रांची. धनबाद जेल का अतिरिक्त प्रभार लेने से इनकार करना कारा प्रशिक्षण संस्थान, हजारीबाग के प्राचार्य बेसरा निशांत रॉबर्ट को महंगा पड़ा है. झारखंड सरकार ने उनकी एक वेतनवृद्धि रोकने का फैसला लिया है. यह कार्रवाई रांची के बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा के अधीक्षक रहते हुए विभागीय आदेश नहीं मानने के मामले में की गई है.
दरअसल, 21 दिसंबर 2023 को बेसरा निशांत रॉबर्ट को रांची जेल के साथ धनबाद मंडल कारा का भी प्रभार सौंपा गया था. लेकिन उन्होंने दो दिन बाद, 23 दिसंबर को विभाग को पत्र लिखकर इस फैसले पर आपत्ति जताई. उन्होंने धनबाद जेल की जिम्मेदारी किसी दूसरे अधीक्षक को सौंपने का अनुरोध किया था. विभाग ने इसे आदेश की अवहेलना और कर्तव्य में लापरवाही माना.
जांच में दोनों आरोप सही पाए गए
इस मामले में रॉबर्ट के खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई. जांच अधिकारी ने 17 मार्च 2025 को रिपोर्ट सौंपते हुए दोनों आरोपों को सही पाया. इसके बाद विभाग ने उनसे प्रस्तावित कार्रवाई पर जवाब मांगा. रॉबर्ट ने 10 नवंबर 2025 को अपना पक्ष रखा, लेकिन सरकार के मुताबिक, उनके जवाब में कोई नया तथ्य सामने नहीं आया.
इसके बाद सरकार ने उनकी एक वेतनवृद्धि असंचयात्मक प्रभाव से रोकने का फैसला लिया. बेसरा निशांत रॉबर्ट नवंबर 2023 में रांची जेल के अधीक्षक बने थे. दिसंबर 2023 के अंत में उन्हें इस पद से हटाकर हजारीबाग स्थित कारा प्रशिक्षण संस्थान का प्राचार्य बना दिया गया था.
कौन हैं बेसरा निशांत रॉबर्ट
बेसरा निशांत रॉबर्ट झारखंड जेल सेवा के अधिकारी हैं. वे खूंटी उपकारा के अधीक्षक रहने के बाद नवंबर 2023 में बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार, होटवार के अधीक्षक बनाए गए थे. दिसंबर 2023 में उन्हें हजारीबाग स्थित कारा प्रशिक्षण संस्थान का प्राचार्य बना दिया गया.
रांची जेल में रहते हुए उन्हें धनबाद मंडल कारा का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था, लेकिन उन्होंने इसे लेने पर आपत्ति जताई. इस मामले में विभागीय जांच हुई, जिसमें दोनों आरोप प्रमाणित पाए गए. इसके बाद झारखंड सरकार ने उनकी एक वेतनवृद्धि असंचयात्मक प्रभाव से रोकने का दंड दिया.
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