रांची. घर, सड़क और दूसरी इमारतें बनाने में बालू की जरूरत पड़ती है. लेकिन क्या बिजली प्लांट से निकलने वाली राख का इस्तेमाल भी बालू की जगह किया जा सकता है? इसी सवाल पर आईआईएम रांची में उद्योगों और सरकारी विभागों के अधिकारियों ने चर्चा की. बैठक में पतरातू बिजली प्लांट से निकलने वाली बॉटम ऐश को निर्माण कार्यों में इस्तेमाल करने की संभावनाओं पर विचार किया गया.
आईआईएम रांची में आयोजित इस बैठक में बिजली कंपनियों, निर्माण कंपनियों, सरकारी विभागों, रेडी मिक्स कंक्रीट बनाने वाली कंपनियों और निर्माण सामग्री के कारोबार से जुड़े लोगों ने हिस्सा लिया. चर्चा का मुख्य मुद्दा था कि बॉटम ऐश को बालू की जगह इस्तेमाल करना कितना सही और किफायती होगा. इसके लिए इसकी गुणवत्ता, इस्तेमाल की मात्रा, कीमत और बाजार तक पहुंचाने की व्यवस्था पर भी बात हुई.
बैठक में आईआईएम रांची के प्रो. मनीष बंसल और प्रो. कुशाग्र शरण शामिल हुए. पतरातू विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (पीवीयूएनएल) के सीईओ अशोक कुमार सहगल ऑनलाइन जुड़े. एनटीपीसी, सेल, इंडियन ऑयल, जिडको, केंद्रीय लोक निर्माण विभाग, मेकॉन और एनबीसीसी समेत कई संस्थानों के अधिकारी भी मौजूद रहे.
पतरातू बिजली प्लांट से निकलती है बड़ी मात्रा में राख
पीवीयूएनएल के सीईओ अशोक कुमार सहगल ने बताया कि पतरातू बिजली प्लांट से बड़ी मात्रा में बॉटम ऐश निकलती है. इसका इस्तेमाल निर्माण कार्यों में किया जा सकता है. उन्होंने बताया कि नेशनल काउंसिल फॉर सीमेंट एंड बिल्डिंग मैटेरियल्स (एनसीसीबीएम) में जांच के बाद इस सामग्री को बालू के विकल्प के रूप में इस्तेमाल करने के लिए प्रमाणन मिला है.
उन्होंने कहा कि इस राख का इस्तेमाल बढ़ाने के लिए कंपनियों और निर्माण क्षेत्र से जुड़े लोगों को साथ आना होगा. इसके लिए यह देखना जरूरी है कि सामग्री की कीमत कितनी हो, इसकी आपूर्ति कैसे हो और निर्माण कंपनियों की जरूरतों को कैसे पूरा किया जाए.
इस्तेमाल से पहले गुणवत्ता और लागत की जांच जरूरी
बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि निर्माण कार्यों में बालू की जगह बॉटम ऐश का इस्तेमाल किन परिस्थितियों में किया जा सकता है और कितनी मात्रा में इसे मिलाना उचित होगा. साथ ही, इसकी प्रोसेसिंग, गुणवत्ता और कीमत पर भी चर्चा हुई.
कार्यक्रम की शुरुआत में नितिन सिंह ने प्रतिभागियों का स्वागत किया और बताया कि आईआईएम रांची, पीवीयूएनएल के लिए इस विषय पर एक कंसल्टिंग प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है. इस प्रोजेक्ट के तहत यह समझने की कोशिश की जा रही है कि बॉटम ऐश का इस्तेमाल बढ़ाने के लिए किन व्यावहारिक कदमों की जरूरत है.
बैठक में शामिल लोगों ने अपने सवाल रखे और पीवीयूएनएल के अधिकारियों से जानकारी ली. अब इस दिशा में आगे की कोशिश यह पता लगाने की होगी कि बॉटम ऐश का इस्तेमाल किन निर्माण कार्यों में किया जा सकता है और इसे बाजार तक पहुंचाने की व्यवस्था कैसे बनाई जाए.


