जोहार लाइव ब्यूरो
स्कूलों में छात्राओं के लिए मासिक धर्म के दौरान जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों पर नाराजगी जताई है. कोर्ट ने चेतावनी दी है कि अगर अगली सुनवाई तक राज्यों ने जरूरी जानकारी नहीं दी, तो संबंधित राज्यों के मुख्य सचिवों को अवमानना का नोटिस जारी किया जा सकता है.
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने केंद्र सरकार से कहा कि वह सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से लिखित जवाब ले. कोर्ट ने कहा कि मासिक धर्म के दौरान साफ-सफाई और जरूरी सुविधाएं मिलना छात्राओं का मौलिक अधिकार है. अगर इस फैसले पर अमल नहीं हुआ, तो इसका कोई फायदा नहीं होगा.

राज्यों से जवाब नहीं मिलने पर कोर्ट नाराज
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब केंद्र सरकार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से जानकारी मांग रही है, तो वे जवाब क्यों नहीं दे रहे हैं. अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कोर्ट को बताया कि केंद्र सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से संपर्क किया है, लेकिन अब तक कई जगहों से जवाब नहीं मिला है.
इस पर कोर्ट ने कहा कि अगली सुनवाई तक जवाब नहीं देने वाले राज्यों के मुख्य सचिवों को अवमानना का नोटिस जारी किया जा सकता है. कोर्ट ने इसे राज्यों के लिए आखिरी मौका बताया है.
स्कूलों में ये सुविधाएं देना जरूरी
सुप्रीम कोर्ट ने 30 जनवरी को दिए अपने फैसले में केंद्र सरकार की मासिक धर्म स्वच्छता नीति को पूरे देश में लागू करने का निर्देश दिया था. यह नियम सरकारी और निजी, दोनों तरह के स्कूलों पर लागू होगा. इसमें शहर और गांव के स्कूल भी शामिल हैं.
कोर्ट ने स्कूलों में छात्राओं के लिए कई सुविधाएं उपलब्ध कराने को कहा है.
- छात्राओं के लिए अलग और साफ शौचालय हों.
- शौचालयों में पानी की व्यवस्था हो.
- साबुन से हाथ धोने की सुविधा मिले.
- छात्राओं को मुफ्त सैनिटरी पैड दिए जाएं.
- सैनिटरी पैड देने वाली मशीनें और इस्तेमाल किए गए पैड फेंकने की उचित व्यवस्था हो.
- जरूरत पड़ने पर छात्राओं को अतिरिक्त कपड़े, यूनिफॉर्म और दूसरी जरूरी चीजें मिलें.
- शौचालयों की नियमित सफाई और रखरखाव हो.
कोर्ट ने यह भी कहा कि स्कूलों में इन सुविधाओं की सिर्फ कागजों पर जानकारी देना काफी नहीं है. यह देखना जरूरी है कि छात्राओं को वास्तव में ये सुविधाएं मिल रही हैं या नहीं.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मासिक धर्म के दौरान जरूरी सुविधाएं नहीं मिलने के कारण किसी भी छात्रा की पढ़ाई नहीं छूटनी चाहिए. खासकर गांव और दूरदराज के इलाकों में रहने वाली छात्राओं को ऐसी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है.
कोर्ट ने स्कूलों की जांच के लिए शिक्षा अधिकारियों को शिक्षकों की टीमें बनाने और औचक निरीक्षण कराने का निर्देश दिया है. इससे पता चलेगा कि स्कूलों में जरूरी सुविधाएं हैं या नहीं और उनका सही इस्तेमाल हो रहा है या नहीं.
कमियां भी बतानी होंगी, सिर्फ अच्छी बातें नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को सभी राज्यों से एक प्रश्नावली के जरिए जानकारी लेने को कहा है. इसमें यह बताना होगा कि कोर्ट के निर्देशों पर कितना काम हुआ है. साथ ही राज्यों को यह भी बताना होगा कि स्कूलों में कौन-कौन सी सुविधाएं नहीं हैं, उनकी कमी क्यों है और उन्हें पूरा करने में कितना समय लगेगा. कोर्ट ने पर्यावरण को नुकसान कम पहुंचाने वाले सैनिटरी पैड के इस्तेमाल को धीरे-धीरे बढ़ाने पर भी जोर दिया है.
अब इस मामले में अगली सुनवाई 14 दिसंबर को दोपहर 2:30 बजे होगी. कोर्ट ने साफ कर दिया है कि तब तक जवाब नहीं देने वाले राज्यों के मुख्य सचिवों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जा सकती है.
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