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    Home»जेपीएससी / जेएसएससी»जोहार लाइव एक्सक्लूसिव : यूपी, हरियाणा और पंजाब से बुलाए जाते थे एक्सपर्ट्स, प्रोफेसर्स की मदद से हाइडआउट्स में बढ़ाए जाते थे अभ्यर्थियों के नंबर
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    जोहार लाइव एक्सक्लूसिव : यूपी, हरियाणा और पंजाब से बुलाए जाते थे एक्सपर्ट्स, प्रोफेसर्स की मदद से हाइडआउट्स में बढ़ाए जाते थे अभ्यर्थियों के नंबर

    joharlive NetworkBy joharlive NetworkAugust 31, 2026No Comments4 Mins Read11
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    आनंद दत्त/किसलय शानू

    जेपीएससी घोटाले के खुलासों की कड़ी में एक और अहम जानकारी मिली है. अभियुक्तों में से एक अभय तिवारी ने खुले तौर पर स्वीकार किया है कि एसीएफ और एफआरओ की प्रारंभिक परीक्षा हो जाने के बाद मुख्य लिखित परीक्षा में जिन अभ्यर्थियों से पैसे लिए जाते थे, उनके नंबर बढ़ाने के लिए कई सारे प्रोफेसर्स की मदद ली जा रही थी.

    सीआईडी को दिए बयान के मुताबिक अभय ने बताया है कि एसीएफ और एफआरओ की प्रारंभिक परीक्षा होने जाने के बाद मुख्य लिखित परीक्षा के लिए रांची के हरिओम टावर में सानंद प्रकाश उर्फ आनंद के नाम पर कमरा किराए पर लिया गया था. इसके अलावा अन्य जगहों पर भी एजेंट सतपाल एवं मिश्रा (पूरा नाम नहीं लिया गया है) लखनऊ, पंजाब एवं हरियाणा से लोगों को बुलाकर अभ्यर्थियों से आंसर लिखवाते थे.

    ये भी पढ़ें : जोहार लाइव एक्सक्लूसिव : 14वीं जेपीएससी पीटी में 11 छात्र पैसे देकर हुए थे पास, मास्टरमाइंड अभय तिवारी के पार्टनर उमेश ने सीआइडी के पास किया खुलासा

    अभय आगे बताता है, इसके अलावा जिन अभ्यर्थियों ने ठीक-ठाक उत्तर लिखे थे, उनके नंबर बढ़ाने के लिए कई प्रोफेसर से संपर्क किया जाता था. मेरे कैंडिडेट्स के मेंस एग्जाम का उत्तर लिखवाने एवं नंबर बढ़वाने के लिए मैंने 40 लाख रुपए दिए हैं.

    मेंस परीक्षा में विस्तृत उत्तर लिखने पड़ते थे. ऐसे में टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह द्वारा मेरे कैंडिडेट की उत्तर पुस्तिकाएं स्ट्रांग रूम से निकाल कर मुझे दी गई. इसी तरह बाकी एजेंट्स के कैंडिडेट की उत्तर पुस्तिकाएं भी उनको दी जाती थी.

    एक और अभियुक्त हेमंत वर्मा भी अभय तिवारी के बातों की पुष्टि अपने बयान में करता है. सीआईडी को दिए बयान में उसने बताया है कि 14वीं जेपीएससी एवं एसीएफ पीटी में गड़बड़ी करने में रामवीर सिंह, सत्यपाल सिंह, मो. उस्मान एवं प्रदीप कुमार सिंह की मुख्य भूमिका रहती थी. स्कैनिंग के समय जब ओएमआर शीटें हैंडओवर की जाती थी, तब प्रदीप कुमार सिंह, रामवीर सिंह, सत्यपाल सिंह और मो. उस्मान चयनित अभ्यर्थियों की ओएमआर शीट में उत्तर भरने का कार्य करते थे. इसके बाद प्रदीप कुमार उन ओएमआर शीटों को स्कैन कर सिस्टम में अपलोड करता था, जिसके आधार पर रिजल्ट प्रोसेस किया जाता था.

