बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच ने गुरुवार को तहलका मैगजीन के पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल को 2013 के रेप केस में दोषी ठहराते हुए 10 साल की कठोर कैद की सजा सुनाई. कोर्ट ने उन्हें दो सप्ताह के भीतर संबंधित जेल अधिकारियों के सामने सरेंडर करने का निर्देश भी दिया है. यह फैसला गोवा सरकार की उस अपील पर आया, जिसमें 2021 में ट्रायल कोर्ट द्वारा दिए गए बरी करने के आदेश को चुनौती दी गई थी.
मामला नवंबर 2013 का है. तहलका की महिला पत्रकार ने आरोप लगाया था कि गोवा में आयोजित थिंक फेस्ट के दौरान 7 और 8 नवंबर की रात होटल की लिफ्ट में तरुण तेजपाल ने दो बार उनका यौन उत्पीड़न किया.
जस्टिस नीला गोखले और जस्टिस अमित जामसांडेकर की डिवीजन बेंच ने पहले ट्रायल कोर्ट का फैसला पलटते हुए तेजपाल को दोषी ठहराया था. गुरुवार को कोर्ट ने सजा का ऐलान किया. सजा सुनाते हुए कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड से यह साफ है कि पीड़िता के विरोध और मना करने के बावजूद अपराध दोहराया गया. कोर्ट ने राज्य सरकार की उस दलील का भी जिक्र किया, जिसमें कहा गया था कि आरोपी की ओर से किसी तरह का पछतावा नहीं दिखा.
हालांकि कोर्ट ने यह भी माना कि घटना को 13 साल बीत चुके हैं और उसके बाद तेजपाल के खिलाफ किसी अन्य ऐसे मामले की जानकारी सामने नहीं आई. कोर्ट ने कहा कि दोनों पक्ष शायद अपनी-अपनी जिंदगी में आगे बढ़ चुके होंगे. इन बातों को भी सजा तय करते समय ध्यान में रखा गया.
क्या है पूरा मामला
यह मामला नवंबर 2013 का है. आरोप है कि 7 और 8 नवंबर की रात गोवा के एक लग्जरी होटल की लिफ्ट में तरुण तेजपाल ने अपनी जूनियर सहयोगी के साथ यौन उत्पीड़न और रेप किया था. शिकायत के बाद गोवा पुलिस ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की और उन्हें नवंबर 2013 में गिरफ्तार किया गया. करीब छह महीने जेल में रहने के बाद जुलाई 2014 में उन्हें जमानत मिल गई. मामले की सुनवाई 2017 में शुरू हुई. मई 2021 में गोवा की ट्रायल कोर्ट ने सबूतों में कमी का हवाला देते हुए उन्हें बरी कर दिया था. इसके बाद गोवा सरकार ने इस फैसले को बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी.
सरेंडर के लिए मिले दो हफ्ते
हाई कोर्ट ने तरुण तेजपाल को जेल अधिकारियों के सामने सरेंडर करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है. इसके बाद उन्हें सजा काटनी होगी. कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता की अलग-अलग धाराओं के तहत सजा सुनाई. कोर्ट ने तेजपाल को IPC की धारा 376(2)(f), 376(2)(k), 354A और 354B के तहत दोषी माना है. ये धाराएं यौन उत्पीड़न, महिला की मर्यादा भंग करने, कपड़े उतारने की कोशिश, गलत तरीके से रोकने और गलत तरीके से कैद करने से संबंधित है. हालांकि सभी सजाएं एक साथ चलेंगी. यानी तरुण तेजपाल को कुल 10 साल जेल में बिताने होंगे.
हाईकोर्ट के फैसले पर तेजपाल ने कहा,
‘हम फैसले से बहुत निराश हैं. हम सुप्रीम कोर्ट जाएंगे. कुछ लोग तहलका और राजनीतिक बदले की भावना से 13 सालों से मेरे पीछे पड़े हैं. हमने 7.5 साल ट्रायल कोर्ट में केस लड़ा और बरी हुए थे.’
हाईकोर्ट ने माना कि ट्रायल कोर्ट ने सबूतों की बजाय घटना के बाद पीड़ित महिला के व्यवहार पर ज्यादा ध्यान दिया. साथ ही, तेजपाल के माफी मांगने वाले ई-मेल जैसे अहम सबूतों को भी सही अहमियत नहीं दी.
ट्रायल कोर्ट ने 21 मई 2021 को तेजपाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया था. कोर्ट ने कहा था, ‘अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं.’ इस फैसले को गोवा सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. सरकार का तर्क था कि निचली अदालत ने सबूतों को सही से नहीं समझा और पीड़ित की गवाही का गलत आकलन किया.
पीड़ित ने तहलका में शिकायत की, FIR दर्ज… समझें पूरा मामला
महिला पत्रकार ने सबसे पहले तहलका की मैनेजिंग एडिटर शोमा चौधरी को ई-मेल भेजकर शिकायत की. इसमें उन्होंने लिखित माफी, पूरे स्टाफ के सामने घटना स्वीकार करने और आंतरिक यौन उत्पीड़न शिकायत समिति (ICC) गठित करने की मांग की थी. मामला सार्वजनिक होने के बाद गोवा पुलिस ने स्वत: संज्ञान लेकर FIR दर्ज की और जांच शुरू की. जांच में CCTV फुटेज, ई-मेल और गवाहों के बयान समेत अन्य साक्ष्य जुटाए गए. इसके बाद तेजपाल की गिरफ्तारी हुई.
राज्य सरकार ने मांगी थी अधिकतम सजा
गोवा सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में कहा कि यह मामला भरोसे और अधिकार की स्थिति का गलत इस्तेमाल करने का है. उन्होंने दलील दी कि पीड़िता आरोपी की जूनियर सहयोगी थी और आरोपी की स्थिति उसके लिए अभिभावक जैसी थी. उन्होंने कहा कि पीड़िता के साफ इनकार के बावजूद अगली घटना हुई, जिससे आरोपी के रवैये का पता चलता है. उन्होंने कोर्ट से अधिकतम सजा देने की मांग की ताकि समाज में यह स्पष्ट संदेश जाए कि किसी महिला का “ना” हमेशा “ना” ही होता है.
तरुण तेजपाल की ओर से वरिष्ठ वकील आबाद पोंडा ने सजा में नरमी बरतने की मांग की. उन्होंने कहा कि तेजपाल पहले ही करीब छह महीने जेल में रह चुके हैं और इस अवधि को सजा में समायोजित किया जाना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि तेजपाल का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और यह उनके खिलाफ पहला मामला है. साथ ही सुप्रीम कोर्ट में अपील करने के लिए सजा पर कुछ समय तक रोक लगाने की भी मांग की गई.
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