किसलय शानू
रांची: जेपीएससी परीक्षा घोटाला में सीआइडी जांच के दौरान एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. जांच में यह तथ्य सामने आया है जिन परीक्षार्थियों की पैसा के बल पर सेटिंग पहले थे. लेकिन परीक्षा केंद्र में प्रश्नों का उत्तर नहीं लिखते थे. ऐसे छात्र अधिकांश समय परीक्षा केंद्र में सोने, इधर- उधर देखने या दूसरे काम में समय बर्बाद करते थे. लेकिन जब इनका रिजल्ट आता था, तब ये पास हो जाते थे.
सीआइडी ने अपनी चार्जशीट में एक 35 वर्षीय परीक्षार्थी अरविंद कुमार के कारनामे के बारे न्यायालय को बताया है. जिससे यह भी पता चला है कि कैसे पैसा और सेटिंग के बदौलत कैसे मेरिट वाले छात्रों का भविष्य झारखंड में बर्बाद होता है.
सीआइडी की चार्जशीट के अनुसार 14वीं जेपीएससी परीक्षा के दौरान आरोपी अरविंद का परीक्षा केंद्र साहेबगंज कॉलेज, साहेबगंज था. साहेबगंज कॉलेज से मिली सीटिंग अरेंजमेंट के अनुसार आरोपी अरविंद का रोल नंबर 2601297045, कक्षा संख्या बी-5(पहला तल्ला) में कॉलम नंबर 2की रो नंबर 1 पर बैठा था. परीक्षा के दौरान परीक्षा केंद्र से संबंधित सीसीटीवी फुटेज को जब सीआईडी ने जब जब्त कर इसे देखा तक सीआईडी की पूरी टीम हैरत में पड़ गई.
इसमें देखा गया कि आरोपी अरविंद परीक्षा केंद्र में चेक शर्ट पहने बैठा था. पूरी परीक्षा के दौरान आरोपी अरविंद को बार-बार दाएं-बाएं देखते, कई बार जम्हाई लेते, कई बार सोते और सिर्फ समय बर्बाद करते देखा गया. इसके अलावा कुछ मिनटों में ओएमआर शीट पर आरोपी अरविंद को संबंधी विवरण भरने के अलावा उसे न तो प्रश्न हल करते देखा गया और ना ही ओएमआर में गोला बनाते देखा गया. ऐसा नजारा चार घंटे की पूरी परीक्षा समय के दौरान देखा गया था. इसके बावजूद आरोपी अरविंद को पेपर – 1 में 148 और पेपर – 2 में 144 कुल 292 अंक मिला और पास कर गया.
अरविंद ने किया स्वीकार मैंने नहीं दिया था एक भी प्रश्न का उत्तर
सीआईडी ने चार्जशीट में आरोपी अरविंद के स्वीकारोक्ति बयान के आधार पर न्यायालय को बताया है कि मैंने 14वीं जेपीएससी की परीक्षा के ओएमआर शीट में एक भी प्रश्न का उत्तर नहीं दिया था. मैंने सिर्फ शीट में अपना रोल नंबर और आवश्यक विवरण भरकर पूरे ओएमआर शीट को खाली छोड़ दिया था. मेरी सेटिंग अभय कुमार तिवारी के माध्यम से हुई थी.
अभय तिवारी और आदित्य पांडेय के कहने पर मैंने यह कार्य किया था. सीआईडी को जांच में आरोपी अरविंद कुमार के अभय कुमार तिवारी, आदित्य पांडेय और संजीत कुमार से बातचीत की साक्ष्य भी मिले है. इसकी पुष्टि सीडीआर के विशलेषण से भी हुई है.
सीआईडी के पकड़ने जाने के डर से जला दिया ओएमआर की कार्बन प्रति
अरविंद कुमार ने सीआईडी को पूछताछ में बताया है कि जेपीएससी परीक्षा घोटाले की जांच शुरु होने के बाद मैं काफी डर गया था. मैं चूंकि से टिंग के जरिये पास हुआ था, इस वजह से मुझे इस बात का डर था कि सीआईडी की छापेमारी के दौरान ओएमआर की कार्बन प्रति सीआईडी को मिल जायेगी और मेरी गड़बड़ी सीआईडी के सामने उजागर हो सकती है.
इसकी वजह से मैंने साक्ष्य मिटाने के उद्देशय से ओएमआर की कार्बन प्रति को नष्ट कर दिया था ताकि पूरे मामले में खुद को निर्दोष साबित कर सकूं.


