अनुराग
झारखंड में निवेश लाने की कोशिश मोमेंटम झारखंड से पहले शुरू हो चुकी थी. राज्य बनने के शुरुआती वर्षों से इस्पात, बिजली, खनन और सीमेंट उद्योगों के लिए कई कंपनियों के साथ समझौते किए गए.
वर्ष 2003 से 2005 के बीच कई बड़े औद्योगिक घरानों ने झारखंड में स्टील और बिजली परियोजनाएं लगाने की इच्छा जताई थी. इन परियोजनाओं के लिए बड़ी मात्रा में जमीन की आवश्यकता थी. कई परियोजनाएं जमीन, खनिज और कोयला उपलब्ध नहीं होने, पर्यावरण से जुड़ी मंजूरी तथा स्थानीय विरोध के कारण आगे नहीं बढ़ सकीं.
वर्ष 2015-16 में राज्य सरकार ने 10 कंपनियों और संस्थाओं के साथ ₹70,460 करोड़ के शुरुआती समझौते किए थे. इनमें अकेले अदाणी समूह का बिजली और खाद कारखाने से जुड़ा ₹50,000 करोड़ का प्रस्ताव शामिल था. बाद के वर्षों में इनमें से सभी प्रस्ताव अपने मूल रूप में आगे नहीं बढ़े.
पिछले 25 वर्षों में झारखंड में हुए सभी निवेश समझौतों, रद्द परियोजनाओं और वास्तविक निवेश का कोई एक सार्वजनिक और कंपनीवार सरकारी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है. अलग-अलग वर्षों के आर्थिक सर्वेक्षण, सरकारी बयान, उद्योग विभाग की जानकारी और समाचार रिपोर्टों में निवेश से जुड़े आंकड़े मिलते हैं, लेकिन पूरे 25 वर्षों का हिसाब एक जगह नहीं दिया गया है.
ऐसा कोई सार्वजनिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है, जिसमें सभी परियोजनाओं के बारे में एक साथ बताया गया हो कि कितनी कंपनियों ने समझौते किए और कितनी कंपनियों को जमीन मिली. इसी तरह कितनी परियोजनाओं का निर्माण शुरू हुआ, कंपनियों ने वास्तव में कितनी रकम खर्च की, कितनी इकाइयों में उत्पादन शुरू हुआ और कितने लोगों को स्थायी रोजगार मिला, इसकी भी एक साथ जानकारी नहीं मिलती.
इसी कारण अलग-अलग समय पर घोषित निवेश प्रस्तावों को जोड़कर उन्हें झारखंड में हुआ कुल निवेश नहीं माना जा सकता. एमओयू किसी कंपनी की निवेश में शुरुआती रुचि को दिखाता है. इसके बाद जमीन, पैसा, पर्यावरण की अनुमति, निर्माण और उत्पादन के चरण पूरे होने हैं. वास्तविक निवेश की रकम कंपनी द्वारा परियोजना पर खर्च शुरू करने के बाद सामने आती है.
मोमेंटम झारखंडः 3.39 लाख करोड़ के समझौतों का क्या हुआ?
झारखंड में निवेश लाने का सबसे चर्चित आयोजन 16 और 17 फरवरी 2017 को रांची में हुआ Momentum Jharkhand Global Investors Summit था. आयोजन के समय आजतक की रिपोर्ट में लगभग 3 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव और 209 एमओयू बताए गए थे.
बाद में उद्योग विभाग के आंकड़ों में 210 कंपनियों के साथ 3.39 लाख करोड़ के समझौते बताए गए. इनमें सबसे अधिक 121 प्रस्ताव उद्योग, खनन और भू-विज्ञान विभाग से जुड़े थे. इसके अलावा आईटी, शहरों के विकास, ऊर्जा, पर्यटन, खाद्य प्रसंस्करण और कपड़ा उद्योग में भी निवेश प्रस्ताव मिले थे.
उस समय इन प्रस्तावों से दो लाख लोगों को सीधे रोजगार और करीब तीन लाख लोगों को अप्रत्यक्ष लाभ मिलने का दावा किया गया था. सम्मेलन में देश-विदेश के औद्योगिक समूहों और कारोबारी प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था.

