जामताड़ा : दिशोम गुरु और झारखंड आंदोलन के अग्रणी नेता, पद्म भूषण से सम्मानित दिवंगत शिबू सोरेन की पहली पुण्यतिथि पर मंगलवार को जामताड़ा शहर के इंदिरा चौक पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में झारखंड विधानसभा अध्यक्ष रवींद्र नाथ महतो और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए.
इस मौके पर जामताड़ा के डीसी आलोक कुमार, एसपी शंभू कुमार सिंह समेत झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता, कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में आम लोग मौजूद रहे. कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष रवींद्र नाथ महतो, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी और अन्य अतिथियों ने दिशोम गुरु शिबू सोरेन के कटआउट और प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी.
श्रद्धांजलि सभा में लोगों ने शिबू सोरेन के संघर्षपूर्ण जीवन और झारखंड आंदोलन में उनके योगदान को याद किया. इस दौरान उनके विचारों और आदर्शों को आगे बढ़ाने का संकल्प भी लिया गया.
भारत रत्न देने की मांग
सभा को संबोधित करते हुए विधानसभा अध्यक्ष रवींद्र नाथ महतो ने कहा कि शिबू सोरेन को पद्म भूषण से सम्मानित किया जा चुका है, लेकिन उनके अनुयायी और झारखंड के लोग उनके योगदान को देखते हुए उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित करने की मांग कर रहे हैं.
उन्होंने कहा कि दिशोम गुरु ने अपना पूरा जीवन जल, जंगल, जमीन, आदिवासी-मूलवासी अस्मिता और झारखंड राज्य के निर्माण के संघर्ष को समर्पित कर दिया. उन्होंने शिबू सोरेन को सिर्फ एक राजनीतिक नेता नहीं, बल्कि झारखंड के गरीब, आदिवासी, शोषित और वंचित समाज की आवाज बताया.
महाजनी प्रथा और शोषण के खिलाफ लड़ी लंबी लड़ाई
रवींद्र नाथ महतो ने कहा कि महाजनी प्रथा और शोषण के खिलाफ शिबू सोरेन का संघर्ष झारखंड आंदोलन की मजबूत नींव बना. अलग राज्य के निर्माण के लिए उन्होंने कई मुश्किलों और चुनौतियों का सामना किया, लेकिन लोगों के अधिकारों की लड़ाई से कभी पीछे नहीं हटे.
उन्होंने कहा कि शोषणमुक्त समाज की स्थापना ही गुरुजी के संघर्ष का मूल उद्देश्य था. समाज में समानता, न्याय और अधिकार सुनिश्चित करने का उनका संदेश आज भी उतना ही महत्वपूर्ण है. आने वाली पीढ़ियों के लिए उनके विचार हमेशा प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे.
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, प्रतिमा नई पीढ़ी को दिलाएगी याद
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने शिबू सोरेन की पहली पुण्यतिथि पर उन्हें नमन किया. उन्होंने कहा कि जामताड़ा के इंदिरा चौक पर दिशोम गुरु की प्रतिमा स्थापित करने की पहल सराहनीय है. उन्होंने कहा कि शिबू सोरेन का पूरा जीवन संघर्ष, त्याग और जनसेवा का प्रतीक रहा है. इंदिरा चौक पर उनकी प्रतिमा नई पीढ़ी को उनके विचारों और योगदान की याद दिलाती रहेगी.
डॉ. अंसारी ने कहा कि झारखंड के निर्माण में शिबू सोरेन के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता. उन्होंने गरीबों, आदिवासियों और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए लंबी लड़ाई लड़ी. आज झारखंड जिस पहचान के साथ खड़ा है, उसमें दिशोम गुरु की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है.
अधिकारियों और आम लोगों ने भी दी श्रद्धांजलि
श्रद्धांजलि सभा के दौरान जामताड़ा के उपायुक्त आलोक कुमार, पुलिस अधीक्षक शंभू कुमार सिंह समेत जिले के कई अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी दिशोम गुरु को श्रद्धासुमन अर्पित किए.
कार्यक्रम में झामुमो जिला अध्यक्ष नरेंद्र मुर्मू, सांसद प्रतिनिधि अशोक मंडल, समाजसेवी चमेली देवी, झामुमो नेता प्रदीप मंडल, रवींद्र नाथ दुबे, प्रो. कैलाश प्रसाद समेत बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी, कार्यकर्ता और आम नागरिक मौजूद रहे.
झारखंड की अस्मिता और सामाजिक न्याय के संघर्ष के प्रतीक थे गुरुजी
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि शिबू सोरेन का जीवन झारखंड की अस्मिता, जल-जंगल-जमीन और सामाजिक न्याय के संघर्ष का प्रतीक रहा है. उन्होंने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा आदिवासी और वंचित समाज के अधिकारों की लड़ाई में लगा दिया. वक्ताओं ने कहा कि दिशोम गुरु के विचार और आदर्श आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरणा देते रहेंगे. उनकी पहली पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में लोगों ने उनके बताए रास्ते पर चलने और उनके संघर्षों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया.
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