झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने रविवार को चाईबासा में प्रेस वार्ता कर MMDR Act को लेकर JMM और कांग्रेस पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि कानून की गलत व्याख्या कर लोगों के बीच भ्रम फैलाया जा रहा है, जबकि वास्तविकता यह है कि यह कानून झारखंड के हित में है. उनके मुताबिक, इसका मकसद खनिज संपदा से राज्य को अधिकतम लाभ दिलाना और वैध खनन को पारदर्शी बनाना है.
रघुवर दास ने कहा कि JMM और कांग्रेस की बेचैनी की वजह यही कानून है. क्योंकि राज्य की अवैध माइनिंग कर इसे ATM बना दिया है. उन्होंने आरोप लगाया कि जल, जंगल, जमीन और प्राकृतिक संसाधनों के नाम पर सत्ता में आने के बाद पिछले सात वर्षों में राज्य के प्राकृतिक संसाधनों की लूट हुई है. उनके मुताबिक, कोयला, पत्थर, बालू और शराब समेत अलग-अलग क्षेत्रों में सिंडिकेट सक्रिय हैं और पूरे राज्य को सिंडिकेट के हवाले कर दिया गया है.
उन्होंने कहा कि झारखंड को बनाने के लिए भगवान बिरसा मुंडा, सिदो-कान्हू, तिलका मांझी समेत अनगिनत लोगों ने संघर्ष किया. ऐसे में राज्य के प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल झारखंड के लोगों के हित में होना चाहिए.
अवैध खनन से करोड़ों के राजस्व का नुकसान
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि अवैध खनन की वजह से राज्य के राजस्व को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है. उन्होंने कहा कि जहां वैध खनन होता है, वहां राज्य को रॉयल्टी के साथ-साथ जिला खनिज फाउंडेशन यानी DMF के जरिए खनन प्रभावित इलाकों के विकास के लिए राशि मिलती है.
उन्होंने कहा कि DMF की राशि का इस्तेमाल स्वास्थ्य, पेयजल और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं के विकास में किया जा सकता है. रघुवर दास ने अपने कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने DMF के पैसे का इस्तेमाल खनन प्रभावित इलाकों में ‘लाल पानी’ की समस्या से बचाव और लोगों को पानी उपलब्ध कराने के लिए किया था.
झारखंड का कोयला व लोहा हुआ महंगा
उन्होंने कहा कि सेस लगाये जाने के कारण झारखंड का कोयला व लोहा महंगा हो चुका है. इससे झारखंड के कोयला लोहा की मांग घट गयी है. उदाहरण के लिए, ग्रेड 8 से ग्रेड 12 कोयले की दर झारखंड में 2045-3212 रुपये प्रति टन ओड़िशा और छत्तीसगढ़ में 1514-2681 रुपये प्रति टन की दर से उपलब्ध है.
उन्होंने यह भी कहा कि लोहा (एक ही क्वालिटी की तुलना करें तो) झारखंड में 8284 रुपये प्रति टन, ओड़िशा में 7493 रुपये प्रति टन, छत्तीसगढ़ में 7422 रुपये प्रति टन की दर पर उपलब्ध है. ऐसे में महंगा खनिज खरीदेगा कौन.
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