रांची। खूंटी जिले में एसआईआरबी – 2 के सरकारी खाते से 22.69 लाख अवैध निकासी मामले की जांच कर रही सीआईडी टीम ने चौंकाने वाले खुलासा किए है. सीआईडी की जांच में पता चला है कि दिसंबर 2019 से अगस्त 2021 के बीच 28 किस्तों में राशि एक ही बैंक खाते में ट्रांसफर हुए है. यह राशि कुल 22 लाख 69 हजार 657 रुपये है. यह पूरा खेल एसआईआरबी-02, खूंटी के डीडीओ कार्यालय से हुआ है. लाखों रुपये का ट्रांजेक्शन जिस खाते में हुआ है, वह शुभम सिंह के नाम पर है. इसके अलावा सीआईडी को पुख्ता सबूत मिले है कि तत्कालीन अकाउंटेंट ने ट्रेजरी कोड के नियमों का पालन नहीं किया और सरकारी राशि का दुरुपयोग करते हुए अवैध रकम इस खाते में ट्रांसफर किए है.
जांच में सरकारी पैसे के दुरुपयोग का आरोप
सीआईडी की जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकारी खाते से निकाली गई रकम सीधे शुभम सिंह के नाम वाले बैंक खाते में पहुंची. इसके बाद मामले में कानूनी कार्रवाई की अनुशंसा की गई और एफआईआर दर्ज की गई. इससे पूर्व सीआईडी की जांच में पता चला कि मुख्य आरोपी अजीत कुमार है. शुभम सिंह का रिश्तेदार होने के कारण उसे बैंक खाता संचालन करने का मौखिक आदेश दिया था. वर्ष 2019 में अजीत कुमार ने शुभम से कहा था कि वह पैसे बचाने के लिए उसके बैंक खाते का इस्तेमाल करना चाहता है. रिश्तेदार होने के कारण उसे खाते के इस्तेमाल की अनुमति दे दी. दावा किया गया कि खाते से जुड़ा एटीएम कार्ड और मोबाइल नंबर अजीत कुमार के पास था.
खाता से संबंधित बैंकिंग अलर्ट व ओटीपी आता था अजीत के पास
सीआईडी की जांच में खुलासा हुआ कि बैंक खाते से होने वाले लेनदेन के दौरान आने वाले ओटीपी और अन्य बैंकिंग अलर्ट भी अजीत कुमार के मोबाइल नंबर पर आते थे. सरकारी रकम आने के बाद खाते से हुए अधिकांश खर्च खूंटी और हजारीबाग में किए गए. इन पैसों का इस्तेमाल किराना, ईंधन और रिलायंस स्टोर समेत अन्य दुकानों पर खरीदारी के लिए किया गया. शुभम सिंह ने न तो खूंटी में जाकर खाते का संचालन किया और न ही कथित सरकारी राशि में से कोई पैसा खुद इस्तेमाल किया.
क्या है मामला
यह मामला सीआईडी थाना कांड संख्या 15/2026 से जुड़ा है. आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 406, 409, 420, 419, 467, 468, 471, 120(B) और 34 के तहत मामला दर्ज किया गया है. इससे पूर्व खूंटी के तत्कालीन उपायुक्त के निर्देश पर सरकारी राशि के भुगतान की जांच कराई गई थी. जांच के दौरान वित्त विभाग के 20 अप्रैल 2026 के पत्र और प्रधान महालेखाकार, झारखंड के 13 अप्रैल 2026 के पत्र के आधार पर मामले की जांच शुरू हुई थी.
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