    ये भी पढ़ें : जोहार लाइव एक्सक्लूसिव : जेपीएससी परीक्षा पास कराने के लिए छात्रों से वसूले गये पैसे से जेपीएससी के चेयरमैन और परीक्षा उप नियंत्रक ने की मौज- मस्ती

    14वीं जेपीएससी तथा एसीएफ पीटी परीक्षा में भी इसी प्रकार ओएमआर शीट में मैनिपुलेशन का कार्य किया गया था. एसीएफ की पीटी इसी प्रकार 15 से 20 अभ्यर्थियों का ओएमआर शीटों में मैनिपुलेशन कर उत्तीर्ण कराया गया. जबकि 14वीं जेपीएससी पीटी में इसी प्रकार लगभग 100 अभ्यर्थियों का ओएमाआर शीटों में मैनिपुलेशन कर उत्तीर्ण किया गया.

    पीटी में अनियमितता के लिए हाइडआउट में अलग टीम करती थी काम

    हेमंत वर्मा के मुताबिक, पीटी परीक्षा में अनियमितता करने के लिए एक अलग टीम काम करती थी, जो छिपकर (हाइडआउट) रहती थी और ओएमआर शीटों में हेरफेर करने में सहायता करती थी. स्कैनिंग के लिए बाहर से आनेवाली टीम में लखनऊ के समीर और बबलू को ही मैं जानता था. जबकि मैं खुद, केवल मुख्य परीक्षा में ही काम किया था.

    ये भी पढ़ें : जोहार लाइव एक्सक्लूसिवः 2 करोड़ रुपए और टोटल बिलिंग में 20 प्रतिशत कमिशन पर एल ख्यांगते ने किया था डील, जेपीएससी घोटाले का पूरा काला चिट्ठा पार्ट-1

    पीटी परीक्षा मो. उस्मान, रामवीर सिंह और मो. एबाद के द्वारा ही देखा जाता था. स्ट्रांग रूम में सिर्फ उस्मान, रामवीर सिंह, सत्यपाल सिंह, प्रदीप कुमार सिंह और कभी–कभी एबाद को जाने की अनुमति थी. इन सभी एग्जाम के पीटी और मेंस में गड़बड़ी के समय मो. उस्मान, रामवीर सिंह और सत्यपाल सिंह मुख्य रूप से उपस्थित रहते थे. जबकि स्कैनिंग रूम में टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह, सत्यपाल सिंह, मो. उस्मान, प्रदीप कुमार सिंह और हेमंत वर्मा आते थे. इसके अलावा उप-परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता एवं चेयरमैन एल ख्यांगते भी आते थे. वहीं स्ट्रांग रूम में जेपीएससी कर्मियों के अलावा टीडीपीएल के प्रदीप कुमार सिंह आते थे.

    हेमंत आगे बताता है, एफआरओ तथा एसीएफ के मुख्य परीक्षा हो जाने के बाद जब जेपीएससी कार्यालय के स्ट्रांग रूम में उत्तर पुस्तिका जमा कर दिया जाता था, तब वहां से सेटिंग किए गए अभ्यर्थियों की खाली उत्तर पुस्तिका स्ट्रांग रूम से रामवीर सिंह, सत्यपाल सिंह, प्रदीप कुमार सिंह एवं मो. उस्मान के द्वारा निकाला जाता था. जिसके बाद विभिन्न होटलों, किराए पर लिए गए फ्लैटों पर ले जाकर उन खाली उत्तर पुस्तिकाओं को अभ्यर्थियों और विशेषज्ञों की निगरानी में भरवाया जाता था. फिर इन भरे गए उत्तर पुस्तिकाओं को रामवीर सिंह द्वारा जेपीएससी कार्यालय के स्ट्रांग रूम में रख दिया जाता था.

    Also Read : जोहार लाइव एक्सक्लूसिव : यूपी की तरह झारखंड में जेपीएससी घोटाले के लिए तैयार हुआ था सॉफ्टवेयर

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