रांची। दीपावली पर पटाखे जलाते समय कोई हादसा हुआ तो इलाज के लिए अस्पतालों में भागदौड़ नहीं करनी पड़ेगी. राजधानी के रिम्स और सदर अस्पताल को अलर्ट मोड में रखा गया है. पटाखों से जलने और झुलसने वाले मरीजों के इलाज के लिए दोनों अस्पतालों में कुल 30 बेड तैयार रखे गए हैं. रिम्स में 20 और सदर अस्पताल में 10 बेड की व्यवस्था की गई है. डॉक्टरों से लेकर नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ तक को 24 घंटे ड्यूटी पर तैनात रखा जाएगा.
राज्य के सरकारी अस्पतालों में रिम्स एकमात्र संस्थान है, जहां बर्न यूनिट की सुविधा उपलब्ध है. यहां 40 से 50 प्रतिशत तक जले मरीजों के इलाज की तैयारी की गई है. रिम्स के सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. पंकज बोदरा ने बताया कि बर्न वार्ड में जरूरी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं. आपात स्थिति में मरीजों को तत्काल इलाज देने के लिए पूरी व्यवस्था की गई है.
पटाखों से झुलसकर रिम्स पहुंचने वाले मरीजों को सबसे पहले ट्रामा सेंटर में प्राथमिक उपचार दिया जाएगा. इसके बाद कैजुअल्टी ऑपरेशन थिएटर में जले हुए हिस्से की ड्रेसिंग होगी. मरीज की स्थिति और जलने की गंभीरता को देखते हुए उसे बर्न वार्ड में भर्ती किया जाएगा.
हालांकि, इलाज की इस तैयारी के बीच विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी चिंता का विषय है. बर्न वार्ड में फिलहाल एक प्लास्टिक सर्जन उपलब्ध हैं, जबकि पिछले कुछ महीनों में तीन प्लास्टिक सर्जन रिम्स छोड़ चुके हैं. गंभीर रूप से जले मरीजों के इलाज में प्लास्टिक सर्जन की भूमिका काफी अहम होती है. ऐसे में मरीजों की संख्या बढ़ने पर विशेषज्ञों की कमी परेशानी खड़ी कर सकती है. अस्पताल प्रबंधन फिलहाल उपलब्ध संसाधनों के भरोसे आपात स्थिति से निपटने की तैयारी में है.
बर्न वार्ड में एंट्री के भी हैं सख्त नियम
बर्न वार्ड में मरीजों को संक्रमण से बचाना इलाज का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है. इसलिए यहां साफ-सफाई और हाइजीन को लेकर सख्त नियम लागू हैं. वार्ड में जूते-चप्पल पहनकर प्रवेश नहीं कर सकते. डॉक्टरों और मरीजों के परिजनों को भी इन नियमों का पालन करना होता है. एक मरीज के साथ केवल एक परिजन को रहने की अनुमति है. गंभीर रूप से झुलसे मरीजों को संक्रमण से बचाने के लिए विशेष तरीके से ढंककर रखा जाता है.
सदर अस्पताल में भी 10 बेड तैयार
रिम्स के साथ सदर अस्पताल ने भी अपनी तैयारी पूरी कर ली है. यहां 10 बेड का बर्न वार्ड तैयार रखा गया है. सिविल सर्जन के अनुसार, दीपावली के दौरान पटाखों से जलने या झुलसने का कोई मामला आता है तो ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर तत्काल इलाज करेंगे. स्वास्थ्यकर्मियों को भी अलर्ट रहने का निर्देश दिया गया है.
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