सम्मेलन के करीब छह वर्ष बाद उद्योग विभाग ने समझौता करने वाली कंपनियों की स्थिति की समीक्षा की. प्रभात खबर में मई 2023 में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, 210 में से 131 कंपनियां परियोजना से पीछे हट चुकी थीं या उनका कोई पता नहीं था. इन 131 कंपनियों से जुड़े प्रस्तावों की कुल रकम लगभग ₹2.68 लाख करोड़ थी.
रिपोर्ट में उद्योग विभाग के आंकड़ों के आधार पर बताया गया कि 79 कंपनियों से जुड़ी करीब 71,000 करोड़ की परियोजनाओं को निवेश के लिए आगे बढ़ी परियोजनाओं की श्रेणी में रखा गया. इस आधार पर 210 में से 79 कंपनियां किसी स्तर पर निवेश के लिए आगे बढ़ीं. यह कुल कंपनियों का करीब 37.6 प्रतिशत है.
रकम के हिसाब से 3.39 लाख करोड़ में से करीब 71,000 करोड़ की परियोजनाओं के आगे बढ़ने की जानकारी सामने आई. यह कुल प्रस्तावित रकम का लगभग 20.9 प्रतिशत है. इसका अर्थ है कि मोमेंटम झारखंड में घोषित प्रत्येक 100 के निवेश प्रस्ताव में से करीब 21 से जुड़ी परियोजनाओं को विभागीय समीक्षा में निवेश की श्रेणी में रखा गया.
यहां ‘निवेश’ शब्द की सीमा को समझना जरूरी है. उपलब्ध समाचार रिपोर्टों में सभी 79 कंपनियों के वास्तविक खर्च, उत्पादन शुरू होने और पैदा हुए रोजगार का कंपनीवार विवरण नहीं दिया गया है. इसलिए 71,000 करोड़ को पूरी तरह चालू हो चुकी परियोजनाओं का आंकड़ा मानने के बजाय विभाग द्वारा निवेश की श्रेणी में रखी गई परियोजनाओं की कुल राशि के रूप में पढ़ा जाना चाहिए.
जमीन के कारण 35 कंपनियां पीछे हटीं
प्रभात खबर की रिपोर्ट के अनुसार, कम-से-कम 35 कंपनियां जमीन से जुड़ी समस्याओं के कारण पीछे हटीं. कुछ कंपनियों को उनकी जरूरत के अनुसार जमीन नहीं मिली. कुछ प्रस्ताव वन भूमि की अनुमति के स्तर पर अटक गए.
इनोवा प्लास्टोमेट लिमिटेड ने आदित्यपुर में औद्योगिक पार्क के लिए 10 एकड़ जमीन मांगी थी, लेकिन उसे जमीन नहीं मिली. हेमकुंट आहार प्राइवेट लिमिटेड को हजारीबाग में खाद्य प्रसंस्करण पार्क के लिए पांच एकड़ जमीन की जरूरत थी. रिपोर्ट के अनुसार, उसे भी जमीन उपलब्ध नहीं कराई जा सकी.
ग्रीनटेक एनवायरनमेंट मैनेजमेंट को दुमका में जैविक कचरे से जुड़ा संयंत्र लगाने के लिए जमीन दी गई थी, लेकिन कंपनी रांची में जमीन चाहती थी. फिल्म सिटी से जुड़े एक प्रस्ताव के लिए 10 एकड़ से अधिक जमीन की जरूरत बताई गई, लेकिन उपयुक्त जमीन नहीं मिली.
ऊर्जा क्षेत्र की परियोजनाएं भी अलग-अलग कारणों से रुकीं. दिव्या हाईटेक सोलर प्रोजेक्ट ने 300 करोड़ के निवेश से सौर और दूसरे माध्यमों से बिजली बनाने वाला संयंत्र लगाने का प्रस्ताव दिया था. रिपोर्ट के अनुसार, बिजली खरीदने का समझौता नहीं होने के कारण कंपनी पीछे हट गई.
JSW Steel ने 35,000 करोड़ के निवेश से बिजली संयंत्र लगाने का प्रस्ताव दिया था. इस परियोजना के लिए भी राज्य में तैयार होने वाली बिजली की खरीद से जुड़ा समझौता नहीं हो सका. कुछ कंपनियों की परियोजनाएं खदान या खनिज उपलब्ध नहीं होने के कारण आगे नहीं बढ़ीं.
