आनंद दत्त, किसलय शानू
गिरफ्तार आरोपियों में से एक हेमंत वर्मा ने जेपीएससी घोटाले से संबंधित कई अहम खुलासे किए हैं. सीआईडी के समक्ष दिए बयान में उसने स्वीकार किया है कि टीडीपीएल कंपनी ने साल 2020 में यूपी विधानसभा के लिए रिटर्निंग ऑफिसर (आरओ) और असिस्टेंट रिटर्निंग ऑफिसर (एआरओ) की परीक्षा के लिए टीडीपीएल कंपनी की तरफ से सॉफ्टवेयर इस्तेमाल करने को कहा गया था. जिसके बदले उसकी कंपनी पिकर टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड को 3.5 लाख रुपए दिए गए थे.
बता दें, यूपी विधानसभा के लिए इन पदों पर हुई परीक्षाओं में भारी अनियमितता की बात सामने आई थी. जिसके बाद मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट गया और कोर्ट ने सीबीआई जांच का आदेश दिया था. बाद में यूपी सरकार इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक चली गई थी.
हेमंत वर्मा के मुताबिक ठीक इसी तरह साल 2025 में टीडीपीएल कंपनी के निदेशक रामवीर सिंह और सतपाल सिंह ने उनसे दोबारा संपर्क किया. उनके अलावा पिकर टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड के एक और निदेशक मो. उस्मान से भी दोनों ने संपर्क किया.
बकौल हेमंत वर्मा, टीडीपीएल कंपनी के लखनऊ स्थित ऑफिस में हुई इस मुलाकात के दौरान रामवीर सिंह ने उससे कहा कि जिस तरह से आप सब ने पूर्व में यूपी विधानसभा परीक्षा के लिए सॉफ्टवेयर और पोर्टल बनाया था, ठीक उसी तरह झारखंड जेपीएससी एग्जाम के लिए भी बनवाना है.
सहमति देने के बाद हमने रामवीर सिंह ने बताया कि इसके एवज में हमारी कंपनी के सभी स्टाफ का रांची आना-जाना, रहना, खाना आदि का खर्च टीडीपीएल वहन करेगी. इसके अतिरिक्त केवल वेतन मद में प्रतिमाह 3 लाख रुपए देने की बात कही गई.
हेमंत वर्मा ने अपने विस्तृत ब्यौरे में बताया है, हमने अपनी खुद की कंपनी पिकर प्रालि. का नाम गौण कर दिया और बतौर टीडीपीएल स्टाफ काम करने लगे. इस दौरान हमने 14वीं जेपीएससी कंबाइंड एग्जाम, रेग्युलर और जेपीएससी बैकलॉग 2025, बैकलॉग 2023, ड्रग इंस्पेक्टर, एपीपी रेग्युलर और बैकलॉग परीक्षा का ओटीआर और एडमिट कार्ड जेनरेशन का काम किया.
इस दौरान मैं और संजय मिलकर ओटीआर और ओएसएम जेनरेशन का सॉफ्टवेयर डेवलप किया. ओटीआर में पोस्ट एप्लीकेशन और एडमिट कार्ड जेनरेशन का काम किया जाता था. जिसकी कोडिंग भी हम दोनों ने मिलकर किया था. इसके लिए माइक्रोसॉफ्ट के एप्लीकेशन का उपयोग किया जाता था. इसके बैकएंड का काम मो. उस्मान देखता था. हमने एपीपी रेग्युलर और बैकलॉग के अलावा एसीएफ, एफआरओ तथा 14वीं जेपीएससी मेंस का ओटीआर तथा पोस्ट एप्लीकेशन का काम किया था.

ओएमआर मैन्युपुलेशन कर 14वीं जेपीएससी में 100 से अधिक लोगों को कराया पास
वो आगे कहता है, मेंस परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाएं परीक्षा केंद्रों से प्राप्त होने के बाद संजय और प्रदीप कुमार उसे स्कैन करते थे. स्कैनिंग के बाद उस्मान मेरे माध्यम से उन उत्तर पुस्तिकाओं को सिस्टम में अपलोड करता था. जिन अभ्यर्थियों की पहले से सेटिंग होती थी, उस्मान उन्हीं अभ्यर्थियों का बारकोड लेकर आता था. फिर उन्हीं बारकोड वाली उत्तर पुस्तिकाओं की पहचान कर पीडीएफ एडिटर के माध्यम से उनमें अंक बढ़ाकर हेरफेर की जाती थी. इसके बाद संजय बैकएंड सर्वर में भी संबंधित अंकों और डेटा में आवश्यक परिवर्तन करता था.
इस तरह से एफआरओ मेंस में 20 से 25, एसीएफ मेंस में 10 से 15 अभ्यर्थियों के मेंस के उत्तर पुस्तिकाओं में पीडीएफ एडिटर एवं बैकएंड सर्वर के माध्यम से परिवर्तन किए गए.
हेमंत वर्मा के मुताबिक 14वीं जेपीएससी एवं एसीएफ पीटी परीक्षा में गड़बड़ी करने में रामवीर सिंह, सत्यपाल सिंह और मो. उस्मान की मुख्य भूमिका रहती थी. स्कैनिंग के समय जब ओएमआर शीटें हैंडओवर की जाती थी, तब प्रदीप कुमार सिंह, रामवीर सिंह, सत्यपाल सिंह और मो. उस्मान चयनित अभ्यर्थियों की ओएमआर शीट में उत्तर भरने का काम करते थे. इसके बाद प्रदीप कुमार उन ओएमआर शीटों को स्कैन कर सिस्टम में अपलोड करता था. जिसके आधार पर रिजल्ट प्रोसेस किया जाता था.
इसी प्रक्रिया को अपनाते हुए ओएमआर शीट में मैनिपुलेशन करते हुए 14वीं जेपीएससी पीटी में 100 से अधिक छात्रों को पास कराया गया.
इन सब के एवज में टीडीपीएल कंपनी के निदेशक रामवीर सिंह ने हमें यह प्रलोभन दिया था कि धांधली से जो पैसा आएगा, उसका 20 प्रतिशत कमीशन हमें यानी पिकर कंपनी को दिया जाएगा. यही वजह थी कि हम सब टीडीपीएल के किसी भी काम को करने से इंकार नहीं करते थे.


