मुंबई के आईआईटी बॉम्बे (IIT Bombay) में बीते 18 सितंबर को 19 वर्षीय छात्र साहिल वाकोडे की मौत के बाद कैंपस में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है. छात्र की मौत के बाद छात्रों ने प्रदर्शन किया, जिसके बाद मिड-सेमेस्टर परीक्षाएं स्थगित करनी पड़ीं. मामला अब इसलिए भी गंभीर हो गया है क्योंकि छात्र के माता-पिता की शिकायत पर पुलिस ने आईआईटी बॉम्बे के फैकल्टी मेंबर सूर्य नारायण डूला के खिलाफ SC/ST Act और आत्महत्या के लिए उकसाने से जुड़ी धाराओं में केस दर्ज किया है.
परिवार ने आरोप लगाया है कि साहिल को जातिगत आधार पर प्रताड़ित किया गया और मानसिक दबाव बनाया गया. दूसरी तरफ आईआईटी बॉम्बे ने जातिगत भेदभाव के आरोपों से इनकार किया है. संस्थान का कहना है कि परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन के इस्तेमाल का मामला सामने आने के बाद छात्र से बात की गई थी, लेकिन उसके खिलाफ कोई disciplinary action शुरू नहीं किया गया था. पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है.
साहिल की मौत के बाद IITs में छात्रों की आत्महत्या और ड्रॉपआउट के पुराने संसदीय आंकड़े भी चर्चा में आ गए हैं. शिक्षा मंत्रालय के जुलाई 2023 के लोकसभा जवाब के मुताबिक 2018 से 2022 के बीच IITs में 32 छात्रों ने आत्महत्या की थी. साल 2018 में 8, 2019 में 8, 2020 में 3, 2021 में 4 और 2022 में 9 छात्रों की मौत आत्महत्या से हुई थी.
सरकार ने इन मामलों की वजहों में academic stress, पारिवारिक और व्यक्तिगत कारण, मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियां और दूसरी व्यक्तिगत परिस्थितियों का उल्लेख किया था.
एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि 2026 में जब संसद में पिछले वर्षों में IITs में छात्र आत्महत्या को लेकर सवाल पूछा गया, तो शिक्षा मंत्रालय ने ताजा IIT-wise आंकड़ों की नई पूरी श्रृंखला देने के बजाय NCRB के Accidental Deaths & Suicides in India डेटा की ओर संदर्भित किया.
यानी देश के सबसे प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों में छात्र आत्महत्या पर बहस तो लगातार हो रही है, लेकिन IIT-wise, साल-दर-साल और सामाजिक श्रेणी के हिसाब से एक ताजा, एकीकृत तस्वीर आसानी से उपलब्ध नहीं है.
SC/ST छात्रों की आत्महत्या का आंकड़ा भी संसद में
मार्च 2023 में राज्यसभा में दिए जवाब में IITs में SC/ST छात्रों की आत्महत्या का अलग आंकड़ा भी सामने आया था. सरकार के मुताबिक 2018 में 2 SC छात्रों, 2019 में 1 SC छात्र, 2022 में 1 SC और 1 ST छात्र और 2023 में 2 SC छात्रों की आत्महत्या रिपोर्ट की गई थी.
ये आंकड़े ऐसे समय सामने आए हैं जब IIT Bombay के मौजूदा मामले में परिवार ने जातिगत उत्पीड़न का आरोप लगाया है और इसी शिकायत के आधार पर SC/ST Act की धाराएं FIR में जोड़ी गई हैं.
3,542 SC/ST/OBC छात्र IIT से हुए थे बाहर
संसद में IITs से छात्रों के ड्रॉपआउट का आंकड़ा भी सामने आया था. 7 दिसंबर 2023 में सांसद कोडिकुन्निल सुरेश द्वारा सदन में रखे गए आंकड़े के अनुसार, पांच साल (2018-23) की अवधि में IITs से 2,066 OBC, 1,068 SC और 408 ST छात्र पढ़ाई छोड़ चुके थे. तीनों वर्गों को मिलाकर यह संख्या 3,542 है.
IIT Bombay की घटना ने फिर खोला पुराना सवाल
साहिल वाकोडे की मौत के मामले में अभी पुलिस जांच चल रही है. परिवार के आरोप और IIT Bombay का पक्ष अलग-अलग हैं. जांच में यह साफ होना बाकी है कि छात्र की मौत के पीछे क्या परिस्थितियां थीं और परिवार की ओर से लगाए गए जातिगत उत्पीड़न के आरोपों में कितनी सच्चाई है.
लेकिन उपलब्ध संसदीय आंकड़े बताते हैं कि IITs में छात्र आत्महत्या का मामला नया नहीं है. साल 2018 से 2022 के बीच 32 आत्महत्याएं दर्ज हुईं, जबकि 3,542 SC/ST/OBC छात्र पांच साल की अवधि में IIT से ड्रॉपआउट हुए.
अब IIT Bombay में SC/ST Act के तहत दर्ज केस ने इस सवाल को फिर सामने ला दिया है कि देश के सबसे प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों में छात्रों की आत्महत्या, ड्रॉपआउट और जातिगत शिकायतों की निगरानी के लिए उपलब्ध आंकड़े आखिर कितने व्यापक और अपडेटेड हैं.
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