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    Home»जोहार ब्रेकिंग»हाथी कॉरिडोर: 6 साल, 555 मौतें और 17 कॉरिडोर… सुप्रीम कोर्ट के आदेश से सुलझेगी उलझन?
    जोहार ब्रेकिंग

    हाथी कॉरिडोर: 6 साल, 555 मौतें और 17 कॉरिडोर… सुप्रीम कोर्ट के आदेश से सुलझेगी उलझन?

    joharlive NetworkBy joharlive NetworkAugust 26, 2026Updated:August 26, 2026No Comments4 Mins Read1
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    विजय उरांव

    हाथियों के प्राकृतिक रास्तों (हाथी कॉरिडोर) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा रुख अपनाया है. बीते 17 अगस्त 2026 के एक फैसले में कोर्ट ने स्पष्ट किया कि फसल या संपत्ति को नुकसान होने की आशंका के आधार पर भी हाथी कॉरिडोर में बाधा नहीं डाली जा सकती. शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को देशभर के हाथी कॉरिडोर का नया सर्वे कराने और राज्यों से इन रास्तों को सुरक्षित रखने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी लेने को कहा है.

    लेकिन सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश झारखंड के लिए सिर्फ जंगल और हाथियों के संरक्षण का मुद्दा नहीं है. यहां मामला सीधे तौर पर इंसानों की जान से जुड़ा है. केंद्र सरकार आंकड़ों के मुताबिक, झारखंड में पिछले छह वित्त वर्षों में हाथियों के हमलों में 555 लोगों की मौत हुई है.

    आखिर क्या होता है हाथी कॉरिडोर?

    हाथी कॉरिडोर कोई इंसानों की बनाई हुई सड़क नहीं है. यह वह प्राकृतिक रास्ता या इलाका है, जिसका इस्तेमाल हाथियों के झुंड एक जंगल से दूसरे जंगल या एक हाथी आवास से दूसरे इलाके तक आने-जाने के लिए करते हैं.

    हाथी भोजन, पानी और मौसम के हिसाब से एक इलाके से दूसरे इलाके में जाते हैं. अगर इसी पारंपरिक रास्ते में सड़क, रेलवे लाइन, खनन, फैक्ट्री या बस्ती जैसी गतिविधियां बढ़ जाती हैं, तो हाथियों का रास्ता प्रभावित होता है. इसके बाद हाथी खेतों और आबादी वाले इलाकों में पहुंच जाते हैं और यहीं से मानव-हाथी संघर्ष की शुरुआत होती है.

    झारखंड में 17 हाथी कॉरिडोर चिन्हित

    झारखंड में हाथियों की सुरक्षित आवाजाही के लिए 17 कॉरिडोर चिन्हित किए गए हैं:

    • प्रमुख कॉरिडोर: भगाबिला-रत्नासाई, जामपानी-भगाबिला, सांगाजाता-हल्दीपोखर, लेपांग-डुमुरिया, अंकुआ-अंबिया, रायबेरा-पुलबाबुरु, दलापानी-सुकलारा और दलमा-चांडिल.

    • अन्य चिन्हित कॉरिडोर: डुमरिया-नायाग्राम, सिल्ली-अनगड़ा, भरनो-बेरो-कर्रा/सिसई-कर्रा, दलमा-आसनबनी, दलमा-रुगाई, सियालजोरा-धोबाधोबिन, दलापानी-कंकराझोर, अंजड़बेरा-बिचाबुरु और डुमरिया-कुंडालुका-मुराकनजिया.

    खास बात यह है कि दलापानी-कंकराझोर कॉरिडोर झारखंड और पश्चिम बंगाल दोनों राज्यों से जुड़ा है. यानी हाथियों की आवाजाही किसी प्रशासनिक सीमा से नहीं रुकती.

    छह साल में 555 लोगों की मौत: आंकड़ों में भयावहता

    केंद्र सरकार (संसद में पेश) के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2019-20 से 2024-25 के बीच झारखंड में हाथी हमलों से 555 लोगों की जान जा चुकी है.

    • 2019-20: 84 मौतें
    • 2020-21: 74 मौतें
    • 2021-22: 133 मौतें (सबसे अधिक)
    • 2022-23: 96 मौतें
    • 2023-24: 87 मौतें
    • 2024-25: 81 मौतें

    इन छह वर्षों में औसतन हर साल करीब 93 लोगों की जान हाथियों के हमलों में गई. यह आंकड़ा बताता है कि हाथियों को सुरक्षित रखना और इंसानों को बचाना दो अलग-अलग मुद्दे नहीं हैं, बल्कि एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हैं.

    सरकार की पहल: मैपिंग, एलिवेटेड रोड और हाई-टेक ट्रैकिंग

    मानव-हाथी संघर्ष की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अधिकारियों को राज्य के सभी हाथी कॉरिडोर की सूक्ष्म मैपिंग कराने का निर्देश दिया है. संवेदनशील इलाकों का एरिया डिमार्केशन किया जाएगा. मुख्यमंत्री ने साफ कहा है कि हाथियों और दूसरे वन्यजीवों के पारंपरिक आवागमन मार्ग किसी भी स्थिति में बाधित नहीं होने चाहिए.

    सरकार द्वारा उठाए जा रहे प्रमुख कदम:

    • इंफ्रास्ट्रक्चर: कॉरिडोर वाले इलाकों में जरूरत पड़ने पर एलिवेटेड रोड जैसी तकनीक का इस्तेमाल होगा.
    • पर्यावरण सुधार: जंगलों में हाथियों के लिए उपयोगी खाद्य प्रजातियों के पौधे लगाए जा रहे हैं.
    • हाई-टेक निगरानी: रामगढ़, बोकारो और चाकुलिया जैसे संवेदनशील इलाकों में थर्मल और इंफ्रारेड कैमरे लगाए जा रहे हैं. हाथियों की मौजूदगी का पता चलते ही हूटर के जरिए अलर्ट दिया जाएगा.
    • रियल टाइम अलर्ट: ग्रामीणों के मोबाइल नंबर रजिस्टर कर real-time SMS से हाथियों की आवाजाही की जानकारी दी जा रही है.
    • AI और ड्रोन: फिलहाल GPS कॉलर की जगह AI आधारित मॉनिटरिंग और ड्रोन सर्विलांस से हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है.

    करोड़ों का फंड, फिर भी चुनौती बरकरार

    हाथियों के संरक्षण के लिए केंद्र सरकार से झारखंड को पिछले पांच वर्षों में Centrally Sponsored Scheme-Project Tiger & Elephant के तहत करीब 15.14 करोड़ मिले हैं. इसके अलावा Development of Wildlife Habitats योजना के तहत 1.71 करोड़ की केंद्रीय सहायता भी दी गई है.

    संरक्षण के लिए बजट, चिन्हित कॉरिडोर और अत्याधुनिक निगरानी तकनीकों के बावजूद धरातल पर मानव-हाथी संघर्ष की चुनौती अब भी लगातार बनी हुई है.

    Also Read : हाथी कॉरिडोर की होगी सूक्ष्म मैपिंग, मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने का बनेगा प्रभावी प्लान: हेमंत सोरेन

    झारखंड झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सुप्रीम कोर्ट हाथी कॉरिडोर
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