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    Home»आदिवासी»झारखंड का आरोप: केंद्र ने रोकी छात्रवृत्ति, केंद्र बोला- डेटा ही नहीं
    आदिवासी

    झारखंड का आरोप: केंद्र ने रोकी छात्रवृत्ति, केंद्र बोला- डेटा ही नहीं

    Joharlive NetworkBy Joharlive NetworkAugust 6, 2026No Comments3 Mins Read0
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    रांची: अनुसूचित जनजाति (ST) छात्रों की प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति को लेकर झारखंड में एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं. केंद्र सरकार ने लोकसभा में स्वीकार किया है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए झारखंड के लाभार्थियों का डेटा DBT ट्राइबल पोर्टल पर उपलब्ध नहीं है. यह स्थिति ऐसे समय सामने आई है, जब झारखंड सरकार लगातार केंद्र पर छात्रवृत्ति योजनाओं में अपने हिस्से की राशि समय पर जारी नहीं करने का आरोप लगाती रही है. हालांकि, केंद्र सरकार ने अपने जवाब में यह स्पष्ट नहीं किया कि 2025-26 का डेटा पोर्टल पर उपलब्ध क्यों नहीं है.

    जनजातीय कार्य राज्य मंत्री दुर्गादास उइके ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि मंत्रालय DBT ट्राइबल पोर्टल के माध्यम से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा भेजे गए लाभार्थियों के आंकड़ों की निगरानी करता है. इसी पोर्टल पर उपयोगिता प्रमाणपत्र (UC), व्यय विवरण (SoE), प्रश्नों और अन्य दस्तावेजों का ऑनलाइन आदान-प्रदान किया जाता है, जिससे छात्रवृत्ति योजनाओं की प्रक्रिया तेज हुई है और शिकायतों में भी कमी आई है.

    केंद्र के पास 2025-26 का कोई रिकॉर्ड नहीं

    लोकसभा में पेश आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में झारखंड के लिए प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक दोनों छात्रवृत्ति योजनाओं के लाभार्थियों की संख्या दर्ज नहीं है. जबकि 2024-25 में प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के 16,250 और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के 61,098 लाभार्थियों का रिकॉर्ड उपलब्ध है. वहीं 2023-24 में प्री-मैट्रिक योजना के 7,311 और पोस्ट-मैट्रिक योजना के 97,440 लाभार्थियों का विवरण दर्ज किया गया था. जबकि 2025-26 के प्री और पोस्ट मैट्रिक योजना के कोई रिकॉर्ड नहीं है

    केंद्र सरकार ने अपने जवाब में कहा है कि छात्रवृत्ति योजनाओं में एंड-टू-एंड डिजिटलीकरण, DBT ट्राइबल पोर्टल, राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल (NSP) और SNA SPARSH मॉडल के माध्यम से पारदर्शिता बढ़ाई गई है. सरकार के अनुसार, इस व्यवस्था के तहत केंद्र और राज्य की हिस्सेदारी सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में DBT के जरिए भेजी जाती है, जिससे भुगतान में देरी कम होती है और बिचौलियों की भूमिका समाप्त होती है.

    हालांकि, 2025-26 में झारखंड का डेटा उपलब्ध नहीं होने पर केंद्र सरकार ने कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया. जवाब में यह नहीं बताया गया कि राज्य सरकार की ओर से आंकड़े पोर्टल पर अपलोड नहीं किए गए हैं, छात्रवृत्ति वितरण लंबित है या इसके पीछे कोई अन्य प्रशासनिक कारण है.

    केंद्र की देरी से हजारों आदिवासी छात्रों को आर्थिक सहायता नहीं मिलती

    यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि झारखंड सरकार पिछले काफी समय से केंद्र सरकार पर ST छात्रवृत्ति योजनाओं के लिए केंद्रीय हिस्से की राशि समय पर जारी नहीं करने का आरोप लगाती रही है. राज्य सरकार का कहना रहा है कि केंद्रीय सहायता में देरी का असर सीधे छात्रवृत्ति वितरण पर पड़ता है और हजारों आदिवासी छात्रों को समय पर आर्थिक सहायता नहीं मिल पाती.

    ऐसे में लोकसभा में केंद्र सरकार द्वारा 2025-26 के लिए झारखंड का डेटा उपलब्ध नहीं होने की जानकारी सामने आने से छात्रवृत्ति वितरण की स्थिति को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं. यदि DBT ट्राइबल पोर्टल को रियल टाइम मॉनिटरिंग और पारदर्शी व्यवस्था का माध्यम बताया जा रहा है, तो झारखंड के लाभार्थियों का रिकॉर्ड पोर्टल पर उपलब्ध नहीं होने की वजह क्या है, इसका जवाब फिलहाल केंद्र सरकार ने नहीं दिया है. अब इस मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकार के स्पष्टीकरण का इंतजार रहेगा.

    Also Read : छात्रवृति योजना के लिए छात्र-छात्राओं का जल्द करें चयन: चमरा लिंडा

    अनुसूचित जनजाति (ST) छात्रों झारखंड प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति लोकसभा
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