आगे नहीं बढ़ने वाले बड़े प्रस्तावों में अदाणी एंटरप्राइजेज का 50,000 करोड़, JSW Steel का 35,000 करोड़, स्वीडन की एक कंपनी का 17,300 करोड़ और चीन से जुड़ा 66,996 करोड़ का प्रस्ताव शामिल था. कुछ कंपनियों ने एमओयू के बाद राज्य सरकार से दोबारा संपर्क नहीं किया.
मोमेंटम झारखंड से खाद्य प्रसंस्करण, कपड़ा, सीमेंट, इस्पात से जुड़े छोटे उद्योगों और दूसरे क्षेत्रों की कुछ इकाइयां शुरू हुईं. लेकिन सभी 79 परियोजनाओं के वास्तविक खर्च, उत्पादन और रोजगार की एक समान कंपनीवार जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है.
आयोजन पर खर्च की जांच का आदेश
मोमेंटम झारखंड के आयोजन पर 100 करोड़ से अधिक खर्च होने की बात कही गई. वर्ष 2020 में राज्य सरकार ने आयोजन और खर्च की विशेष जांच कराने का आदेश दिया था.
हालांकि आयोजन पर खर्च और कथित गड़बड़ियों से जुड़ी किसी अंतिम जांच रिपोर्ट का सार्वजनिक विवरण उपलब्ध नहीं है. निवेश सम्मेलन के खर्च और उससे आए वास्तविक निवेश का सीधा मिलान करने वाली कोई सार्वजनिक सरकारी रिपोर्ट भी उपलब्ध नहीं है.
खनिज उत्पादन और नया निवेश एक साथ क्यों नहीं बढ़े?
नीति आयोग के आंकड़ों में झारखंड का कोयला और धातु वाले खनिजों के उत्पादन में बड़ा हिस्सा दर्ज है. दूसरी ओर राज्य में विदेशी निवेश केवल 0.06 मिलियन डॉलर रहा. दोनों आंकड़े बताते हैं कि खनिज उत्पादन और नया निवेश एक ही गति से नहीं बढ़े.
झारखंड से बड़ी मात्रा में कोयला और दूसरे खनिज निकाले जाते हैं. इनमें से एक हिस्सा दूसरे राज्यों में स्थित उद्योगों को जाता है. राज्य में स्टील और बिजली के बड़े उद्योग पहले से मौजूद हैं, लेकिन खनन में काम आने वाली मशीनें, वाहन के उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक सामान, बैटरी, विशेष प्रकार का स्टील और दूसरे तैयार उत्पाद बनाने वाले उद्योग सीमित संख्या में विकसित हुए हैं.
भूमि से जुड़े मामले भी कई निवेश प्रस्तावों को प्रभावित करते रहे हैं. झारखंड के कई इलाके आदिवासी बहुल हैं और यहां जमीन के हस्तांतरण से जुड़े विशेष कानून लागू हैं. छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम और संताल परगना काश्तकारी अधिनियम में आदिवासी जमीन की खरीद-बिक्री पर विशेष नियम हैं.
मोमेंटम झारखंड से जुड़े मामलों में समस्या केवल जमीन कानूनों तक सीमित नहीं थी. उपलब्ध रिपोर्ट में उपयुक्त जमीन की पहचान नहीं होने, कंपनी को मांगे गए स्थान पर जमीन नहीं मिलने, वन भूमि की अनुमति लंबित रहने और अलग-अलग विभागों के बीच मामला अटकने जैसे कारण भी सामने आए.
किसी औद्योगिक परियोजना को शुरू करने के लिए उद्योग विभाग के अलावा जमीन, बिजली, पानी, प्रदूषण नियंत्रण, पर्यावरण और खनिज से जुड़े विभागों की अनुमति की जरूरत पड़ सकती है. मोमेंटम झारखंड की समीक्षा में बिजली खरीद समझौते, खनिज उपलब्धता और जमीन से जुड़े मामले इन्हीं अलग-अलग स्तरों पर अटके मिले.
नीति आयोग के सर्वे में सड़क और मोबाइल नेटवर्क की समस्या भी सामने आई. राज्य में जमशेदपुर, बोकारो, धनबाद और रांची जैसे औद्योगिक तथा शहरी केंद्र मौजूद हैं, लेकिन दूसरे जिलों में उद्योगों के लिए उपलब्ध सुविधाओं में अंतर है.
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