जोहार लाइव ब्यूरो
बच्चों के संरक्षण, पुनर्वास और उनके हितों से जुड़े मामलों में बेहतर निर्णय लेने के लिए झारखंड में बाल कल्याण समिति (CWC) के अध्यक्षों और सदस्यों को प्रशिक्षित किया गया. रांची में आयोजित तीन दिवसीय राज्यस्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में दो बैच के कुल 70 सदस्यों को बच्चों की व्यक्तिगत परिस्थितियों का आकलन कर उनके सर्वोत्तम हित में निर्णय लेने की प्रक्रिया की जानकारी दी गई.
28 अक्टूबर 2026 को होटल रेनड्यू, रांची में संपन्न हुए इस कार्यक्रम का आयोजन झारखंड सरकार के महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग के अंतर्गत झारखंड राज्य बाल संरक्षण सोसाइटी (JSCPS) और UNICEF झारखंड ने संयुक्त रूप से किया. इसमें सेंटर फॉर चाइल्ड राइट्स (CCR), NUSRL, रांची का सहयोग रहा.
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि झारखंड राज्य बाल संरक्षण सोसाइटी के निदेशक विजय कुमार सिन्हा ने बच्चों के बेहतर पुनर्वास और नियमित फॉलोअप के लिए बाल कल्याण समिति, जिला बाल संरक्षण इकाई और अन्य संबंधित संस्थाओं के बीच समन्वय मजबूत करने पर जोर दिया.
उन्होंने दत्तक ग्रहण के बाद बच्चों से संबंधित अभिलेखों और सूचनाओं का उचित अनुवर्तन सुनिश्चित करने की बात कही. साथ ही संबंधित बाल कल्याण समितियों को बच्चों की स्थिति की नियमित जानकारी लेने और जरूरत के अनुसार आगे की कार्रवाई करने का निर्देश दिया.
निदेशक विजय सिन्हा ने प्रायोजन (स्पॉन्सरशिप) कार्यक्रम के तहत सहायता प्राप्त करने वाले प्रत्येक बच्चे का विवरण और विस्तृत प्रगति प्रतिवेदन हर महीने विभाग को सौंपने का निर्देश भी दिया.
बच्चों के मामलों में संवेदनशीलता जरूरी
नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ (NUSRL), रांची के कुलपति प्रो. (डॉ.) अशोक आर. पाटिल ने शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी बाल संरक्षण निकायों के बीच सहयोग को महत्वपूर्ण बताया. उन्होंने कहा कि इससे साक्ष्य-आधारित कार्यप्रणाली मजबूत करने, संस्थागत व्यवस्था में सुधार और नीति विकास में मदद मिल सकती है.
उन्होंने बाल कल्याण समिति के सदस्यों से बच्चों और किशोरों से जुड़े मामलों पर विचार करते समय उनकी व्यक्तिगत परिस्थितियों को समझने और संवेदनशीलता के साथ निर्णय लेने की अपील की.
कानूनों और बच्चों के अधिकारों पर चर्चा
प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने बच्चों से जुड़े मामलों पर चर्चा की. इसमें केस स्टडी और व्यावहारिक अभ्यास के जरिए बताया गया कि बच्चों के हित में फैसला लेते समय किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है. बाल कल्याण समिति के सदस्यों को बच्चों के अधिकारों, उनके सर्वोत्तम हित तय करने के सात प्रमुख बिंदुओं और अपनी कानूनी जिम्मेदारियों की जानकारी दी गई.
कार्यक्रम में किशोर न्याय अधिनियम, 2015, पॉक्सो अधिनियम, 2012 और संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार अभिसमय समेत बच्चों की सुरक्षा से जुड़े कानूनों पर भी चर्चा हुई. प्रशिक्षण में भारती अली, अर्लीन मनोहरन और सेंटर फॉर चाइल्ड राइट्स, NUSRL की प्रो. (डॉ.) के. श्यामला ने विशेषज्ञ के रूप में योगदान दिया.
समापन सत्र में UNICEF झारखंड की बाल संरक्षण विशेषज्ञ प्रीति श्रीवास्तव ने कहा कि बाल कल्याण समिति को बच्चों के हित को ध्यान में रखकर फैसले लेने चाहिए. उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण में दी गई चेकलिस्ट बच्चों से जुड़े मामलों को समझने और सही निर्णय लेने में समिति के सदस्यों की मदद करेगी.


