ में कनीय लेखा लिपिक के पद पर काम कर रहा था। एसीबी के मुताबिक आरोपी पर आरोप है कि उसने अपनी आय से ज्यादा संपत्ति बनाई थी। इसी मामले में उसे गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
2017 में दर्ज हुआ था केस
एसीबी ने बताया कि यह मामला एसीबी थाना कांड संख्या 29/17 से जुड़ा है। इस केस में 10 अगस्त 2017 को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। जांच में यह बात सामने आई थी कि आरोपी अरुण कुमार के पास उसकी ज्ञात आय से ज्यादा संपत्ति है। इसके बाद एसीबी ने जांच पूरी कर पहले ही कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल कर दिया था।
कोर्ट में सुनवाई के दौरान जारी हुआ गिरफ्तारी वारंट
एसीबी अधिकारियों के अनुसार, यह मामला कोर्ट में चल रहा था। इसी दौरान कोर्ट ने आरोपी अरुण कुमार के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया। वारंट निकलने के बाद आरोपी की तलाश शुरू की गई। काफी समय से आरोपी गिरफ्तारी से बच रहा था।
रांची के डिपाटोली इलाके से पकड़ा गया
एसीबी की टीम ने आरोपी की लोकेशन का पता लगाकर उसे रांची के डिपाटोली इलाके से गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी आरोपी के वर्तमान पते से हुई, जो इस प्रकार है फ्लैट नंबर 203, आर.एल. टावर, डिपाटोली, थाना सदर, जिला रांची। एसीबी ने आरोपी को 31 मार्च 2026 को विधिवत गिरफ्तार किया।
न्यायिक हिरासत में भेजा गया
गिरफ्तारी के बाद एसीबी ने आरोपी को कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। एसीबी का कहना है कि मामले में आगे की कार्रवाई कोर्ट की प्रक्रिया के अनुसार जारी रहेगी।
क्या है प्रत्यानुपातिक संपत्ति का मामला
प्रत्यानुपातिक संपत्ति का मतलब यह होता है कि किसी सरकारी कर्मचारी के पास उसकी नौकरी और आय के हिसाब से जितनी संपत्ति होनी चाहिए, उससे कहीं ज्यादा संपत्ति पाई जाए। ऐसे मामलों में एजेंसी यह जांच करती है कि संपत्ति कहां से आई, पैसा किस तरीके से जमा हुआ और क्या इसमें भ्रष्टाचार या गलत तरीके से कमाई शामिल है।
पुराने मामलों में भी एसीबी की कार्रवाई जारी
एसीबी हजारीबाग की इस कार्रवाई को पुराने भ्रष्टाचार मामलों में सख्ती के तौर पर देखा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि लंबित मामलों में भी गिरफ्तारी और जांच की प्रक्रिया लगातार जारी है, ताकि भ्रष्टाचार में शामिल लोगों पर कार्रवाई हो सके।
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