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    Home»जोहार ब्रेकिंग»देश का हर चौथा युवा न पढ़ रहा, न नौकरी कर रहा, 250 जिलों के NSO रिपोर्ट ने खोली पोल
    जोहार ब्रेकिंग

    देश का हर चौथा युवा न पढ़ रहा, न नौकरी कर रहा, 250 जिलों के NSO रिपोर्ट ने खोली पोल

    joharlive NetworkBy joharlive NetworkSeptember 20, 2026Updated:September 20, 2026No Comments4 Mins Read4
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    विजय उरांव

    भारत दुनिया की सबसे युवा आबादी वाले देशों में है. यही युवा देश की ताकत हैं, यही भारत के डेमोग्राफिक डिविडेंड की सबसे बड़ी उम्मीद हैं. लेकिन अब पहली बार जिला स्तर पर सामने आए सरकारी आंकड़े इस चमकदार तस्वीर के पीछे की एक बड़ी चुनौती दिखा रहे हैं. देश के करीब 250 जिलों में 15 से 29 साल के कम से कम 25 फीसदी युवा ऐसे हैं, जो न पढ़ रहे हैं, न नौकरी कर रहे हैं और न ही किसी ट्रेनिंग से जुड़े हैं. कुछ जिलों में यह आंकड़ा 30 फीसदी से भी ऊपर पहुंच गया है.

    राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) की सितंबर 2026 में जारी PLFS 2025 के जिला-स्तरीय आंकड़े इसलिए अहम हैं क्योंकि अब तक रोजगार और बेरोजगारी की तस्वीर ज्यादातर देश या राज्य के औसत से समझी जाती थी. पहली बार पता चल रहा है कि राज्य के भीतर किस जिले में युवा किस स्थिति में हैं.

    कहीं हर तीसरा युवा सिस्टम से बाहर

    आंकड़ों के मुताबिक 23.7 फीसदी जिलों में NEET (Not in Education, Employment, or Training) युवाओं की हिस्सेदारी 30 फीसदी से ज्यादा है. यानी इन जिलों में 15 से 29 साल की उम्र के हर तीन में से कम से कम एक युवा फिलहाल न शिक्षा में है, न रोजगार में और न किसी ट्रेनिंग में. 45.9 फीसदी जिलों में यह आंकड़ा 20 से 30 फीसदी के बीच है.

    राज्यों के भीतर भी तस्वीर काफी बदल जाती है. बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और पश्चिम बंगाल के बड़ी संख्या में जिलों में कम से कम एक चौथाई युवा NEET श्रेणी में हैं. दूसरी तरफ कुछ जिलों में यह दर 10 फीसदी से भी नीचे है.

    यानी देश का औसत एक बात कहता है, लेकिन जिला स्तर पर तस्वीर दूसरी कहानी बताती है.

    रोजगार की पूरी तस्वीर समझने के लिए NSO ने सिर्फ NEET का आंकड़ा नहीं दिया है. पहली बार जिला स्तर पर LFPR, WPR और बेरोजगारी दर (UR) भी सामने आई है. LFPR बताता है कि कितने लोग काम कर रहे हैं या काम तलाश रहे हैं. WPR बताता है कि वास्तव में कितने लोग काम कर रहे हैं, जबकि UR श्रम बल में शामिल लोगों में बेरोजगार लोगों की हिस्सेदारी बताता है.

    ज्यादातर जिलों में LFPR (Labour Force Participation Rate) और WPR (Worker Population Ratio) 40 से 80 फीसदी के बीच हैं. करीब 77.8 फीसदी जिलों में बेरोजगारी दर 0.5 से 5.5 फीसदी के बीच है. लेकिन इन औसत आंकड़ों के पीछे जिलों के बीच बड़ा फर्क छिपा हुआ है.

    महिलाओं की तस्वीर और भी दिलचस्प

    रोजगार के आंकड़ों में सबसे बड़ा अंतर महिलाओं के मामले में दिखाई देता है. देश के 57.8 फीसदी जिलों में महिला LFPR 40 फीसदी या उससे ज्यादा है. लेकिन कुछ जिलों में महिलाएं बड़ी संख्या में कामकाजी हैं, जबकि कुछ जगहों पर उनकी भागीदारी काफी कम है.

    हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर में महिला LFPR 80.9 फीसदी है. जम्मू-कश्मीर के बडगाम में यह 71.4 फीसदी और ओडिशा के मयूरभंज में 71.8 फीसदी है. दूसरी तरफ बिहार के सिवान में यह 24.7 फीसदी और दिल्ली के ईस्ट दिल्ली जिले में 18.9 फीसदी है.

    यानी महिलाओं के रोजगार को सिर्फ ग्रामीण और शहरी इलाकों के फर्क से समझना आसान नहीं है. एक तरफ पहाड़ी और ग्रामीण जिलों में महिलाएं बड़ी संख्या में श्रम बाजार का हिस्सा हैं, तो दूसरी तरफ कुछ शहरी और मैदानी इलाकों में उनकी भागीदारी काफी कम है.

    झारखंड में भी जिलों के बीच बड़ा अंतर है. पश्चिमी सिंहभूम में महिला LFPR 55.7 फीसदी रहा. वहीं महिला WPR के मामले में गिरिडीह 54.4 फीसदी के साथ सबसे ऊपर रहा.

    अब इन आंकड़ों का असली इस्तेमाल यहां से शुरू होता है. जिस जिले में युवा पढ़ाई और रोजगार दोनों से बाहर हैं, वहां सिर्फ एक जैसी रोजगार योजना चलाने से बात नहीं बनेगी. वहां स्थानीय उद्योग, अप्रेंटिसशिप और कौशल प्रशिक्षण की जरूरत अलग हो सकती है. जहां महिला LFPR कम है, वहां महिलाओं के लिए काम के अवसर, प्रशिक्षण और सुरक्षित कार्यस्थल की कमी को अलग से देखना होगा.

    PLFS 2025 ने पहली बार सरकार को यह मौका दिया है कि वह देश को सिर्फ एक औसत आंकड़े के तौर पर न देखे. अब हर जिले की अपनी रोजगार कहानी सामने है. सवाल यह है कि इन आंकड़ों को फाइलों में रखा जाएगा या जिला स्तर पर रोजगार की योजनाएं भी इन्हीं आंकड़ों के हिसाब से बदलेंगी.

    Also Read : डेंजर ज़ोन में भारत के 90 प्रतिशत उपग्रह : कैसे अपनी सैटेलाइट्स को सुरक्षित बचा रहा है इसरो?

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