झारखंड के गुमला जिले में आजादी के दशकों बाद भी ग्रामीणों को बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है. रायडीह प्रखंड के पो पंचायत के रमजा कर बेन्दवाकोना गांव में सड़क नहीं होने का खामियाजा एक बीमार महिला को भुगतना पड़ा. 24 वर्षीय बृन्दावती देवी की अचानक तबीयत बिगड़ने पर ग्रामीणों ने उन्हें गेडुवा भार में उठाकर करीब दो किलोमीटर दूर मुख्य सड़क तक पहुंचाया. इसके बाद निजी वाहन से उन्हें सदर अस्पताल, गुमला ले जाया गया.
गांव में सड़क के साथ बिजली और पेयजल की सुविधा भी नहीं है. ग्रामीणों के मुताबिक, बिजली नहीं होने के कारण आज भी लोग डिबरी के सहारे रात गुजारते हैं, जबकि पेयजल के लिए डाड़ी-चुआं पर निर्भर रहना पड़ता है.
सड़क नहीं होने से मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में सड़क की सुविधा नहीं होने के कारण किसी के बीमार पड़ने पर उसे अस्पताल पहुंचाना मुश्किल हो जाता है. गंभीर स्थिति में मरीज को समय पर इलाज नहीं मिल पाने का खतरा बना रहता है. ग्रामीणों के मुताबिक, कई बार मरीजों को इसी तरह पैदल या स्थानीय साधनों से मुख्य सड़क तक पहुंचाना पड़ता है.
बिजली और पेयजल की भी समस्या
ग्रामीण ब्रजनाथ सिंह ने बताया कि गांव में अब तक बिजली की सुविधा नहीं पहुंची है. शाम होते ही ग्रामीण डिबरी के सहारे रात गुजारने को मजबूर हैं. वहीं, पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण लोग डाड़ी-चुआं के पानी पर निर्भर हैं.
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क, बिजली और पेयजल जैसी समस्याओं को लेकर कई बार जनप्रतिनिधियों और विभागीय अधिकारियों को जानकारी दी गई है. इसके बावजूद अब तक समस्या के समाधान के लिए ठोस पहल नहीं की गई है. ग्रामीणों ने प्रशासन से गांव तक सड़क निर्माण कराने के साथ बिजली और पेयजल की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की है. उनका कहना है कि बुनियादी सुविधाएं नहीं होने का खामियाजा सबसे ज्यादा मरीजों और बुजुर्गों को भुगतना पड़ रहा है.


